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बदल रहे हालात:घट रहा कोरोना; पॉजिटिव दर 33 से गिरकर 17 फीसदी हुई, कोविड हॉस्पिटल के 120 बेड खाली

राजनांदगांवएक महीने पहले
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ग्रामीण इलाकों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए धामनसरा में कैंप लगाकर कोविड जांच की गई। - Dainik Bhaskar
ग्रामीण इलाकों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए धामनसरा में कैंप लगाकर कोविड जांच की गई।
  • बीते 4 दिन से नए संक्रमण दर में लगातार गिरावट हो रही, हॉस्पिटल्स में भी ऑक्सीजन बेड खाली होने लगे
  • चिंता: ग्रामीण इलाकों में अब भी जारी है संक्रमण की रफ्तार, लगातार बढ़ रहे मरीज

कोरोना संक्रमण को लेकर जिले में हालात नियंत्रण की ओर हैं। पॉजिटिव दर गिरकर 17 फीसदी पर आ गई है। इसके अलावा शहर के ज्यादातर कोविड केयर सेंटर खाली हो रहे हैं, वहीं हॉस्पिटल्स में भी ऑक्सीजन बेड खाली होने लगे हैं। इसे अब तक की सबसे स्थिति मानी जा रही है। 15 अप्रैल के आसपास जिले में पॉजिटिव दर 33 फीसदी पहुंच गई थी, याने हर 100 जांच में 33 संक्रमित सामने आ रहे थे। लेकिन अब इसमें 50 फीसदी तक गिरावट हो गई है।

बीते 4 दिनों से जिले की पॉजिटिव दर 17 फीसदी में आ गई है। इससे काफी हद तक जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को राहत मिली है। राहत की दूसरी सबसे अच्छी खबर जिले के निजी और सरकारी कोविड हॉस्पिटल्स से भी समाने आ रही है। लगातार फुल रहे पेंड्री कोविड हास्पिटल में वर्तमान में 120 बेड खाली हैं। इसी तरह दूसरे निजी हॉस्पिटल्स में भी ऑक्सीजन बेड खाली हो रहे हैं। इस लिहाज से हॉस्पिटल्स में मरीजों को दाखिल करने के लिए चल रही आपाधापी में भी कमी आई है।

इधर, नगर निगम क्षेत्र में कम हो रहे हैं नए मरीज
नगर निगम के 51 वार्डों की बात करें तो नए संक्रमितों की संख्या में जबरदस्त कमी आई है। अप्रैल में शहर में ही रोजाना 250 के आसपास नए मरीज सामने आ रहे थे, लेकिन बीते दो दिन में नए मरीजों की संख्या 100 से भी नीचे चली गई है। ज अब तक शहर के किसी भी वार्ड में बड़े कोरोना विस्फोट की स्थिति नहीं बनी है। हालांकि राजनांदगांव ग्रामीण इलाकों में अब भी औसत 125 नए मरीज रोज सामने आ रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों में नियंत्रण नहीं, प्रशासन की टीम जुटी
शहर सहित खैरागढ़, डोंगरगढ़ और दूसरे नगरों में भी मरीजों की संख्या में गिरावट हुई है। निकाय क्षेत्रों में अप्रैल की तुलना में मई में काफी कम मरीज सामने आ रहे हैं। लेकिन चिंताजनक हालात ग्रामीण इलाकों में बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में संक्रमण की रफ्तार जस की तस है। लॉकडाउन के बावजूद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कोई बड़ी गिरावट नए मरीजों की संख्या में नहीं आई है। इसके चलते अब जिला प्रशासन ग्रामीण इलाकों में संक्रमण को रोकने के लिए फोकस कर रहा है। लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं।

मौत का आंकड़ा भी 50 फीसदी तक गिरा
जिले में लगातार हो रही मौतें भी धीरे धीरे कम हो रही है। अप्रैल की तुलना में मई के पहले सप्ताह में मौत का आंकड़ा 50 फीसदी तक कम हो गया है। 15 से 30 अप्रैल के बीच जिले में रोजाना औसत 15 मौतें हो रही थी, जो अब गिरकर 6 में पहुंच गई है। यह राहत वाली खबर है। अप्रैल के तीसरे सप्ताह में रोजाना 20 से 22 मौतें दर्ज की गई थी, लेकिन मई के शुरुआत के साथ ही इस संख्या में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह तेजी से खाली हो रहे बेड और समय पर उपचार मिलना साबित हो रहा है।

होम आइसोलेशन के मरीज तेजी से रिकवर भी हो रहे
जिले में वर्तमान में जो संक्रमित सामने आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर संक्रमितों को सामान्य लक्षण ही हैं। इसके चलते ये मरीज होम आइसोलेशन में रहकर ही इलाज ले रहे हैं। वहीं हॉस्पिटल्स की तुलना में होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों के डिस्चार्ज होने के आंकड़े भी अधिक हैं। वर्तमान में जिले में कुल 1899 एक्टिव केस हैं, जिनमें से 6748 मरीज होम आइसोलेशन में है। वहीं जिले के 306 मरीज दुर्ग, भिलाई और रायपुर के हॉस्पिटल्स में दाखिल हैं।

तीन चरण के लॉकडाउन से संक्रमण की चेन कमजोर
जिले में कोरोना संक्रमण को लेकर जो सकारात्मक बदलाव सामने आ रहे हैं, उसे तीन चरणों के लॉकडाउन की वजह ही मानी जा रही है। जिले में 11 अप्रैल से लॉकडाउन लगाया गया है। इसका असर अब धीरे धीरे सामने आ रहा है। चौथे चरण का लॉकडाउन 15 मई तक के लिए घोषित है, ऐसे में तब तक स्थिति और बदलेगी।

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