गर्भावस्था में लिंग जांच अपराध:ऐसा करने और कराने वाले को होगी सजा

राजनांदगांव19 दिन पहले
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  • राज्य नोडल अधिकारी श्रीवास्तव ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के बारे में बताया

प्री कॉन्सेप्शन एंड प्री नेटल डॉयग्नोस्टिक टेक्निक (पीसीपीएनडीटी) एक्ट अंतर्गत बुधवार की शाम कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला सलाहकार समिति के सदस्यों, जिला स्तरीय निरीक्षण एवं निगरानी समिति के सदस्यों व शासकीय एवं निजी रेडियोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

राज्य नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी संयुक्त संचालक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा कि गर्भावस्था में लिंग की जांच करवाना अपराध है और ऐसा करने एवं कराने वाले दोनों को कानून कड़ी सजा देता है। इससे भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को बढ़ावा मिलता है। हमारे प्रदेश में माता एवं बहनों को ऊंचा दर्जा दिया गया है। सभी सोनोग्राफी सेंटर में हिन्दी, अंग्रेजी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में एकरूपता के साथ जागरूकता के लिए गर्भावस्था में लिंग जांच अपराध है, संबंधी बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाएं। इसके साथ ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से संबंधित पोस्टर भी लगाएं।

उन्होंने बताया कि गंडई ब्लॉक के सोनोग्राफी सेंटर का बिना किसी पूर्व सूचना के आकस्मिक निरीक्षण किया गया तथा नियमानुसार संचालित नहीं होने पर सेंटर को सील करने की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं होने की स्थिति में आगे भी इस तरह की कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर के प्रोफेशन के साथ नैतिक मूल्यों का पालन करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोनोग्राफी मशीन का जिस स्थान एवं भवन के लिए रजिस्ट्रेशन किया गया है, वही होना चाहिए। इसके साथ ही फार्म एफ समय पर स्वास्थ्य विभाग के वेबसाइट में अपलोड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अयोग्य व्यक्ति से क्लीनिक में सेवाएं न लें। शासन द्वारा पीसीपीएनडीटी एक्ट के संबंध में संशोधन या नए दिशा-निर्देश की जानकारी रखें।

सतर्कता के साथ नियमों का पालन हो- सीएमएचओ
सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा कि समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण होते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सभी सोनोग्राफी सेंटर सतर्कता के साथ नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था में लिंग चयन विधि के विरूद्ध है। यह सभी सोनोग्राफी सेन्टर में बोर्ड में लिखा होना चाहिए। पीसीपीएनडीटी कंसल्टेंट डॉ. वर्षा राजपूत ने बताया कि बालिका लिंगानुपात पर ध्यान देते हुए कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने पीसीपीएनडीटी एक्ट में रजिस्ट्रेशन के संबंध में जानकारी ली।

वर्ष 1994 में लागू हुआ था यह कानून
उन्होंने बताया कि यह कानून 1994 में लागू हुआ था तथा लिंग चयन होने की स्थिति में उसके दुरुपयोग की आशंका को ध्यान में रखते हुए यह कानून लाया गया है। उन्होंने कहा कि सभी सोनोग्राफी सेंटर में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, डॉक्टर का नाम एवं अन्य जानकारी डिस्प्ले करें।

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