किताब में छग की संस्कृति में श्रीराम का वर्णन:डॉ. गीतेश अमरोहित ने लिखी छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ की कहानी

राजनांदगांव3 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

मेडिकल कॉलेज के रायपुर के भूतपूर्व चिकित्सक डॉ.गीतेश कुमार अमरोहित ने छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ नाम से एक किताब लिखी है। प्रमाणिकता के साथ रामायणकाल में भगवान श्रीराम के छत्तीसगढ़ के जंगलों में बिताए गए पलों का वर्णन करने वाली अपनी तरह की यह एक पहली किताब है।

दो सौ से अधिक पृष्ठों वाली इस किताब में राम वन गमन पथ के सरगुजा से लेकर सासाराम तक के विभिन्न राम वन गमन पथ का प्रमाणिकता के साथ वर्णन किया गया है। खास बात यह है कि इस पुस्तक में उन्हीं स्थलों का वर्णन किया गया है जिसे लेकर छत्तीसगढ़ की सरकार राम वन गमन पथ सर्किट के रूप में उन्नत कर पर्यटन का दर्जा दे रही है।

पुस्तक में वर्णित बातें
पुस्तक राम वन गमन पथ न केवल राम के वनवास काल में छत्तीसगढ़ के प्रवास को दर्शाती है, बल्कि छत्तीसगढ़ में राम से जुड़ी संस्कृति पर भी प्रकाश डालती है। विश्व के एक मात्र रामनामी संप्रदाय जोकि अपने पूरे शरीर पर राम नाम का गोदना गुदवाते हैं, उनका वर्णन मिलता है।

राम को छत्तीसगढ़ वासी भांजा मानते हैं, इस कारण भांजा या भांजी को भगवान राम मानते हुए पैर छूकर आशीर्वाद लेने का रिवाज संपूर्ण छत्तीसगढ़ में देखने को मिलता है, इसका वर्णन इस पुस्तक में किया है। छग के ग्रामीण अंचलों में धान संग्रहित करने की जगह जिसे कोठी कहा जाता है।

लिखने में लगेे तीन साल
राम वन गमन पथ पुस्तक के लेखक डॉ.अमरोहित का कहना है कि पुस्तक के लिए सामग्री संकलन में करीब पांच से छह वर्षों का समय लगा। लेखन में एक वर्ष का समय लगा। कुछ जानकारियां तो शासन के अधिकृत स्रोतों से जुटाई गई हैं। वहीं कुछ जानकारियों के लिए स्थान विशेष का जाकर वहां के निवासियों से पूछताछ कर जानकारियां संकलित की गई हैं। लेखक का कहना है कि जानकारियों को इतने रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है कि पाठक इसे लगातार पढ़ते चला जाता है।

खबरें और भी हैं...