सालभर में 500 से ज्यादा शवों का दाह संस्कार:चिताओं की आग से धुंधला जाती हैं आंखें, पीपीई किट की गर्मी में उबल जाते हैं फिर भी कर्म से पीछे नहीं हट रहे

राजनांदगांव6 महीने पहले
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दिनभर शवों का आना जारी रहता है, मुक्तिधाम में ही भोजन करते कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
दिनभर शवों का आना जारी रहता है, मुक्तिधाम में ही भोजन करते कर्मचारी।
  • मुक्तिधाम की कहानी: संक्रमण काल में जब परिवार के सदस्य शव को कंधा नहीं दे पा रहे हैं तो ये आगे आ रहे
  • इनका न बीमा हुआ है और न ही पर्याप्त वेतन मिलता है

कोरोनाकाल में संक्रमण का भयावह दौर चल रहा है। इसलिए किसी की मौत हो जाती है तो परिवार के सदस्य भी हाथ नहीं लगा पाते। शव को अपनों का कंधा तक नसीब नहीं हो पाता। ऐसे वक्त में नगर निगम के ग्राउंड जीरो के 15 योद्धा दाह संस्कार कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

संक्रमण के हाई रिस्क के बाद भी ये योद्धा मुक्तिधाम में सुबह से देर रात तक डटे रहते हैं। चिताओं की उठती आग और पीपीई किट की गर्मी से ये उबल जाते हैं पर शवों का ससम्मान क्रियाकर्म करने के बाद ही राहत की सांस लेते हैं। लगातार शव आने की वजह से मुक्तिधाम में ही भोजन करने के बाद काम में लग जाते हैं।

सालभर के भीतर इन योद्धाओं ने 500 से ज्यादा कोविड से मृत व्यक्तियों के शवों को अंतिम संस्कार किया है। कर्मचारियों ने बताया कि 2020 के जून माह में जब पहली बार कोविड से मृत व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार करने कहा गया तो हाथ कांपने लगे थे। पीपीई किट पहनने के बाद भी डर लग रहा था कि कहीं संक्रमित न हो जाएं, पर इसके बाद देखा कि शहर में लगातार कोविड के मरीजों की मौत हो रही और परिवार के सदस्य भी इनसे दूरी बनाए रखते हैं। वहीं प्रोटोकॉल के तहत परिवार के सदस्यों को दूर रखना भी जरूरी है।

परिवार के सदस्य मानकर करते हैं दाह संस्कार

कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना की पहली लहर थी तब दिनभर में दो से तीन शव ही पहुंचते थे पर इन दिनों एक ही दिन में 20 से 25 शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। यह भयावह नजारा देखकर तो सहम गए थे पर हिम्मत बनाए हुए हैं ताकि शवों का दाह संस्कार सम्मान से होता रहे। कर्मचारियों ने बताया कि पैकेट में बंद शवों को देखकर बहुत दुख होता है। अब कैसे दिन देखने को मिल रहे हैं कि पता ही नहीं चलता कि किसके शव का दाह संस्कार कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है शव किसी का भी हो पर परिवार के सदस्य के रूप में पूरे सम्मान के साथ उसका दाह संस्कार करते हैं।

मौतों की संख्या बढ़ने पर 10 कर्मचारी और रखे हैं

हैवी संक्रमण के बीच कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ये निगम के नियमित कर्मचारी भी नहीं हैं। इन्हें प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से रखा गया है। कलेक्टर दर पर वेतन (8 से 10 हजार रु.) दिया जाता है। कर्मचारियों का बीमा तक नहीं कराया गया है। संक्रमण से बचाव के लिए इनके पास पीपीई किट के अलावा और कोई संसाधन भी नहीं है। निगम के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भूपेन्द्र वाडेकर ने बताया कि 5 कर्मचारी साल पहले रखे गए थे। मौतों की संख्या बढ़ने पर 10 कर्मचारी और रखे हैं। ये कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। ये ग्राउंड जीरो के योद्धा हैं।

मजबूरी ऐसी कि हम एक कमरे में सीमित परिजनों से दूर हैं

कर्मचारियों ने बताया कि रोज हाई रिस्क संक्रमण के बीच रहते हैं। इसलिए परिवार से दूरी बनाए हुए हंै। मुक्तिधाम से लौटते हैं तो नहाते हैं, सैनिटाइज होने के बाद एक कमरे में सीमित हो जाते हैं। परिजन कमरे के बाहर खाना छोड़ देते हैं। यहां तक बच्चों से दूरी बनाए हुए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि इतने संक्रमण का खतरा होने के बाद भी ईश्वर की कृपा से कोई गंभीर लक्षण सामने नहीं आएं हैं। हम अपनी ओर से सावधानी बरत रहे हैं।

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