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दो चक्रवाती और तीन द्रोणिका का असर:अंधड़ के साथ आधे घंटे हुई तेज बारिश, खैरागढ़ में ओले गिरे

राजनांदगांव2 महीने पहले
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शहर में देर शाम आसामान में बादल छाए रहे। - Dainik Bhaskar
शहर में देर शाम आसामान में बादल छाए रहे।
  • मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे बारिश के लिए अलर्ट जारी किया, बिजली गिरने की भी आशंका

मई की शुरुआत के साथ ही प्रदेश में मौसम बदल गया है। दो चक्रवाती सिस्टम और तीन द्रोणिका के सक्रिए होने से रोजाना बारिश की स्थिति बन रही है। शुक्रवार को भी मौसम ऐसा ही रहा। शहर में तो दिन में तेज धूप निकली रही, लेकिन जिले के खैरागढ़, छुईखदान व गंडई ब्लाॅक में जमकर बारिश हुई।

खैरागढ़ इलाके में करीब आधे घंटे की तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। यही स्थिति शहर से लगे सोमनी क्षेत्र में भी रहा। जहां दोपहर में तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज अंधड़ और बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका है। शुक्रवार दोपहर हुई बारिश से कुछ देर तक मौसम तो ठंडा रहा, लेकिन शाम होते उमस बढ़ गई। इधर खरीफ फसल की तैयारी में जुटे किसानों के लिए ऐसी बारिश राहत वाली साबित होगी, खेतों में नमी आने से जुताई आसान होगी, लेकिन ओले गिरने से सब्जी फसल को भी नुकसान हो रहा है। खासकर टमाटर की खड़ी फसल को ओले से काफी नुकसान हो रहा है। चक्रवाती सिस्टम का असर तापमान में अधिक नहीं हुआ है। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में आंशिक गिरावट हुई है। लेकिन उमस से लोगों को परेशान कर दिया है।

जानिए, जिले में क्यों बन रही ऐसी स्थिति, आगे क्या
मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि एक चक्रीय चक्रवाती घेरा उत्तर अंदरूनी कर्नाटक के ऊपर 0.9 किमी. ऊंचाई पर स्थित है। एक द्रोणीका उत्तर अंदरूनी कर्नाटक से दक्षिण केरल तक 0.9 किमी. ऊंचाई तक स्थित है। एक चक्रवाती घेरा उत्तर मध्य मध्यप्रदेश के ऊपर 1.5 किमी. ऊंचाई तक स्थित है। एक पूर्व-पश्चिम द्रोणिका उत्तर मप्र से पश्चिम बंगाल तक झारखंड होते हुए 0.9 किमी. ऊंचाई तक स्थित है। इसके असर से अगले 48 घंटे भी बारिश की संभावना है।

25 लाख टन धान केंद्रों में नुकसान की बढ़ी आशंका
जिले के खरीदी केंद्रों में अब तक 25 लाख टन धान पड़ा हुआ है। बारिश के चलते इस धान के भीगने की आशंका है। कई समितियों में धान के स्टाक की तुलना में कैप कव्हर मौजूद नहीं हैं। इसके चलते धान को सुरक्षित रखने में समस्या हो रही है। पहले ही धीमी गति से चल रहा धान का उठाव लॉकडाउन के चलते और भी प्रभावित हो गया है। ऐसे में रोजाना हो रही बारिश समितियों के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। क्योंकि केंद्रोंं में धान की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है।

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