माइनिंग विभाग ने की कार्रवाई:120 एकड़ में रोजाना हो रही सैकड़ों टन आयरन ओर की खुदाई व तस्करी

खैरागढ़2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • जंगल की जमीन को संरक्षित करने में अफसर लापरवाह
  • खुलासा: 2014 के बाद बीते तीन-चार साल से फिर खुदाई और परिवहन जारी

आयरन ओर की तस्करी और अवैध खुदाई को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं, जो अवैध उत्खनन और तस्करी के बड़े खेल की ओर इशारा कर रही हैं। शुक्रवार को माइनिंग विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। हालांकि अवैध उत्खनन में लगी हुई गाड़ियां अभी वन विभाग के परिसर में खड़ी हुई हैं। वनवासियों के दबाव में माइनिंग की टीम ने कार्रवाई जरूर कर दी है, पर पूरी कार्रवाई में कहीं न कहीं तस्करों को प्रशासनिक संरक्षण मिलने का संदेह है।

बताया जाता है कि जिस क्षेत्र से आयरन ओर की खुदाई और तस्करी की जा रही है। वह पूरा का पूरा क्षेत्र लगभग 120 एकड़ का है। जिसमें से लगभग एक हेक्टेयर में खुदाई की जा चुकी है और रोजाना सैकड़ों ट्रक से आयरन ओर से भरी गाड़ियां पार हो रही है। हालांकि इस पूरे 120 एकड़ के हिस्से को बेंगलुरू (कर्नाटक) के रहवासी का बताया जा रहा है। जिसमें एक अन्य पार्टनर भी हैं, जिसकी जाति से आदिवासी होने की जानकारी मिली है। जो मूल रूप से अंबागढ़ चौकी के रहने वाले हैं। जानकारी के अनुसार उक्त जमीन 2008 में कर्नाटक के उक्त रहवासियों ने खरीदी थी।

खरीदी गई जमीन
मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में आयरन ओर के होने की जानकारी के बाद पहले ही उक्त क्षेत्र शासन के संरक्षण में आ जाती है। फिर किस आधार पर उक्त भूमि की साल 2008 में खरीदी और बिक्री की गई।

रात में परिवहन जारी
आयरन ओर से भरी ये गाड़ियां मुरुम की आड़ में बाहर निकाली जा रही हैं। रात के अंधेरे में तस्करी का खेल खेला जा रहा है। रोजाना सैकड़ों गाड़ियों का निकालना राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण की ओर भी इशारा कर रही है।

तीन अलग रकबों में है जमीन: पटवारी
क्षेत्र के पटवारी विकल्प यदु ने बताया कि उक्त भूमि तीन अलग रकबों है, जिसमें से दो रकबे क्रमशः के.नगप्पा और के. धीरज के नाम पर दर्ज हैं। जो मूल रूप से कर्नाटक बेंगलुरू के रहने वाले हैं। हालांकि उनके भजिडोंगरी में भी कुछ अवधि से रहने की बात कही जा रही है, पर मूल रूप से दोनों बेंगलुरू के रहने वाले बताए जाते हैं।

सवालों के घेरे में प्रशासन

  • जब क्षेत्र संरक्षित तो कैसे हुई खरीदी बिक्री?
  • आयरन ओर है तो प्रशासन क्यों नहीं कर रहा पर्याप्त प्रक्रिया?
  • कर्नाटक के व्यापारी की साल्हेवारा के भाजिडोंगरी में जमीन खरीदने में रुचि का कारण कहीं आयरन ओर की बहुतायत तो नहीं?

पहले मचा था हंगामा
कर्नाटक के मूल निवासी दोनों जमीन मालिकों ने उक्त जमीन 2008 में खरीदी थी। 2014 में भी उक्त ज़मीन पर खुदाई का कार्य किया गया था और परिवहन भी किया जा रहा था। इसके बाद कार्रवाई हुई और परिवहन रुक गया था। वनवासियों की माने तो बीते तीन-चार सालों से सैकड़ों ट्रक आयरन ओर मुरुम की आड़ में पार किए जा चुके हैं।

खुदाई की जानकारी नहीं: तहसीलदार
तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता ने बताया कि माइनिंग विभाग अपनी नियमानुसार कार्रवाई कर रहा है। खुदाई की जानकारी नहीं मिली है। पहले से उपलब्ध मुरुम के परिवहन पर कार्रवाई की गई है।

माइनिंग विभाग देगा जानकारी: एसडीएम
मामले पर एसडीएम निष्ठा पांडेय तिवारी ने बताया कि कार्रवाई माइनिंग विभाग के लोग कर रहे हैं। इसलिए पूरी जानकारी वे ही दे पाएंगे।

खबरें और भी हैं...