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जाल में फंसे शिकारी:आंगनबाड़ी में ठहरे शिकारी पिता-पुत्र गिरफ्तार ग्राम समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी हिरासत में

राजनांदगांवएक महीने पहले
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  • 12 घंटे तक 8 गांवों में खोजबीन के बाद ग्राम खुड़मुड़ी में पकड़े गए

रेंगाकठेरा में बंदरों को मारने वाले शिकारी पिता-पुत्र को वन विभाग की टीम ने हिरासत में ले लिया है। मंगलवार देर शाम जंगलपुर निवासी कमल पारधी और उसके बेटे विशाल को अफसरों ने खुड़मुड़ी गांव से पकड़ा। इसके बाद दोनों से पूछताछ जारी है। इन्होंने आसपास के 8 गांव में बंदर भगाने का ठेका ले रखा था, ऐसे में आशंका जाहिर की जा रही है इनके द्वारा मारे गए बंदरों की संख्या बढ़ सकती है। ग्राम पंचायत खुड़मुड़ी के द्वारा इन्हें बाकायदा आंगनबाड़ी में रुकने के लिए जगह दी थी। ये दोनों वहीं रह रहे थे। शिकार कर जब ये शाम को आंगनबाड़ी भवन पहुंचे तो मुखबिर की सूचना पर घात लगाए वन अफसरों ने इन्हें धर दबोचा। ग्राम समिति के अध्यक्ष भरत वर्मा और उपाध्यक्ष गणेश वर्मा को भी टीम ने हिरासत में ले लिया है। मंगलवार सुबह से ही वन विभाग की जांच टीम रेंगाकठेरा पहुंची थी, जहां बंदर भगाने का ठेका देने वाले ग्राम समिति के अध्यक्ष भरत वर्मा और उपाध्यक्ष गणेश वर्मा को भी टीम ने हिरासत में लिया था। इनके बयान और पूछताछ के बाद पूरे दिन आरोपियों की तलाश में आसपास के गांव में छापेमारी चलती रही। देर शाम दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने में टीम को सफलता मिली। फिलहाल दोनों को वन विभाग ने अपनी कस्टडी में रखा है। एसडीओ सौरभ सिंह ने बताया बुधवार को मामले का खुलासा अधिकृत रुप से किया जाएगा।

सुबह से जारी रही छापेमारी गांव लौटते ही पकड़े गए
घटना के बाद डीएफओ बीपी सिंह ने जांच टीम गठित की। टीम मंगलवार सुबह बखत रेंगाकठेरा पहुंची, जहां से ग्राम समिति के अध्यक्ष भरत वर्मा और उपाध्यक्ष गणेश वर्मा का बयान लिया। दोनों ने सलटिकरी निवासी कमल पारधी और उसके बेटे विशाल को गांव से बंदर भगाने का ठेका देने की बात स्वीकारी। अफसरों ने पहले सलटिकरी में दबिश दी तो बताया कि दो माह से दोनों बाप बेटे पास के ही खुड़मुड़ी गांव में रह रहे हैं। यहां दोनों को गिरफ्तार किया गया।

इस मामले में आसपास के गांवों में भी हुई पूछताछ
शिकारियों ने आसपास के करीब 8 गांव में बंदर भगाने का ठेका ले रखा है। सूत्रों के मुताबिक इन गांवों में भी इन्होंने कई बंदरों की हत्या की है। वन अमले की टीम बिल्हारी, खैरा, खुड़मुड़ी सहित आसपास के दूसरे गांवों में भी इसकी जानकारी जुटाने पहुंची। जहां गांव के प्रमुखों से बयान लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक इन गांवों में भी कुछ बंदरों को मारने की जानकारी अफसरों काे मिली है। पूछताछ के बाद मारे गए बंदरों की संख्या स्पष्ट होगी।

शिकार करने भरमार बंदूक के इस्तेमाल की आशंका
रेंगाकठेरा में मारे गए बंदरों के लिए एयर गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही थी, लेकिन विभागीय सूत्रों के मुताबिक शिकारियों के द्वारा इस्तेमाल किया जा रही बंदूक एयर गन नहीं बल्कि भरमार हैं। एयर गन से लंबी दूरी में मौजूद बंदरों को आसानी से निशाना नहीं बनाया जा सकता। वन टीम ने दोनों को हिरासत में तो ले लिया है, लेकिन इनसे हुई जब्ती के संबंध में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं किया है। बुधवार को पूरे मामले से पर्दा उठने की उम्मीद है।

वन कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध, दिखी लापरवाही
इधर पूरे मामले के खुलासे और घटनाक्रम के बाद वन कर्मचारियों और अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल ग्रामीण लंबे समय से इलाके में बंदरों के उत्पात की शिकायत वन विभाग में दर्ज करा रहे थे। इसके बाद भी इलाके में पदस्थ अफसरों और कर्मचारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके बाद बाकायदा ग्राम समितियों ने बैठक कर नियम विपरीत बंदरों को भगाने ठेका भी दे दिया। उक्त मामला भी अफसरों की जानकारी में नहीं रहा।

मुखबिर की सूचना पर आरोपियों को हिरासत में लिया गया
आरोपियों को हिरासत में लेने में वन विभाग के डिप्टी रेंजर केके वर्मा, आजाद राय, वन रक्षक नासिर अहमद, भाव दास साहू, डोमन लाल साहू की अहम भूमिका रही। टीम के सदस्य दिनभर अलग अलग जगहों में दबिश देते रहे। शाम को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई।

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