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संकट में मदद:मरीजों को अस्पताल ले जाने नहीं मिली गाड़ी तो युवक ने खुद का वाहन सेवा में लगा दी

डोंगरगढ़10 दिन पहले
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  • पीपीई किट पहनकर व्यवस्था बनाने खुद उतर गए ग्राम मुसराकला के युवा सरएकजुटता दिखाई: अंतिम संस्कार करने के लिए हर घर से लकड़ी दी जा रहीपंच

कोरोना संक्रमण ने पिछले माह सभी तरफ अपना कहर जमकर दिखाया। अच्छी बात यह है कि मई लगते ही संक्रमण का ग्राफ कम होने लगा है। जबकि अप्रैल का महीना मौतों का तांडव भरा रहा। ऐसे संकटकाल में गांव के युवा संकटमोचक बने और मरीजों की मदद कर राहत पहुंचाने की पहल शूरू की।

संकट में मदद की शुरुआत जब ग्राम मुसराकला के युवा सरपंच ने आगे आकर की उसके बाद यह चेन बनते गई और युवाओं ने टीम बनाकर अपने गांव में ही सेवा करने लग गए। यहां के सरपंच कंवल निर्मलकर पीपीई किट पहनकर स्वयं वाहन चलाते हुए मरीजों को गांव से हॉस्पिटल पहुंचा रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर अन्य युवा भी जुड़ गए और अब तक 40 से अधिक लोगों को अपने निजी वाहन से हॉस्पिटल पहुंचा चुके हैं।

संक्रमित मरीजों को हॉस्पिटल ले जाने समय पर वाहन मुहैया नहीं हो पा रहा था। यह देख युवा सरपंच निर्मलकर ने निजी वाहन अधिग्रहित किया और हॉस्पिटल तक मरीजों को पहुंचाया। इसके बाद दुर्गेश साहू भी सरपंच के साथ परिवहन में जुट गए। चालक दुर्गेश अब तक 35 गंभीर मरीजों को राजनांदगांव हॉस्पिटल पहुंचा चुके हैं। कई बार स्वयं ड्राइविंग करते हुए शव को लाने राजनांदगांव गए।

बेसहारा संक्रमित हुए तो इन युवाओं ने की मदद
गांव के कई परिवार ऐसे थे जिनके यहां सभी सदस्य पॉजिटिव निकल गए या तो बेसहारा होने की वजह घर तक जरूरत का सामान नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे में गांव के युवा संक्रमित परिवारों तक दैनिक जरूरत के सामानों की होम डिलीवरी दी। इनमें गांव के पप्पू, भुनेश्वर, ईश्वरी निर्मलकर, सुरेंद्र, भागचंद, शिव साहू, उपसरपंच रामशरण वैश्णव, खलील खान, राम साहू, भागवत साहू, माधव ठाकुर रोज होम डिलीवरी दे रहे हैं। अंतिम संस्कार भी इन्होंने किया।

अब तक 15 लोगों की माैत गांव में एक पहल यह भी
मुसराकला में कोरोना के संक्रमण से लड़ने के लिए एकजुटता दिखाई है। गांव में अब तक 15 लोगों की मौत हुई है। इनके अंतिम संस्कार करने के लिए हर घर से लकड़ी दी जा रही है। मौत होने के बाद कोटवार गांव में मुनादी कर सूचना देते हैं जिसके बाद ग्रामीण अपने-अपने घरों के सामने लकड़ी निकालकर रख देते हैं। जिसे युवा एकत्रित कर मुक्तिधाम ले जाते हैं। गांव के लोग कोरोना को हरानें एकजुटता दिखा रहे हैं, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।

घर जाना बंद कर स्वास्थ्य केंद्र में रहकर दे रही सेवा
कोरोनाकाल में फ्रंट लाइन वॉरियर्स भी बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुसरा में पदस्थ लैब टेक्नीशियन वैशाली व वैक्सीन प्रभारी रूबीना अंजू घर नहीं जा रही है। दोनों स्वास्थ्य केंद्र में ही रहकर दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि यहां की प्रभारी डॉक्टर की मौत के बाद स्वास्थ्य सुविधा गड़बड़ा गई थी। लेकिन दोनों ने घर से आना-जाना बंद कर स्वास्थ्य केंद्र में ही रहकर सेवा दे रहे है। वे अपनी जिम्मेदारी निभा रह हैं।

45+ के 90 प्रतिशत लोगों को लग चुकी है वैक्सीन
वैक्सीनेशन के मामले में मुसरा के ग्रामीण आगे हैं। दूसरे चरण में 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को वैक्सीन लगने की शुरुआत होने के बाद टीकाकरण की स्थिति बेहतर है। सरपंच कंवल निर्मलकर ने बताया कि 45 वर्ष से अधिक उम्र के 90 प्रतिशत लोगों को टीका लग चुका है। गांव के सरपंच कंवल निर्मलकर, सचिव केदान निर्मलकर, कर्मचारी दलेश्वर साहू, ग्राम पटेल हेमसिंह ठाकुर भी व्यवस्था बनाने गांव में डंडा लेकर निकल रहे हैं।

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