कोरोना का डर:लखाेली की तड़प रही गर्भवतियों को किसी भी अस्पताल में छुआ तक नहीं

राजनांदगांवएक वर्ष पहले
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  • संक्रमण के दौर के बीच कंटेनमेंट जोन में दो बच्चों की गूंजी किलकारी

दो प्रसूताएं और दोनों कंटेनमेंट जोन लखोली के रहवासी...। सैंपल कोरोना टेस्ट के लिए भेजा गया। रिपोर्ट आने में चार दिन का समय बाकी। इसी बीच प्रसव की पीड़ा। शहर के हर हॉस्पिटल घूमे पर किसी ने छुआ तक नहीं। बच्चों का जन्म कैसे होगा इस चिंता में डूबा परिवार। तभी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने अपनी टीम के साथ हिम्मत दिखाई। इसके बाद कोरोना के हॉटस्पॉट में संकट के बीच दो परिवारों में खुशियों की किलकारी गूंजी।  कोरोना का हाट स्पॉट बने लखोली की यह सच्ची घटना है। लखोली के आदर्श चौक में रहने वाली गर्भवती बसंती साहू और प्रेमलता साहू का भी सैंपल टेस्ट के लिए भेजा गया है। 4 जुलाई की सुबह 11.30 बजे अचानक बसंती साहू को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, इसके ठीक आधे घंटे बाद  प्रेमलता को 12 बजे प्रसव पीड़ा हुई। दोनों को डिलीवरी के लिए मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट लाया गया, लेकिन लखोली के रहवासी होने और टेस्ट रिपोर्ट नहीं आने की बात कहकर उन्हें दाखिल करने से मना कर दिया गया। निजी हॉस्पिटल्स में भी घूमे। 

पूरा दिन घूमते रहे परिजन शाम में स्वास्थ्य केंद्र लाया 
दोनों गर्भवतियों की डिलीवरी का समय नजदीक आ गया था, प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवतियों को लेकर परिजन शहर के अलग-अलग अस्पताल का चक्कर काटते रहे। दोपहर से शाम के 5 बज गए। लेकिन किसी ने भी प्रसव कराने की हिम्मत नहीं दिखाई। परिजन वापस दोनों को घर लखोली लौट आए, जहां शहरी स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर को पूरी जानकारी दी। इसके बाद डॉ. रोशन कुमार ने अपनी टीम के साथ हिम्मत जुटाकर प्रसव कराया। 
ऐसे समझिए डॉक्टर व उनकी टीम के सोच, समझ व सेवा को 
समझ:
डॉ. रोशन कुमार व उनकी टीम ने समझदारी दिखाई। स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षा के जो भी संसाधन मौजूद थे, उनका इस्तेमाल किया। कोशिश की कि महिलाओं की डिलीवरी नॉर्मल ही हो। गर्भवतियों का हौसला भी बढ़ाते रहे। नवजात को सुरक्षित रखने जतन भी किए।

सोच: दोनों गर्भवतियों की डिलीवरी का समय आ चुका था। डिलीवरी करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था। घर में अगर दोनों की डिलीवरी होती तो बच्चों व माता को खतरा भी हो सकता था। हौसला भी बनाए रखा।  

सेवा: शहर के 100 बिस्तर के मदर एंड चाइल्ड केयर, बड़े-बड़े नामों वाले नर्सिंग होम्स, डिलीवरी के विशेषज्ञों ने जब केस लेने से इनकार किया तो डॉक्टर व उनकी टीम ने सेवा की मिसाल पेश की। अपनी ड्यूटी मात्र से उपर उठकर गर्भवतियों की पीड़ा को समझा। 

कोई दूसरा विकल्प नहीं था: सुरक्षा का ध्यान रख किया एडमिट, नॉर्मल डिलीवरी हुई
डॉ. रोशन कुमार ने बताया कि दोनों महिलाओं की स्थिति काे देखते हुए उन्होंने प्रसव की जिम्मेदारी ली। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प भी मौजूद नहीं था। हालात को देखते हुए पूरे ऐहतियात के साथ उन्होंने अपने तीन स्टाफ नर्स सहित दो सपोर्टिंग स्टाफ के साथ प्रसव की तैयारी शुरू की। केंद्र में मौजूद सुरक्षा के संसाधनों के बीच प्रसव की प्रक्रिया शुरू कराई। शाम 7 बजे बसंती ने एक बेटे को और शाम 7.30 बजे प्रेमलता ने बेटी को जन्म दिया। दोनों की नॉर्मल डिलीवरी हुई। दोनों नवजात पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिनका वजन भी 3 किग्रा से अधिक है। नॉर्मल डिलीवरी होने के करण दोनों प्रसूताओं को डिस्चार्ज कर घर भेज जिया गया है। प्रसव के बाद की जाने वाली सुरक्षा का पूरा ध्यान रखे जाने दोनों को गाइडलाइन दी गई है।  
राहत दिलाएं: लखोली के लोगों को काम से लौटा रहे पार्षद ने कलेक्टर से की अपील- संवेदना बरतें
इधर लखोली में लगातार कोरोना के पॉजिटिव आने के बाद इलाके के दूसरे लोगों की भी परेशानी बढ़ गई है। इसी समस्या को लेकर मंगलवार को बैगापारा वार्ड की पार्षद दुलारी साहू व वार्ड 32 के अमित जंघेल के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारी व वार्डवासी कलेक्टोरेट पहुंचे। जहां उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि लखोली इलाके के रहवासियों को राहत दी जाए। उन्होंने बताया कि लखोली इलाके के लोगों को शहर में काम नहीं दिया जा रहा है। पार्षद प्रतिनिधि गणेश साहू,अमित जंघेल, नरेश साहू, कुंजलाल साहू, अशोक यादव, अरुण मूंदड़ा सहित अन्य लोगों ने लखोली वासियों को राहत दिलाने की मांग की है।

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