बॉन्ड पेपर्स और रसीद देना:अनिवार्य इसके बिना आवेदन अधूरा, निवेशकों के आवेदन अब 20 अगस्त तक पंचायतों व पालिका में जमा होंगे

डोंगरगढ़2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
आवेदन जमा करने नगर पालिका में लगी निवेशकों की भीड़। - Dainik Bhaskar
आवेदन जमा करने नगर पालिका में लगी निवेशकों की भीड़।

चिटफंड कंपनियों में निवेशकों की जमा पूंजी को वापस दिलाने राज्य सरकार आवेदन मंगा रही है। पहले 6 अगस्त तक फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख थी इसलिए शुक्रवार को निवेशकों की भारी भीड़ उमड़ी। शाम होते तक फॉर्म जमा करने की तारीख 20 अगस्त तक बढ़ाने की घोषणा होने के बाद बचे निवेशकों ने राहत की सांस ली।

सरकार ने निवेशकों से फॉर्म में 9 बिंदुओं को भरने का विकल्प दिया है। यह भी समस्या सामने आ रही है कि गरीब व अशिक्षित लोगों ने चिटफंड कंपनियों में एजेंटों के माध्यम से निवेश किया था लेकिन कई एजेंटो ने उन्हें न तो बॉन्ड पेपर दिया है कि और कई लोगों के पास रसीद नहीं है। ऐसे में आवेदन अधूरा हो रहा है। लोगों ने पहचान के आधार पर अपने परिचित एजेंट के माध्यम से निवेश कर दिया था और अब परेशानी हो रही है। कई एजेंट फोन नहीं उठा रहे हैं, इसलिए फॉर्म से एजेंट से संबंधित जानकारी अधूरी हो रही है, तो कई एजेंटों ने नंबर बदल दिए है।

चिटफंड में रकम डूबने के बाद लोगों ने उम्मीद छोड़कर जमा किए गए रकम से संबंधित दस्तावेज को गुमा दिया है लेकिन आवेदन के साथ बॉन्ड पेपर, जमा किए गए रकम की रसीद, आधार कार्ड व बैंक पासबुक की छायाप्रति मांगा जा रहा है। रोजाना एचबीएन, साईं प्रसाद, अनमोल इंडिया, पल्स ग्रीन, एनआईसीएल जैसे चिटफंड कंपनियों के सबसें अधिक आवेदन आ रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों के निवेशकों के लिए ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्र के लिए नगर पालिका कार्यालय में सुुविधा दी जा रही है।

एजेंट नहीं कर रहे निवेशकों का सहयोग
चिटफंड कंपनियों के फरार व बंद होने के बाद संबंधित एजेंटों ने भी अब दूसरा व्यवसाय शुरू कर लिया है। जब राज्य सरकार निवेशकों से आवेदन मंगा रही है, इसके बाद भी एजेंट निवेशकों का सहयोग करने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। ऐसे में लोग अपनी जमा पूंजी की चिंता करके आवेदन जमा करने के लिए दिनभर कतार में लग रहे है। कंपनियों के बंद होने के बाद कई एजेंटों ने अपना पता बदल लिया है तो अधिकतर के नंबर बंद हो गए है। लोगों ने एजेंटों पर विश्वास करके कंपनियों में निवेश किया था। जैसे ही मियाद पूरी होती गई निवेशकों की पूंजी लुट गई। निवेशकों का बुरा हाल है।

खबरें और भी हैं...