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कोरोनाकाल में भ्रष्टाचार का संक्रमण:11 महीने से मध्याह्न भोजन बंद फिर भी कम वजन वाले बर्तनों की खरीदी, जांच की मांग

राजनांदगांव2 दिन पहले
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  • इन बर्तनों कोे स्कूलों में पहुंचाने के िलए बनाया जा रहा दबाव

कोरोना संक्रमण की वजह से जिले में 11 माह से स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनना बंद है। प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राओं को शिक्षक सूखा राशन घर तक पहुंचाकर दे रहे हैं। रसोई कक्ष में ताला लगा हुआ है पर शिक्षा विभाग के अफसरों में सामानों की खरीदी को लेकर इस कदर हड़बड़ी मची रही कि मध्याह्न भोजन बंद होने के बाद भी लाखों रुपए खर्च कर कम वजन वाले बर्तनों की खरीदी कर ली गई। वहीं अब इसे हर हाल में स्कूलों तक पहुंचाने का दबाव बना हुआ है। इस पूरे मामले की जांच कराने की भी मांग उठी है। डीईओ की ओर से जारी किए गए नोटिस के बाद ब्लॉक अफसरों ने कम वजन वाले बर्तनों को स्कूलों में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। दबाव ऐसा है कि सीधे प्रधान पाठकों को बीईओ दफ्तर पहुंचकर बर्तन ले जाना पड़ रहा है जबकि संकुल के माध्यम से इसका वितरण किया जाना था पर कार्रवाई के डर से ब्लॉक अफसर भी प्रधान पाठकों को बुलाकर बर्तन सौंप रहे हैं और सामग्री प्राप्त करने की पावती लेकर उनके सील और हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं।

प्रधान पाठक ले जा रहे हैं बर्तन
प्रधानपाठकों का कहना है कि फिलहाल मध्याह्न भोजन बन नहीं रहा और बर्तनों को लेकर कोई डिमांड नहीं दी गई थी पर समझ में नहीं आ रहा है कि विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर ऐसी खरीदी कैसे कर ली गई, जबकि मध्याह्न भोजन के अंतर्गत भोजन बनाने, वितरण कराने की पूरी जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की रहती है। इन्हें बर्तन की व्यवस्था करनी है पर डीईओ की ओर से दिए गए बर्तन को संभाल कर रखना होगा।

राजधानी छोड़ महासमुंद से खरीदी
इधर राजपूत करणी सेना की ओर से शुक्रवार को कलेक्टर टीके वर्मा से मुलाकात कर बर्तन खरीदी मामले की लिखित शिकायत की गई। करणी सेना के जिला अध्यक्ष कुशल सिंह राजपूत ने खरीदी की जांच कराने की मांग की। कहा कि राजनांदगांव और रायपुर जैसे बड़े शहरों को छोड़कर डीईओ ने महासमुंद से बर्तनों की खरीदी की जो कि संदेह को जन्म देता है। हैरत की बात यह है कि जब जांच में बर्तनों का वजन कम पाया गया तो उसे लौटा देना था।

आर्थिक अपराध से जुड़ा है पूरा मामला: कुशल
जिला अध्यक्ष कुशल ने कहा कि बर्तनों को लौटाने के साथ ही संबंधित फर्म के खिलाफ एफआईआर करनी थी,क्योंेकि उसने सरकारी खरीदी में निर्धारित मापदंड को दरकिनार करते हुए अपने फायदे के लिए कम वजन वाले बर्तनों की सप्लाई की। यह पूरा मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा हुआ है। करणी सेना की ओर से डीईओ को हटाने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कलेक्टर वर्मा ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।

विधायक ने लगाया प्रश्न
बर्तन खरीदी के मामले में गड़बड़ी की आशंका होने पर खुज्जी विधायक छन्नी साहू ने विधानसभा में प्रश्न लगाकर शिक्षा मंत्री से जवाब मांगा है। विधानसभा में प्रश्न लगने के बाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। बताया गया कि खरीदी की प्रक्रिया के दौरान दूसरे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।

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