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नुकसान:धान के उठाव में हुई देरी, शॉर्टेज का रोना प्रति बोरा 400 से 250 ग्राम वजन कम

राजनांदगांव10 महीने पहले
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  • टीम पड़ताल कर रही है कि वाकई में सूखत आया है या फिर धान कहीं और खपा दिया गया

जिले में धान की खरीदी से लेकर उठाव में इसनी देरी हुई है कि सोसाइटियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। मार्कफेड की ओर से समय पर उठाव नहीं किए जाने से प्रति बोरे में धान की सूखत होने की रिपोर्ट सामने आई है। जिले की 27 सोसाइटियों से उठाए गए धान में प्रति बोरा 400 से 250 ग्राम तक की कमी आई है। गड़बड़ी की आशंका के साथ ही शॉर्टेज आने के कारणों की पड़ताल चल रही है।  समितियों ने तो स्पष्ट कर दिया है कि समय पर उठाव नहीं होने से रखरखाव में दिक्कत आई है। इसके चलते प्रति बोरे में धान की सूखत है। इस बार खरीदी शुरू होने के बाद मार्कफेड की ओर से नियमित रूप से परिवहन नहीं कराया जा रहा था। खरीदी के 10 से 15 दिन के बाद ही परिवहन शुरू कराया गया था। इस बीच बारिश होने पर परिवहन ठप रहा। जबकि समितियों की ओर से नुकसान की आशंका से बार-बार पत्राचार कर समय पर उठाव करा लेने की मांग की जा रही थी। 

समितियों ने सौंपा है ज्ञापन 
नतीजा यह हुआ कि प्रति बोरी धान की सूखत सामने आ गई है। बताया गया कि खरीदी के तीन माह के भीतर उठाव कर लेना होता है पर मार्कफेड की ओर से 15 जून तक भी उठाव पूरा नहीं किया गया। इधर समितियों की ओर से ज्ञापन सौंपकर कमीशन राशि से कटौती नहीं करने की मांग की है। बल्कि मांग रखी है कि जिस प्रकार मार्कफेड को सूखत की राशि मिलती है, वह समितियों को भी दी जाए, ताकि समितियां घाटे में न जाएं। 

गड़बड़ी की भी आशंका 
जिले की 27 समितियों में शॉर्टेज का रोना रोया जा रहा है। इसके पीछे बड़ी गड़बड़ी की आशंका भी की जा रही है। जिला स्तर की टीम पड़ताल कर रही है कि वाकई में सूखत आया है या फिर धान कहीं और खपा दिया गया। खरीदी में ही गड़बड़ी तो नहीं हुई है? इसकी पड़ताल कराई जा रही है। हालांकि समितियों की ओर से उठाव में देरी से नुकसान होना बताया जा रहा है। फिलहाल फाइनल रिपोर्ट नहीं आई है।

संग्रहण केंद्रों में जाम है धान  
मार्कफेड की ओर से जिले की 89 सोसाइटियों के अंतर्गत बनाए गए खरीदी केन्द्र में डंप किए गए धान का उठाव तो कर लिया गया है पर पूरा स्टाक संक्रमण केंद्रों में जाम है। अब यहां भी धान के रखरखाव में दिक्कतें आ रही है। कस्टम मिलिंग भी ठप है। मिलर्स तो पुराने स्टाक के धान को ही एफसीआई में पहंुचा रहे हैं। मार्कफेड के डीएमओ सौरभ भारद्वाज ने बताया कि सोसाइटियों से शॉर्टेज की समस्या है। इसकी भरपाई करा रहे हैं। 

डीओ जारी करने में देरी 
खरीदी के बीच बार-बार मौसम खराब होने के कारण धान के रखरखाव की चुनौती भी बनी रही। स्थिति यह है कि बंपर स्टाक होने के बाद भी समितियों को क्षमता से अधिक धान की खरीदी करनी पड़ी। इसके चलते रखरखाव में दिक्कत हुईं। खरीदी बंद होने के बाद भी केन्द्रों में धान डंप रहा। मार्कफेड की ओर से तेजी से उठाव नहीं कराया गया। यहां तक रायपुर से डीओ काटना बंद कर दिया गया था। इस बार डीओ की पूरी मॉनिटरिंग रायपुर स्तर से हुई।

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