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  • The Commissioner Called Back 8 Employees Working At The Houses Of Officers, Councilors And MIC Members After Taking Salary From The Corporation, 10 Workers Are Still Doing Their Duty There.

नौकरी का दबाव:निगम से वेतन लेकर अफसर, पार्षद व एमआईसी मेंबर्स के घरों पर काम कर रहे 8 कर्मचारियों को कमिश्नर ने वापस बुलाया, 10 कर्मी अब भी वहीं कर रहे ड्यूटी

राजनांदगांवएक महीने पहले
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  • निजी काम करना मजबूरी पर नौकरी खोने के डर से विरोध नहीं कर पा रहे कर्मी

नगर निगम में पदस्थ कर्मचारी एमआईसी मेंबर्स, नेता और अफसरों के घर काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों से घर की सब्जी लाने, सफाई करने से लेकर दूसरे निजी काम लिया जा रहा है। नौकरी के दबाव में ये खुद विरोध भी नहीं कर पा रहे, वहीं जिम्मेदार अफसर भी इस शोषण की परंपरा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं।

निगम आयुक्त डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने ऐसे ही 8 कर्मचारियों को वापस निगम बुलाया है। इन कर्मचारियों को अपने मूल काम पर लौटाया गया है। लेकिन करीब 10 कर्मचारी अब भी ऐसे हैं, जो एमआईसी मेंबर्स और अफसरों के घर में मजबूरी में काम कर रहे हैं। इनकी पोस्टिंग तो अलग-अलग विभागों में हैं, काम इनसे नेता और अफसर अपने घरों पर ले रहे हैं।

इन कर्मचारियों को निगम के अलग-अलग विभाग में ही पदस्थ दिखाया जाता है, ये हाजिरी दस्तखत के लिए तो अपने कार्यालय पहुंचते हैं। लेकिन इसके बाद पूरे दिन की नौकरी एमआईसी मेंबर्स, पार्षद और अफसरों के घर की बजा रहे हैं। हालांकि निगम आयुक्त के एक्शन में आने के बाद अब इन कर्मचारियों के भी मूल जगह पर लौटने की उम्मीद बंध गई है। कर्मियों को मूल काम पर लौटाने के बजाय उल्टे संविदा के रूप में और भी भर्तियां कर ली गई।

कर्मचारियों के इस शोषण की परंपरा के खिलाफ कोई एक्शन तक नहीं ले रहे जिम्मेदार अफसर

पूर्व महापौर के घर से बुलाया, एमआईसी मेंबर को छूट
जिन 8 कर्मचारियों को मूल काम में वापस बुलाया गया है, उनमें से तीन कर्मचारी पूर्व महापौर के घर सेवा दे रहे थे। इन्हें तत्काल प्रभाव से निगम में लौटने कहा गया। कुछ कर्मचारी निगम के अफसरों के घर से भी लौटाए गए। लेकिन कांग्रेस के एमआईसी मेंबर को राहत दे दी गई। निगम के स्कूल में पदस्थ महिला कर्मी से कांग्रेस के एमआईसी मेंबर अपने घर पर काम ले रहे हैं।

सब्जी लाने से लेकर घर की सफाई तक करवा रहे
नेताओं और अफसरों के घर भेजे गए कर्मचारियों में ज्यादातर चतुर्थ श्रेणी के हैं। इनसे निगम के विभागों में काम लिया जाना है। लेकिन इनसे अफसर, एमआईसी मेंबर, पार्षद घर की साफ सफाई, बाजार से सब्जी लाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने तक का काम ले रहे हैं। कुछ रिटायर्ड अफसर भी ऐसे हैं, जिनके घरों का काम कर्मचारी कर रहे हैं।

नौकरी बचाने बेबस कर्मी
निगम के कर्मियों से घर का काम लेने की ये कुप्रथा लंबे समय से चल रही है। सत्ता बदलती गई, लेकिन ये सिस्टम अब भी बरकरार है। इन कर्मचारियों ने अपने यूनियन नेताओं के सामने भी इसका विरोध किया था, लेकिन नौकरी बचाने की बेबसी में कोई भी खुलकर विरोध नहीं कर रहा है। निगम में कर्मचारियों की कमी पहले से ही है, लेकिन इसके बाद भी इन्हें मूल काम पर नहीं लौटाया गया।

कर्मचारियों को लौटाया
सभी कर्मचारियों को प्रावधान के मुताबिक ही काम करना है और इसी के मुताबिक काम भी लिया जाना है। ऐसे ही कुछ कर्मचारियों को वापस मूल काम में लौटाया गया है। पूरी जानकारी जुटाकर आगे भी इसकी प्रक्रिया जारी रहेगी ।
-डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, आयुक्त नगर निगम

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