बाहर निकलने से पहले सोचें:मौत का आंकड़ा 200 तक पहुंचने में 295 दिन लगे थे, इस माह 27 दिन में 150 से ज्यादा मरीजों ने दम तोड़ा

राजनांदगांव6 महीने पहले
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बल्देवबाग स्थित बालभारती स्कूल में युवा कांग्रेस की टीम ने पूर्व महापौर विजय पांडेय के नाम से कोविड हेल्प सेंटर खोला है। टीम के प्रमुख तथागत पांडे ने बताया कि 24 घंटे टीम तैनात रहेगी। मरीजों के संपर्क में रहेंगे। तत्काल रिस्पांस देंगे। - Dainik Bhaskar
बल्देवबाग स्थित बालभारती स्कूल में युवा कांग्रेस की टीम ने पूर्व महापौर विजय पांडेय के नाम से कोविड हेल्प सेंटर खोला है। टीम के प्रमुख तथागत पांडे ने बताया कि 24 घंटे टीम तैनात रहेगी। मरीजों के संपर्क में रहेंगे। तत्काल रिस्पांस देंगे।
  • क्योंकि अस्पतालों में न रसूख काम आएगा और न ही पैसा
  • सिस्टम बस चिंतित है: 3-4 दिन में खतरनाक स्थिति तक पहुंच रहे गंभीर संक्रमित, डॉक्टर भी हैरान

कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जिले में लॉकडाउन लगाया गया है पर इस बीच भी चिंताजनक हालात सामने आ रहे हैं। मौत का ग्राफ है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। रोज 10 से 15 मरीजों की मौत हो जा रही है। स्थिति यह है कि जिले में कोविड संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 200 तक पहुंचने में 295 दिन लग गए थे पर अप्रैल माह के 27 दिनों में ही मृतकों की संख्या 150 से ज्यादा हो गई।

कोरोना के पहले लहर के दौरान 2020 में अप्रैल माह सबसे शांति से गुजरा था। एक भी पॉजिटिव नहीं आए थे और कोई मौतें नहीं हुई थीं पर इस बार दूसरी लहर में सबसे खतरनाक दौर अप्रैल माह में ही गुजर रहा है। 15 दिन के भीतर ही 95 कोरोना संक्रमित की मौत हुई। वहीं 27 अप्रैल की स्थिति तक डेढ़ सौ से ज्यादा ने दम तोड़ दिया है। मौत के मामले केवल सरकारी हॉस्पिटल में ही सामने नहीं आ रहे हैं पर बल्कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिह्नांकित किए गए निजी कोविड हॉस्पिटल में भी रोज मौत हो रहीं हैं।

जिले में कोरोना से मौत की सबसे बड़ी वजह

लक्षण होने के बाद भी लोग सैंपल जांच नहीं करा रहे हैं। स्थिति गंभीर होने पर सैंपल जांच करा रहे हैं तो लंग्स में गंभीर वायरस लोड सामने आ रहा है। ऐसी स्थिति में मरीज को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ रही है। वेंटिलेटर का अभाव होने के कारण ऑक्सीजन बेड पर रख रहे हैं जहां पर्याप्त ऑक्सीजन फ्लो नहीं होने से सांस लेने में तकलीफ बढ़ रही है और ऐसे मरीज खतरनाक स्थिति तक पहुंच जा रहे हैं।

वेंटिलेटर और ऑक्सीजन बेड की कमी बरकरार

इस संकट काल में बेड का अभाव बना हुआ है। ऑक्सीजन बेड नहीं मिल रहा। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर लोग मरीज को घर पर रखकर इलाज करा रहे हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर रिस्क उठा रहे हैं। बुधवार को जिले में 855 नए मरीज मिले। वहीं 212 लोग डिस्चार्ज हुए। 7850 एक्टिव केस हैं। अब तक 403 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 47971 संक्रमितों में से 39718 लोग ठीक हो चुके हैं।

गंभीरता दिखाएं, लक्षण दिखते ही जांच कराएं

सीएमएचओ डॉ मिथलेश चौधरी ने बताया कि परिवार में कोई कोविड मरीज है तो सभी को जांच करानी चाहिए। लक्षण दिख रहे हैं तो तत्काल दवाइयां लेनी शुरू कर दें, रिपोर्ट का इंतजार न करें। स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में रहें। लक्षण होने के बाद भी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। तत्काल सीटी स्कैन कराना चाहिए। इससे फेफड़े के संक्रमण का पता चलता है। स्टोर ज्यादा होने पर ये पॉजिटिव की श्रेणी में आते हैं। इसलिए जांच जरूरी है।

वैक्सीन लगाने वालों पर संक्रमण का असर कम

टीकाकरण अधिकारी डॉ बीएल कुमरे ने बताया कि वैक्सीनेशन के बाद लोगों को बहुत सावधानी बरतनी है। ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं आना है। संक्रमितों के संपर्क में आने वाले संक्रमित तो हो रहे हैं पर देखा जा रहा है कि इनमें वायरल लोड कम है। ऐसे लोग खतरनाक स्थिति तक नहीं पहुंच रहे। विशेषकर ऐसे बुजुर्ग जो वैक्सीन लगा चुके हैं, ये डेंजर जोन से बाहर चल रहे हैं। यह अच्छी बात है।

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