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शिक्षा का अधिकार:पहली लॉटरी के बच्चों का प्रवेश अब तक नहीं, दूसरी सूची को लेकर अफसर खामोश

राजनांदगांवएक महीने पहले
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  • जिले में 5 हजार से अधिक सीटों पर होना है प्रवेश, कोरोना के चलते अटकी प्रक्रिया

कोरोना वायरस ने गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में पढ़ने के सपने को भी खतरे में डाल दिया है। जिले में शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिले को लेकर अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका है। पहले चरण की लॉटरी में जिन बच्चों का नाम शामिल था, उन्हें अब तक स्कूलों में दाखिल नहीं मिल सका हैं, इधर दूसरे चरण की सूची को लेकर भी अफसर कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं।
जिले के लिए 16 जुलाई को आरटीई के चयनित बच्चों की पहली सूची निकली। इसमें 4500 पालकों ने आवेदन किया था, जिसमें 2936 बच्चे चयनित हुए थे, लेकिन अब तक इन बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। दूसरे चरण में 1241 सीटों के लिए चयन सूची जारी होनी थी, लेकिन इसे लेकर अब तक कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। इसके इधर पालक रोजाना नोडल अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में जानकारी जुटाने पहुंच रहे हैं। लेकिन अब तक पालकों को कोई भी स्पष्ट जारी दाखिले को लेकर नहीं दी गई है। ऐसे में वर्तमान सत्र में आरटीई के तहत बच्चों का दाखिला संकट में आ गया है। मामले को लेकर डीईओ एचआर सोम ने बताया कि डीपीआई स्तर पर ही दूसरे चरण की लॉटरी निकाली जाएगी, इसका इंतजार किया जा रहा है। शासन से गाइडलाइन मिलने के बाद ही स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी होगी।
निजी स्कूलों में दाखिला जारी, आरटीई कोटे वाले पालक परेशान: जिले के निजी स्कूलों में दाखिले के प्रक्रिया शुरू हो गई है। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद स्कूलों ने पालकों से शुल्क लेना भी शुरू कर दिया है, लेकिन आरटीई कोटे की सूची में आने वाले बच्चों को लेकर अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके चलते ऐसे बच्चों के पालकाें के सामने संकट खड़ा हो गया है। निजी स्कूल संचालक आरटीई कोटे वाले बच्चों के एडमिशन को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। पालक चयन के बाद पढाई शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई जारी, ऐसे में तो बच्चे पिछड़ जाएंगे
निजी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी है। इसे वर्तमान सत्र के लिहाज से पूरा कराया जा रहा है। स्कूल कब तक खुलेंगे इसे लेकर कुछ भी साफ नहीं हैं। ऐसे में वर्तमान शिक्षा सत्र की पढ़ाई और कोर्स ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से ही पूरा कराया जा रहा है। लेकिन आरटीई से चयनित बच्चे चयन के बाजवूद ऐसी पढ़ाई से वंचित हैं। ऐसे में इन बच्चों के सामने पढ़ाई में पिछड़ने का भी खतरा बना हुआ है। लेकिन शिक्षा विभाग इसे लेकर भी कोई गाइडलाइन जारी नहीं कर रही है।

दूसरी सूची के इंतजार में चक्कर काट रहे पालक
आरटीई की दूसरी सूची के इंतजार में पालक रोजाना चक्कर काट रहे हैं। नोडल अधिकारियों से लेकर दूसरे अफसरों से पालक संपर्क में हैं। वर्तमान सत्र का दूसरा महीना भी बीतने को हैं लेकिन अब तक दूसरी सूची को लेकर कोई भी स्पष्ट जवाब पालकाें को नहीं मिल पाया है। ऐसी स्थिति में अब आवेदन के बाद अपने बच्चों के दाखिले का इंतजार कर रहे पालकों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। अगर इस सत्र में आरटीई से पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी, तो बच्चों का पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।

आर्थिक संकट, बकाया राशि मांग कर रहे स्कूल
जिले में करीब 300 निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत पढ़ाई कराई जाती हैं। लेकिन इन स्कूलों को बीते दो साल से आरटीई के तहत मिलने वाली शासन की राशि नहीं मिल पाई है। पहले ही निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। इसके बाद स्कूल संचालकाें ने अटकी राशि को तत्काल जारी करने की मांग भी की थी लेकिन अब तक स्कूलों को बकाया राशि नहीं मिल पाई हैं। ऐसी स्थिति में इस साल आरटीई से पढ़ाई कराने के पक्ष में ज्यादातर निजी स्कूल नहीं हैं।

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