गज का राजाडेरा भी अभी यहीं:डर से गांव खाली, वन अमले ने 100 ग्रामीणों को 4 किमी दूर कंदाड़ी में किया शिफ्ट

राजनांदगांव2 महीने पहले
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हाथियों की माैजूदगी के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों को ट्रैक्टर से कंदाड़ी भेजा गया। - Dainik Bhaskar
हाथियों की माैजूदगी के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों को ट्रैक्टर से कंदाड़ी भेजा गया।
  • 3 दिन से एक ही जगह पर हाथी दल की मौजूदगी से नुकसान का खतरा बढ़ा, इसलिए राजाडेरा के ग्रामीणों को दूसरी जगह कैंप में ठहराया गया
  • आशंका: कहीं हाथी यहां रहवास एरिया न बना लें, क्योंकि कुछ दूर चलने के बाद फिर लौट आ रहे

बालोद जिले की ओर से भटक कर आए हाथियों के दल ने मोहला क्षेत्र के राजाडेरा के जंगल को डेरा बना लिया है। तीन दिन से यहां हाथियों का जमावड़ा होने से नुकसान का खतरा बढ़ गया है। हाथी कहीं गांव में प्रवेश न कर जा, इस आशंका से वन अमले ने मंगलवार को आनन-फानन में राजाडेरा के ग्रामीणों को चार कमी दूर स्थित कंदाड़ी गांव में शिफ्ट किया। लगभग 100 ग्रामीण वनोपज संग्रहण केंद्र के अस्थायी कैंप में ठहराए गए हैं। यहां इनके लिए भोजन, पानी सहित अन्य सुविधाएं मुहैया करा दी गई है।

मानपुर, मोहला और अंबागढ़ चौकी क्षेत्र के वन विभाग के अफसर और कर्मचारी राजाडेरा में कैंप किए हुए हैं। गांव के कुछ युवाओं को भी यहां रोका गया है ताकि हाथियों का इस ओर मूवमेंट होने पर तत्काल सूचना दे सकें। राजाडेरा जंगल से कुछ ही दूरी पर महाराष्ट्र की सीमा सटी हुई है। वन अफसरों को आशंका थी कि हाथी महाराष्ट्र की ओर से मूव करेंगे पर तीन दिन से राजाडेरा के जंगल में डटे हुए हैं। ये 100-200 मीटर तक मूव करने के बाद फिर से राजाडेरा की ओर ही लौट आ रहे हैं।

अफसरों ने बैठक लेकर समझाइश दी फिर किया शिफ्ट

हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग के अफसरों ने ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव में बैठक लेकर ग्रामीणों को समझाइश दी कि जब तक हाथी यहां पर जमे हुए हैं तब तक के लिए दूसरे गांव में रहें ताकि कोई जनहानि न हो। खौफजदा ग्रामीण भी अपने दैनिक उपयोग के सामान लेकर कंदाड़ी के वनोपज संग्रहण केन्द्र में बनाए गए अस्थाई कैंप में ठहरे हुए हैं। वन विभाग ने सरकारी वाहनों से गांव के लोगों को कंदाड़ी में शिफ्ट किया।

चारा की वजह से डेरा

वन विभाग के अफसरों ने बताया कि हाथियों के दल में बच्चे भी हैं। इसलिए हाथी दल के प्रमुख इनका विशेष ध्यान रखते हैं। बच्चों को नरम चारा मिल सके, इसलिए भी उस स्थान में रहवास बनाते हैं जहां नरम चारा मिल सके।

सुरक्षित इलाका, इसलिए यहां जमे हुए हैं हाथी

वन विभाग के अफसरों का कहना है कि राजाडेरा के आसपास का जंगल हाथियों के लिए सेफ जोन साबित हो रहा है, क्योंकि इस ओर लोगों की ज्यादा आवाजाही नहीं होती। जिस जगह पर हाथियों का डेरा है वहां पर पर्याप्त चारा और पानी है। ऐसा लग रहा है कि हाथी जिस ओर आगे बढ़े थे, वहां चारा, पानी की कमी हुई होगी। इसलिए राजाडेरा को सुरक्षित एरिया मानकर यहीं डटे हुए हैं। राजाडेरा के जंगल में नरम चारा मिल रहा है।

वन विभाग के अफसरों व कर्मियों की मुसीबत बढ़ी

हाथी दल का आगे मूवमेंट नहीं होने की वजह से वन विभाग के अफसरों की नींद उड़ गई है। मानपुर और चौकी एसडीओ सहित रेंजर व अन्य कर्मचारी राजाडेरा में ड्यूटी कर रहे हैं। इन्हें कंदाड़ी कैंप की व्यवस्था भी देखनी पड़ रही है। कैंप में ग्रामीणों के लिए रसद की व्यवस्था की गई। सप्ताहभर से अफसर दूसरे काम छोड़कर केवल हाथियों की निगरानी में लगे हुए हैं। रेंजर जागेश गोंड ने बताया कि हाथियों का मूवमेंट नहीं हो रहा है। इसलिए गांव को खाली कराया गया। ग्रामीण कंदाड़ी में ठहराए गए हंै। ग्रामीणों के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं जुटाई जा रही है।

खेती-बाड़ी हो गई चौपट पालतू मवेशियों की चिंता

राजाडेरा में 40 से 45 मकान हैं। यहां लगभग 100 लोग निवासरत हैं। ग्रामीणों का मूल कार्य खेती है। इसी के सहारे ये जीवन-यापन करते हैं पर हाथियों के दहशत के चलते खेत नहीं जा पा रहे हैं। अब कंदाड़ी शिफ्ट हो गए हैं तो खेत और मवेशियों को देखने वाला कोई नहीं है। एक तरह से ग्रामीणों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। ​​​​​

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