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अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन:शांति के लिए पहले भारत की ओर देखता है विश्व

डोंगरगढ़19 दिन पहले
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  • कोरोनाकाल के चलते नहीं पहुंचे विदेशी धम्मगुरु, मुख्य अतिथि सांसद पांडेय ने कहा

प्रज्ञागिरि पहाड़ में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में कोरोनाकाल के चलते इस बार भारत के ही बौद्ध भदंत सम्मिलित हुए। बौद्ध विहार में सामूहिक बुद्ध वंदना कर भदंत आर्य नागार्जुन सुरई ससई के नेतृत्व में धम्म रैली दोपहर 1 बजे प्रज्ञागिरि पहुंची। मंच पर अतिथियों के समक्ष प्रज्ञागिरि ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष विनोद खांडेकर ने प्रसाद योजना की प्रशंसा करते हुए बताया कि इस योजना से प्रज्ञागिरि के विकास के आयाम में नई दिशा मिलेगी।

इस मौके पर मुख्य अतिथि सांसद संतोष पांडे ने कहा कि जब विश्व भटक जाता है तो शांति के लिए सबसे पहले भारत की ओर ही देखता है। प्रसाद योजना के माध्यम से धर्मनगरी के विकास लिए पहले चरण में 43 करोड़ 33 लाख रुपए दी गई है। इससे मां बम्लेश्वरी के अलावा प्रज्ञागिरि, चंद्रगिरि व अन्य धार्मिक स्थलों का विकास होगा।

यहां पर विश्वस्तरीय सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य केंद्र सरकार की है। उन्होंने 16 फरवरी के बाद केंद्रीय पर्यटन मंत्री के डोंगरगढ़ आने की संभावना भी जताई। सांसद पांडे ने कहा कि बौद्ध समाज सिद्धांतों के लिए समर्पित है। प्रसाद योजना निश्चित रूप से डोंगरगढ़ के विकास को और गति देगी। प्रज्ञागिरि एक ऐसा धार्मिक स्थल बन चुका है, जिसकी ख्याति भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है।

विश्व में शांति के लिए अध्यात्म जीवन श्रेष्ठ: सम्मेलन में भारत के बौद्ध धर्मगुरू उपस्थित रहे। भदंत आर्य नागार्जुन सुरई ससई ने कहा कि विश्व में शांति के लिए अध्यात्म जीवन सबसे श्रेष्ठ है। भगवान बुद्ध ने शांति के लिए दुनिया की मोह माया को त्यागकर तपस्वी जीवन को चुना और अध्यात्म को अपनाया।

पालकी से पहाड़ी पर गए भदंत, प्रतिमा के सामने की सामूहिक वंदना
भदंत सुरई ससई पहाड़ी पर पालकी से पहुंचे। उम्र अधिक होने की वजह से उन्हें पालकी में बैठाकर उपर ले जाया गया। पहाड़ी में स्थित भगवान बुद्ध आदमकद प्रतिमा के समक्ष वंदना कर पूजा की गई। मंच पर प्रज्ञागिरि ट्रस्ट के अध्यक्ष पूर्व विधायक विनोद खांडेकर, सचिव शैलेंद्र डोंगरे, सह-सचिव सुनील नागदौने, दुर्ग संभाग के पूर्व कमिश्नर दिलीप वासनीकर, अनिल मेश्राम, संतोष मेश्राम, सुनील रामटेके, वीरेंद्र बोरकर, संतोष भिमटे, अशोक डोंगरे, प्रमोद टेंभूर्णीकर, रितेश मेश्राम, धीरज मेश्राम, संतोष लांजेवार, विजय उके, सुरेश सहारे, दीपक साखरे, महेश सहारे, उत्तम समुंद्रे समेत देशभर से पहुंचे भदंत मंचस्थ रहे। अध्यक्ष विनोद खांडेकर ने समाज को एकता के सूत्र में बंधने की बात कही। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने समाज को सत्य व अहिंसा के के राह पर चलने की दिशा बताई है। जिसका हमें अनुशरण करके आगे बढ़ना चाहिए।

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