आजीविका संबंधी गतिविधियां जारी:महिला समूह अब तक बेच चुकी हैं 1.5 करोड़ की वर्मी कंपोस्ट

राजनांदगांव3 महीने पहले
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महिला समूह की ओर से राखियां भी बेची जा रही। - Dainik Bhaskar
महिला समूह की ओर से राखियां भी बेची जा रही।
  • ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अच्छा रिस्पांस

जिले में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित वर्मी कंपोस्ट की बिक्री स्थानीय स्तर पर किए जाने के साथ-साथ अब ऑन-लाइन प्लेटफार्म के माध्यम से भी की जा रही है। इससे अब इन स्वसहायता समूह की महिलाओं को देशभर से अॉर्डर मिलने लगे हैं। अब तक 70 हजार रुपए से अधिक के वर्मी कंपोस्ट की बिक्री की जा चुकी है। स्वसहायता समूहों द्वारा हस्तनिर्मित राखियां भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उतारी जा चुकी हैं।

गौठानों के माध्यम से स्वसहायता समूहों द्वारा आजीविका संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। गोधन न्याय योजना के तहत किसानों और पशुपालकों से 2 रुपए किलो की दर से खरीदे जा रहे गोबर से गौठानों में वर्मी कंपोस्ट का निर्माण इन समूहों द्वारा किया जा रहा है। जिले में 358 गौठानों में तैयार किए जा रहे वर्मी कंपोस्ट की बिक्री शासकीय विभागों तथा आम किसानों को की जाती रही है।

यहां से मिल रहे ऑर्डर
अब तक मुंबई, बेंगलुरू, मध्यप्रदेश, रांची, कोलकाता सहित अनेक महानगरों से आर्डर मिल चुके हैं। गोधन न्याय योजना के तहत जिले में अब तक 76 हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जा चुका है तथा 52 हजार क्विंटल खाद की बिक्री जिले के स्वसहायता समूहों द्वारा की जा चुकी है। समूह की महिलाओं के खाते में अब तक 1.4 करोड़ रुपये जमा हो चुके है। गौठानों में वर्मी कंपोस्ट के निर्माण व अन्य वस्तुओं के उत्पादन कार्य में एक हजार से अधिक महिलाएं जुटी हैं।

राखियों की भी बिक्री
गौठानों में चल रहे तरह-तरह के नवाचारों के अंतर्गत इस बार स्व-सहायता समूहों ने देशभर में बिकने वाली विदेशी राखियों को टक्कर देने के लिए आर्गेनिक राखियां तैयार कर बाजार में उतारा है। उनके द्वारा निर्मित राखियां जिले के शहरों के प्रमुख चौक-चौराहों पर तो बेची ही जा रही हैं, इनकी भी बिक्री अमेजन के माध्यम से की जा रही है। हस्तशिल्प के कद्रदानों के बीच बांस के छिलकों, सब्जियों के बीजों, पंखुड़ियों और अनाज के दानों से तैयार की गई ये राखियां लोकप्रिय हो चुकी हैं।

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