सिलगेर में फिर जमा हुए हजारों ग्रामीण:आंदोलन को एक साल पूरे; यहां आज के ही दिन गई थी 4 लोगों की जान

बीजापुर/सुकमा2 महीने पहले

छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर जिले की सरहद पर स्थित धुर नक्सल प्रभावित गांव सिलगेर में मंगलवार को एक बार फिर से हजारों ग्रामीण इकट्ठा हुए। सिलगेर से पुलिस कैंप को हटाने के लिए जमकर नारेबाजी की गई। पिछले साल सिलगेर आंदोलन में शामिल 3 ग्रामीणों की गोली लगने से और एक की भगदड़ में मौत हुई थी। मारे गए ग्रामीणों की पहली बरसी भी मनाई गई। सिलगेर में अचानक जुटी हजारों ग्रामीणों की भीड़ को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने कहा कि, सिलगेर में स्थापित किए गए पुलिस कैंप को हटाने की लगातार मांग की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों की मांग पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। बिना ग्राम सभा के आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर कैंप स्थापित कर दिया गया है। ग्रामीण चाह रहे हैं कि अभी कैंप हटा दिया जाए। फिर ग्राम सभा करें। कैंप रहेगा या नहीं इसका निर्णय ग्राम सभा में लिया जाएगा। इधर, आंदोलन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि जब तक कैंप नहीं हटाया जाएगा, हम आंदोलन में डटे रहेंगे।

भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

न्यायिक जांच की मांग
सिलगेर आंदोलन में शामिल ग्रामीणों ने गोली कांड की न्यायिक जांच करवाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गोली कांड को हुए 1 साल पूरा हो गया है। मारे गए लोगों के परिवार वालों को न तो मुआवजा दिया गया है और न ही मामले की न्यायिक जांच की गई है। सरकार के प्रतिनिधि बात करने आए थे, जिन्होंने आश्वासन दिया था। अब उनकी तरफ से भी कोई पहल नहीं की जा रही है।

कैंप की तरफ बढ़ते ग्रामीण।
कैंप की तरफ बढ़ते ग्रामीण।

साल भर से चल रहा आंदोलन
सिलगेर में पिछले एक साल से आंदोलन लगातार चल रहा है। कोरोना की दूसरी लहर में आंदोलन में शामिल ग्रामीण घर जरूर लौटे थे लेकिन, उनके तंबू, बर्तन समेत अन्य सामान जस के तस आंदोलन स्थल पर ही थे। जब कोरोना के आंकड़े कम हुए तो ग्रामीणों की भीड़ फिर से पहुंचने लगी थी। तब से लेकर अब तक कई ग्रामीण आंदोलन स्थल पर मौजूद थे। आज 17 मई को हजारों ग्रामीण इकट्ठा हो गए।

नाट्य रूपांतरण करतीं महिलाएं।
नाट्य रूपांतरण करतीं महिलाएं।

मामले ने ऐसे पकड़ा था तूल
12 मई 2021 को सिलगेर में पुलिस कैंप स्थापित किया गया था, जिसके ठीक दूसरे दिन यानी 13 मई से ग्रामीणों ने सिलगेर से कैंप को हटाने की मांग शुरू कर दी थी। 3-4 दिनों के अंदर आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया था। आस-पास गांव के ग्रामीण हजारों की संख्या में इकठ्ठा हुए थे। 17 मई की दोपहर कैंप को हटाने के लिए आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की पुलिस के साथ झूमाझटकी हुई थी। आरोप है कि कि झूमाझटकी के बाद पुलिस ने गोली चला दी थी। गोली गलने से 3 ग्रामीणों की मौत हुई थी जबकि 1 की भगदड़ में जान चली गई थी। हालांकि मारे गए लोगों को पुलिस ने नक्सली बताया था।

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