चिंताजनक:ब्लास्टिंग से 10 ग्राम पंचायतें प्रभावित, पर्यावरण को नुकसान

अंबिकापुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मुहिम को लेकर प्रबुद्धजनों ने पर्यावरण संरक्षण मंडल बनाया। - Dainik Bhaskar
मुहिम को लेकर प्रबुद्धजनों ने पर्यावरण संरक्षण मंडल बनाया।
  • मैनपाट क्षेत्र मेंे बाॅक्साइट की माइनिंग बंद करने की चेतावनी

छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट हमेशा बना रहे। इसके लिए यहां बाॅक्साइट की माइनिंग को बंद करने की जरूरत है। इसके कारण मैनपाट के पर्यावरण को बड़ा नुकसान हो चुका है। इससे यहां का जल स्तर जहां नीचे जा रहा है। वहीं भू स्खलन से किसानों के खेत व मकानों को नुकसान होने लगा है। यहां पर्यावरण को बचाने स्थानीय प्रबुद्ध लोगों ने जन पर्यावरण संरक्षण मंडल बनाया है।

इसके साथ ही उसने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर माइनिंग व बाक्साइट का ट्रांसपोर्ट बंद नहीं हुआ तो वे कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। मंडल की शिकायत पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के अफसरों ने चार माह पहले जांच की थी। तब पाया था कि पर्यावरण को नुकसान से स्थानीय लोग चिंतित हैं। सभी बाक्साइट खनन बंद करने के पक्षधर हैं, लेकिन इस पर अब तक कार्यवाही नहीं हो सकी है। बता दें कि मैनपाट में 30 साल से बाक्साइट का खनन हो रहा है। इसके कारण 10 से अधिक पंचायतें प्रभावित हैं और लगातार खनन के कारण आबोहवा को नुकसान हुआ है।

मैनपाट को बर्बाद होते नहीं देख सकता: कृष्ण
जन पर्यावरण मंडल के सदस्य कृष्ण नंदन सिंह का कहना है कि वे अपनी आंखों से मैनपाट को तबाह होते नहीं देख सके। हमने पर्यावरण को बचाने खनन बंद करने की मांग कई बार की, लेकिन सुनवाई नहीं होती। मुख्य सचिव को कहा कि यही हाल रहा तो कोर्ट जायेंगे। इस पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सचिव को जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिए। मंडल के अफसरों को जांच में खदानों में कई खामियां मिलीं, इसके बाद अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च
मैनपाट की कुनिया, लुरेना, पथराई, उरेंगा पंचायत में भी बाक्साइट का भंडार है। यहां नई खदान के लिए सर्वे हो चुका है। सरकार यहां भी माइंस खोलने की तैयारी में है। कृष्ण नंदन सिंह ने कहा कि यहां खदान खुली तो पर्यावरण और भी नुकसान होगा। उनका कहना है कि मैनपाट में सरकार पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है, पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कागजों में करोड़ों खर्च किया जाता है, तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले खदान क्यों खोले जा रहे हैं।

खदानों में हैवी ब्लास्ट से घरों में आईं दरारें
मैनपाट में बालको द्वारा माइनिंग किया गया है। यहां हैवी ब्लास्ट से घरों में दरार आ चुकी है, तो खेती की जमीन बर्बाद हो गई। माइनिंग के बाद खदानों को समतल कर पहले जैसे स्वरूप में लाना था, लेकिन आज भी तालाब नुमा बड़े बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जहां बच्चों सहित मवेशियों की डूबने से मौत तक हो चुकी है। इसके बावजूद इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। वहीं अवैध तरीके से हजारों पेड़ों के काटने का मामला भी जांच में सामने आया था।

खबरें और भी हैं...