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अनदेखी:मलेरिया रोकने विभाग के पास 10 लाख इधर निकायाें ने सामग्री भी नहीं खरीदी

बैकुंठपुर6 दिन पहले
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मार्गदर्शन राेड बैकुंठपुर में जाम नाली, पानी सड़क पर| - Dainik Bhaskar
मार्गदर्शन राेड बैकुंठपुर में जाम नाली, पानी सड़क पर|
  • मुख्य नालों की सफाई नहीं हुई वर डीडीटी पाउडर का छिड़काव भी नहीं किया

बारिश के साथ ही जिले के शहरी क्षेत्रों में लोग इन दिनों मच्छरों के डंक से त्रस्त हैं। शाम ढलते ही चौक-चौराहे पर खड़ा रहना मुश्किल हो गया है। मच्छरों की फौज मौज कर रही है और लोग इससे परेशान व लाचार हैं। शाम के वक्त बाजार, पार्क में कहीं खड़ा रहना मुश्किल हो गया है। दरअसल मच्छरों के पनपने की वजह नाले नालियों की समुचित सफाई न होना व जगह-जगह होने वाले जलभराव है। गंदगी में मच्छरों की संख्या जबरदस्त तरीके से बढ़ती है और इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है।

पिछले साल कोरोना संक्रमण के खौफ के बीच जिले के नगरीय निकायों ने बड़े पैमाने पर डीडीटी पाउडर, चूने व केमिकल की खरीदारी की थी और अमूमन सभी नाले व गंदगी वाले क्षेत्रों में इसका छिड़काव भी किया गया था। नतीजतन मच्छरों का प्रकोप कुछ कम था, लेकिन अबकी बार कोरोना संक्रमण के बीच निकायों के अफसर हर साल मच्छरों से होने वाले बीमारियों को भूल गए हैं। अफसरों की व्यस्तता के कारण अब तक डीडीटी पाउडर व चूने की खरीदारी नहीं हो सकी है।

इधर मलेरिया ने दस्तक दे दी है। वर्तमान में यहां काेराेना से अधिक मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सरकारी आंकड़ो के अनुसार साल 2021 में 44 हजार 46 मरीजों के खून की जांच में जिले में 111 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि जिलेभर में मलेरिया की जमीनी हकीकत का अंदाजा अस्पतालों के अलावा पैथोलॉजी सेंटरों और मेडिकल स्टारों पर बिक रही दवाइयों को देखकर लगाया जा सकता है।

लेकिन, स्वास्थ्य विभाग केवल सरकारी अस्पतालों में हुई जांच तक सीमित रहता है। जिले में शहरी समेत ग्रामीण इलाकों से हर साल मलेरिया व मच्छर जनित बीमारियाें से लोग ग्रसित हो रहे हैं। लेकिन, फिर भी इनसे निपटने की तैयारियां कागजों पर सिमट जा रही है। जिला मुख्यालय की ही बात करें तो शहर में दर्जनों स्थानाें पर जल जमाव होता है। मच्छरों से रोकथाम के लिए सरकार हर साल फंड मुहैया कराती है।

स्वास्थ्य विभाग के साथ निकायों को अलग से राशि उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन ब्लीचिंग-डीडीटी का छिड़काव समय पर नहीं होता है, न ही नालों की सफाई। मलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग सिर्फ जागरुकता अभियान पर हर साल हजारों रुपए खर्च करता है।

डीडीटी का छिड़काव भी कराया जा रहा है: शुभेंदु
नगर पालिका के उप अभियंता व स्वच्छता मानिटरिंग करने वाले शुभेंदू श्रीवास्तव ने बताया कि अभी दवा छिड़काव करा रहे हैं। मच्छरों से निपटने के लिए शहर में चिन्हित इलाकों में मशीन के माध्यम से मच्छर मार रहे हैं। डीडीटी का छिड़काव भी कराया जा रहा है। नगर निगम के पास दो फाॅगिंग मशीन हैं। वार्डों में जल्द फाॅगिंग शुरू कराई जाएगी।

मच्छर मारने फॉगिंग नहीं 15 दिन में मलेरिया रोगी बढ़े
भास्कर ने चिरमिरी क्षेत्र की पड़ताल की तो यहां हर निजी पैथोलैब में मलेरिया के एक से दो केस मिलने की जानकारी संचालकों ने दी। जाहिर है कि ननि और स्वास्थ्य विभाग की नाकामी से शहर में एक बार फिर मच्छर बढ़ रहे हैं। ऐसी लापरवाही भी तब बरती जा रही है जब चिरमिरी में डेंगू के कई मरीज सामने आ चुके हैं। दोनों ही विभाग के अफसर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। हकीकत ये है कि स्वास्थ्य विभाग के पास लार्वा नष्ट करने के लिए फिलहाल टीम नहीं हैं, जबकि नगर निगम मच्छरों को मारने फॉगिंग नहीं कर रहा है।

अप्रैल, मई में फॉगिंग हुई जरूरत के वक्त कर दी बंद
हालत यह है कि जिला मुख्यालय में नगर पालिका के पास शहर में मच्छरों को मारने के लिए नपा के पास दो फॉगिंग मशीन तो हैं, लेकिन उनमें डालने के लिए नपा के पास केमिकल नहीं है। अप्रैल, मई महीने में कोरोना संक्रमण के बीच नपा ने खूब फॉगिंग करवाई थी। लेकिन इसके बाद से फॉगिंग बंद है। जुलाई में जब अधिक मच्छर पनप रहे हैं, तो फॉगिंग नहीं की जा रही है। यही हालत जिले के अन्य नगरीय क्षेत्रों की भी है।

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