दूसरों का हल चलाने वाले बने मालिक:10 साल पहले जिन खेतों में उड़ती थी धूल, वहां 100 किसानों ने लगाई सब्जी और गन्ना, सालाना आय 1.5 करोड़

अंबिकापुर5 दिन पहलेलेखक: दिलीप जायसवाल
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सोलर एनर्जी पंप से खेती में मिल रही सुविधा। - Dainik Bhaskar
सोलर एनर्जी पंप से खेती में मिल रही सुविधा।
  • सोलर एनर्जी पंप ने बदली किसानों की तकदीर, अब हर खेत हो रहा सिंचित

बलरामपुर जिले की धंधापुर पंचायत में 10 साल पहले सिंचाई की नहीं थी सुविधा, अब 300 एकड़ में सिंचाई बलरामपुर जिले की एक पंचायत में 10 साल पहले तक सिंचाई की सुविधा नहीं होने की वजह से धूल उड़ती थी, लेकिन सौर सूजला स्कीम के तहत लगाए गए सौर ऊर्जा पंप ने किसानों की तकदीर बदल दी है। इस पंप से 300 एकड़ से अधिक खेतों की सिंचाई हो रही है।

खुद के खेतों में सिंचाई की सुविधा नहीं होने की वजह से जो किसान दूसरों के यहां मजदूरी करने जाते थे, वे भी अब सब्जी और गन्ने की खेती करने लगे हैं। सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिनके खाते में पहले एक हजार रुपए भी नहीं होते थे, वे अब सालाना एक लाख रुपए से अधिक बचत करने लगे हैं।

​​​​​​​बलरामपुर जिले की धंधापुर पंचायत के सैकड़ों किसानों की तकदीर सौर सूजला स्कीम के तहत लगे सौर ऊर्जा पंप ने बदल दी है। यहां के किसान सीताराम पैकरा ने बताया कि उनकी पंचायत में लो वोल्टेज बड़ी समस्या है, गर्मी के दिनों में बिजली के अभाव में वे रात में खेत में जाकर किसी तरह गन्ना व सब्जी की खेती में पानी देते थे, लेकिन अब सौर ऊर्जा वाले सबमर्सिबल पंप लग जाने से उन्हें राहत मिली है।

अब पंचायत में 300 एकड़ से अधिक में गन्ना की खेती हो रही है। वे हर साल औसत प्रति एकड़ एक लाख रुपए के हिसाब से तीन करोड़ का गन्ना बेच रहे हैं, इसमें उन्हें लागत राशि छोड़कर करीब डेढ़ करोड़ का सालाना मुनाफा हो रहा है।

नदी का पानी खेतों तक पहुंचाने से 3 पंचायत के किसानों को फायदा
धंधापुर की किसान और उप सरपंच सुशीला जायसवाल ने कहा हमारी पंचायत के किसानों का खेत और अधिक सिंचित हो सकता है, अगर महान नदी पर स्थित गांगी जमुना नामक से लिफ्ट के माध्यम से पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाएं, इसके लिए पहले भी बातें हुईं, लेकिन इस पर पहल नहीं हुई है।

अगर लिफ्ट से नदी का पानी खेतों तक पहुंचाया गया तो धंधापुर ही नहीं रेवतपुर और परसवार कला के किसानों का खेत भी सिंचित होगा। वहीं, इससे भू-जल स्त्रोत सुरक्षित रहेगा, क्योंकि लिफ्ट एरिगेशन प्रोजेक्ट शुरू होने से किसान जगह-जगह बोरवेल नहीं कराएंगे।

दूसरे के खेतों में हल चलाने वाले अब खुद रख रहे मजदूर, क्योंकि खेती बड़े पैमाने पर
किसान बुधराम पैकरा ने कहा कि धंधापुर पंचायत में बड़े पैमाने पर खेती होने से सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ कि दूसरों के यहां मजदूरी करने वाले अब खुद अपने खेतों में काम कर रहे हैं और मजदूर रख रहे हैं। वे कुछ साल पहले पहले खुद मजदूरी करने जाते थे। वहीं अब यहां अब खेतिहर मजदूर भी नहीं मिलते हैं, ऐसे में किसान मजदूरों की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां किसानों में खेती को लेकर अगर जागरूकता बढ़ी है तो उसका सबसे बड़ा कारण किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर किसान क्रेडिट कार्ड से नकद लोन व खाद मिलना भी है।

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