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शिक्षा की हकीकत:कोरिया जिले के कुदरा गांव के 80 बच्चे अब तक नहीं गए स्कूल, कई पीढ़ी के लोग अनपढ़

बैकुंठपुर4 महीने पहले
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जिले का एक एैसा गांव जहां के ग्रामीण विकास क्या होता है, यह जानते ही नहीं हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रामीणों को बिजली, सड़क, पानी, स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ही जीवन जीना पड़ रहा है। 600 की आबादी वाले गांव के लोग ढोढ़ी और कुंए का पानी मजबूरी में पी रहे है। पीढ़ियों से लोग यहां अनपढ़ हैं। जिला मुख्यालय से पौने दो सौ किमी दूर भरतपुर ब्लाॅक का एक एैसा गांव, जहां बिजली समेत पानी, सड़क, स्कूल आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है। यहां कई पीढ़ी से लोग स्कूल नहीं गए हैं, क्योंकि गांव में 15 किमी के दायरे में कोई स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। इस गांव में 80 से अधिक बच्चे है, जो पूरा दिन खेलकूद और मवेशी चराने में बीता रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं भरतपुर ब्लाॅक के कुदरा, पटपरहा, दुलारी गांव के बारे में। यहां 80 से अधिक बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं, तो दूसरी ओर यहां आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं हैं। यह शायद जिले का पहला एैसा गांव हैं। 

इसी सत्र से अस्थाई रूप से शुरू करेंगे स्कूल: कलेक्टर
कलेक्टर एसएन राठौर ने कहा कि अभी नई पंचायत का गठन हुआ है। गांव में कई समस्याएं हैं, लेकिन शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूल भेजना हमारी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। संभवत: इसी सत्र से अस्थायी रूप से स्कूल का संचालन शुरू हो जाएगा।

बड़ी पंचायत होने से कई गांव में विकासकार्य रुके
राज्यमंत्री कमरो ने बताया कि बड़ी पंचायत होने से कई गांव में विकासकार्य नहीं हो सके। यही वजह है कि भरतपुर-सोनहत विधानसभा में 44 नए ग्राम पंचायत और सिर्फ भरतपुर ब्लाॅक में 20 नए ग्राम पंचायत का गठन किया गया। इससे ग्रामीणों को छोटी पंचायत होने से मूलभूत सुविधा मिलने के साथ तेजी से विकासकार्य भी हो सकेगा। जिला पंचायत सदस्य रविशंकर सिंह ने बताया यहां मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना सरकार के लिए चुनौती है। प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही है।

जल्द मिलेगी ग्रामीणों को सुविधाएं: राज्यमंत्री कमरो
राज्यमंत्री गुलाब कमरो ने कहा कि 15 साल में भाजपा शासन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी की गई। इसका दुष्परिणाम ग्रामीण भुगत रहे हैं। अब कुदरा, पटपरहा और दुलारी 3 गांव को मिलाकर 1 पंचायत का गठन किया गया है। जल्द ही इस नवगठित पंचायत में बिजली, सड़क, पानी समेत स्कूल आंगनबाड़ी की सुविधा ग्रामीणों को मिलेगी।

नेताओं को सिर्फ वोट से मतलब, मांग अब तक अधूरी
विकास को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं, लेकिन इस गांव के मामले में 15 साल की भाजपा सरकार भी फेल साबित हुई और विपक्ष में रहने वाली कांग्रेस के नेता भी कभी गांव की आवाज नहीं बन सके। अनुरूप सिंह, राममिलन, अनिल सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान वोट मांगने वाले नेताओं से हर बार स्कूल, बिजली, सड़क और पानी की मांग करते रहे, लेकिन अब तक वह पूरी नहीं हो सकी। इसका खामियाजा नई पीढ़ी को भी अनपढ़ रहकर भुगतना पड़ रहा है।

सरईझरियां में 5 बच्चों के लिए खोला स्कूल
कुदरा के विकास के लिए नई पंचायत के गठन में इसे शामिल कर इसी साल पंचायत का दर्जा दिया है, लेकिन हैरानी की बात है कि ब्लाॅक खड़गवां के सरईझरियां में 5 बच्चों के लिए स्कूल संचालित किया जा रहा है और यहां कुदरा में 80 से अधिक बच्चों के बाद अब तक शासन और स्थानीय प्रशासन के अफसरों की नजर क्यों नही पड़ी या यह उनकी लापरवाही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई पीढ़ी के लोग अनपढ़ रह गए, इसका जिम्मेदार कौन है? क्या उनके खिलाफ कार्रवाई हो पाएगी।

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