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मजदूरों पर दोहरी मार:बैंक में खाता नहीं होने पर दूसरों के खाते में भेज रहे रुपए, घर वालों को 14 प्रतिशत कमीशन काटकर दे रहे खाताधारक

अंबिकापुर2 महीने पहले
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  • जनधन के खाते खुले थे, लेकिन वे बंद हो गए इसलिए नुकसान
  • मनरेगा में काम की समय पर मजदूरी नहीं मिली तो सैकड़ों लोग कमाने चले गए परदेस, सूरजपुर के चांदनी बिहारपुर के गांवों से शुरू हुआ पलायन

सरगुजा संभाग से मजदूरों का पलायन फिर से शुरू हो गया है। सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर इलाके के 30 से अधिक युवक दिवाली से पहले ही पंजाब, महाराष्ट्र सहित दूसरे राज्यों में चले गए हैं। इसके पीछे मनरेगा के तहत समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं होना प्रमुख कारण है। वहीं दूसरी तरफ पलायन कर दूसरे राज्य गए मजदूरों को मालिक से पूरी मजदूरी मिल जाती है, लेकिन वे वहां से अपने खर्च के बाद जो पैसा बचता है उसे अपने परिवार के सदस्यों को सीधे नहीं भेज पाते हैं। इसकी वजह से उन्हें इलाके के दूसरे लोगों के बैंक खाता का सहारा लेना पड़ता है और वे इस पर हजार में 100 रुपए का कमीशन लेते हैं तो वहीं कामन सर्विस सेंटर या बॉयोमेट्रिक सिस्टम से पैसा आहरण करने वाले भी दस हजार में चार सौ ले लेते हैं। इस तरह परदेश से मजदूर पसीना बहाकर जितना पैसा घरवालों के लिए भेजते हैं वह भी पूरा नहीं पहुंच पाता है। दैनिक भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि ओड़गी ब्लाॅक के बिहारपुर इलाके से पंडो सहित अन्य जनजातियों के सैकड़ों युवक और नाबालिग मजदूरी के लिए बैंगलोर, ओडिशा, दिल्ली, मुम्बई सहित अन्य महानगरों में जाते हैं। अक्टूबर में पंजाब अपने दस से अधिक साथियों के साथ गए कोल्हुआ संतलाल पंडो नामक मजदूर ने फोन पर बताया कि गांव में मनरेगा के तहत गोदी खोदने का काम मिलता है लेकिन मजदूरी महीनों बाद मिलती है। इसके कारण वे गांव में मजदूरी नहीं करते हैं। जबकि पंजाब में एक दिन में वे चार सौ रुपए कमाते हैं। उसने बताया कि उसके गांवों में जनधन के तहत खाता खोला गया था लेकिन खाता बंद हो गया तो कुछ का नहीं खुला। इसके कारण वे गांव के ऐसे लोगों के खाता में पैसा भेजते हैं जो आहरित कर घरवालों को दे देते हैं। इसके एवज में वे जिनके खाता में पैसा भेजते हैं तो खाताधारी और च्वाइस सेंटर वाला कमीशन लेता है। जैसे अगर कोई मजदूर दस हजार भेजता है तो एक हजार कमीशन खाताधारी ले लेता है तो उस पैसा को आहरित करने का एजेंट भी चार सौ लेता है। इस तरह 14 प्रतिशत मेहनत की कमाई कमीशन में चला जाता है।

ऐसे चालू करवा सकते हैं अपना बंद बैंक खाता
अगर आपका किसी बैंक में खाता है और लेनदेन नहीं होने की वजह से बंद है तो आप बैंक में अपना फ़ोटो, आधार कार्ड की छायाप्रति स्व प्रमाणित कर जमा कर खाता को चालू करवा सकते हैं। ये साधारण सी प्रक्रिया है, जिसके बाद खाता चालू हो जाएगा और एटीएम भी मिल जाएगा, जिसके बाद आसानी से लोग खाते से रुपए निकाल सकते हैं।

100 से अधिक मजदूरों के पलायन की रिपोर्ट मिली थी
पिछले साल दैनिक भास्कर ने बिहारपुर इलाके से नाबालिग मजदूरों के पलायन का खुलासा किया था। तब पुलिस और बाल संरक्षण की टीम ने इलाके के गांवों में जाकर इसका पता लगाया था कि कितने नाबालिग और मजदूर दूसरे राज्य गए हैं तब इसका आंकड़ा 100 से अधिक का मिला था। उस समय एक मजदूर की हैदराबाद में मौत भी हो गई थी।

पलायन के बारे में घरवाले नहीं बताना चाहते, ये है बड़ी वजह
मजदूरों और ग्रामीणों का कहना है कि सभी के पास खेती योग्य जमीन नहीं है। जब मीडिया में खबर आती है तो अधिकारी सक्रिय होते हैं और मनरेगा में काम करने समझाइश दी जाती है। मजदूरी दिलाने में अफसर ध्यान नहीं देते हैं। यही वजह है कि वे दूसरे राज्यों में जाकर काम करने मजबूर हैं। आमतौर पर परिजन पलायन के बारे में बताना नहीं चाहते।

अवैध है कियोस्क सेंटर में आहरण के नाम पर कमीशन
सरगुजा जिले में सभी बैंकों के बैंक प्रतिनिधि हैं जो कियोस्क का संचालन करते हैं उनमें कुछ को छोड़ दें तो सभी अवैध तरीके से पैसा आहरण करने और जमा करने के नाम पर कस्टमर से कमीशन लेते हैं। जबकि उन्हें बैंक खुद उनके बिजनेस के हिसाब से पैसे देते हैं। लेकिन इसके बाद भी अवैध रूप से कमीशन लिया जाता है, जो गलत है।

महुली और कोल्हुआ में दो साल बाद भी नहीं मिली मजदूरी
पड़ताल में पता चला है कि महुली और कोल्हुआ गांव में दो साल पहले मजदूरों ने मनरेगा के तहत डबरी, कूप निर्माण में काम किया था। इसके बाद भी उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया। इसके बाद मजदूरों ने जनपद सीईओ से लेकर कलेक्टर तक से शिकायत की। इस पर जांच हुआ, पता चला कि मजदूरी के नाम पर गांव में धांधली की गई थी।

आश्वासन: अवैध तरीके से कमीशन की शिकायत पर होगी कार्रवाई
मेरे ब्रांच के अंडर में छह कियोस्क हैं। यहां प्रतिनिधि अगर कमीशन ले रहे हैं तो इसकी लिखित शिकायत करें उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं अगर निजी बैंकिंग कंपनी का कोई प्रतिनिधि है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं। इसकी शिकायत प्रशासन से की जा सकती है। जो बैंक खाता बंद हो गए हैं उन्हें चालू किया जा सकता है इसके लिए सिर्फ कस्टमर अपना आधार कार्ड जमा किया जाए।
-राहुल तिवारी, बैंक ब्रांच मैनेजर, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, बिहारपुर

दावा: मजदूरों को मनरेगा के भुगतान के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है
मजदूरों को भुगतान के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। कुछ त्रुटियों की वजह से मजदूरों को समय पर पैसा नहीं मिलता। लेकिन ऐसे केस भी गिने चुने ही होते हैं। उन्हें भी तत्काल भुगतान कराया जाता है। इन्हीं मामलों की वजह से गलत मैसेज जाता है कि मजदूरी का समय पर भुगतान नहीं होता है। जहां तक अवैध कमीशन लेने की बात है तो यह गलत है, सम्बन्धित अफसरों को ऐसा करने वालों पर कार्यवाही करना चाहिए।
-टीएस सिंहदेव, पंचायत मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

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