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14 में से 11 का समर्थन:राज परिवार के आदित्येश्वर सरगुजा जिपं के नए उपाध्यक्ष बनेंगे

अंबिकापुर6 दिन पहले
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आदित्येश्वर शरण सिंहदेव। - Dainik Bhaskar
आदित्येश्वर शरण सिंहदेव।
  • उपाध्यक्ष पद से कांग्रेस जिला अध्यक्ष राकेश गुप्ता के इस्तीफे के बाद खाली हुए पद के लिए होना है चुनाव

सरगुजा राज परिवार के सदस्य आदित्येश्वर शरण सिंहदेव का यहां के जिला पंचायत का नया उपाध्यक्ष बनना लगभग तय है। इस पद से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के इस्तीफे के बाद जिला पंचायत उपाध्यक्ष के खाली हुए सीट के लिए चुनाव होना है। राज्य सरकार से चुनाव के लिए आदेश जारी हो गया है।

अगले हफ्ते चुनाव होने का अनुमान है। आदित्येश्वर का उपाध्यक्ष बनना इसलिए तय है, क्योंकि 14 सदस्यीय जिला पंचायत में 11 सदस्य कांग्रेस समर्थित है और सभी चाहते हैं कि आदित्येश्वर ही उपाध्यक्ष बने। इसके लिए कई सदस्य उनका नाम आगे कर चुके हैं। विपक्षी दल भाजपा के लिए चुनाव में दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है, क्योंकि उसके सिर्फ 3 सदस्य हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष मधु सिंह भी कांग्रेस से है। पहली बार सदस्य चुने गए आदित्येश्वर: आदित्येश्वर शरण सिंहदेव पहली बार जिला पंचायत का सदस्य निर्वाचित हुए हैं। वे अंबिकापुर ब्लॉक के 2 नंबर सीट से जिला पंचायत में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ये वही सीट है, जहां पिछले 3 पंचवर्षीय से कांग्रेस जिला पंचायत में चुनाव हार रही थी। इस सीट के अंतर्गत 35 पंचायतें आती हैं। करीब 50 हजार वोटर हैं।

भाजपा के लिए औपचारिकता दिख रही, क्योंकि उसके सिर्फ 3 सदस्य

आदित्येश्वर के जिला पंचायत उपाध्यक्ष बनने के मायने
आदित्येश्वर के जिला पंचायत में उपाध्यक्ष बनने के कई मायने हैं। उनके लिए उपाध्यक्ष की कुर्सी छोड़ने वाले कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता बताते हैं कि हम सबके लिए ये बड़ी उपलब्धि होगी। एक कुशल व सक्षम नेतृत्व हमें मिलेगा। लोगों की उम्मीदें बढ़ेंगी, तो काम भी होंगे। भविष्य के लिए एक जवाबदार लीडर तैयार है। आदित्येश्वर अपने बड़े दाऊ की तरह ग्रास रूट से राजनीति में काम सीख रहे हैं। पेयजल, स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में सरगुजा को आगे ले जाने की उनमें ललक है और इसमें वे काम भी कर रहे हैं। सरगुजा की यही जरूरत भी है।

आदि बाबा ने किया भ्रमण, भविष्य के लिए दावेदारी मजबूत होगी
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि आदित्येश्वर के उपाध्यक्ष बनने के बाद पार्टी मजबूत होगी। उन्हें टीएस सिंहदेव के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। यही कारण है कि वे ग्रास रूट पर उसी तरह से काम कर रहे हैं, जिस तरह टीएस सिंह देव ने अपनी सक्रिय राजनैतिक पारी की शुरुआत पार्षद से की थी। आदित्येश्वर ने भी उसी तरह चुनाव लड़ने से पहले क्षेत्र का भ्रमण किया। लोगों के बीच गए और फिर जनता के आग्रह पर चुनाव में उतरे थे। जिला पंचायत उपाध्यक्ष बनने के बाद जवाबदारी बढ़ेगी। पंचायत व ग्रामीण विकास सहित जन कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

पहले टीएस बाबा ने कहा था-अभी आदित्येश्वर को काम सीखना चाहिए
जिला पंचायत चुनाव के डेढ़ साल बाद आदित्येश्वर उपाध्यक्ष बनेंगे। चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला था और उस समय भी पार्टी समर्थित सभी सदस्य चाहते थे कि आदित्येश्वर ही उपाध्यक्ष बनें। टीएस सिंह तक यह प्रस्ताव रखा, लेकिन तब सिंहदेव यह कहकर राजी नहीं हुए कि अभी उन्हें काम सीखना चाहिए। उन्होंने अनुभवी राकेश गुप्ता के लिए इच्छा जताई और गुप्ता उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। पदभार ग्रहण करते ही गुप्ता ने एक साल बाद पद छोड़ने का एलान कर दिया था। आदित्येश्वर बतौर डीडीसी एक साल में बहुत कुछ देख और समझ चुके हैं।

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