समस्या / पहले से ही कमी अब डीएमएफ फंड से नियुक्त डॉक्टरों की सेवा का अंतिम दिन आज

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  • 30 जून को जिले में नियुक्त विशेषज्ञ चिकित्सक और चिकित्सव की संविदा अवधि होगी पूरी, 13 नियुक्त किए डॉक्टर में अब 5 बचे

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

मनेंद्रगढ़. जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी पहले से ही बनी हुई है, वहीं अब डीएमएफ जिला खनिज संस्थान न्यास अंतर्गत जिले में नियुक्त विशेषज्ञ चिकित्सक और चिकित्सकों की संविदा अवधि 30 जून को पूरी हो रही है। 
एक दिन का भी समय नहीं बचा है, लेकिन अब तक शासन-प्रशासन की ओर से इनकी सेवा अवधि बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यदि सेवा अवधि नहीं बढ़ाई गई तो खासकर सीएचसी मनेंद्रगढ़ में नियुक्त एकमात्र गायनोलॉजिस्ट सहित मेडिकल ऑफिसर की कमी मरीजों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा जिले में डीएमएफ मद से चिकित्साधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सकों को मिलाकर कुल 13 डॉक्टरों की नियुक्ति जिला चिकित्सालय, सीएचसी अाैर पीएचसी में की थी। इनमें से वर्तमान में सिर्फ 5 डॉक्टर ही जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डीएमएफ मद से चिकित्साधिकारी को जहां 84 हजार वेतन मिलता है, वहीं विशेषज्ञ चिकित्सक को 2 लाख 10 हजार वेतन दिया जाता है। सूत्रों से पता चला है कि डीएमएफ मद से जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में नियुक्त किए गए चिकित्सकों को अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में बदलकर इसी मद से वेतन का भुगतान किया जाएगा, जिससे डॉक्टरों के वेतन में काफी अंतर आएगा। चिकित्साधिकारी को जहां 84 हजार हर माह वेतन मिलता था, उन्हें 55 हजार मिलेगा। वहीं विशेषज्ञ चिकित्सक को 2 लाख 10 के स्थान पर 1 लाख 15 हजार वेतन भुगतान किया जाएगा।
वेतन में बड़े अंतर से नाराज डॉक्टर छोड़ सकते हैं नौकरी
वेतन में भारी अंतर से डीएमएफ मद से रखे गए चिकित्सकों में नाराजगी है। सूत्रों से पता चला है कि सीएचसी मनेंद्रगढ़ में पदस्थ चिकित्साधिकारी डॉ. किरण किशोर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाखा डे, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगर में पदस्थ डॉ. आरजे लकड़ा, सीएचसी सोनहत में पदस्थ सर्जन डॉ. अजय कुमार और जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती 5 डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ने का मन बना लिया है। इनका कहना है कि सरकार को शायद अब उनकी जरूरत नहीं है। यही वजह है कि डीएफएफ फंड से उन्हें सैलरी नहीं देकर एनएचएम से सैलरी देने की बात कही जा रही है। इतने कम वेतन में वे अपनी सेवाएं देने में असमर्थ हो जाएंगे और मजबूरन उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ेगी।

सीएचसी मनेंद्रगढ़ में महिला मरीजों की बढ़ेंगी मुश्किलें
डीएमएफ मद से नियुक्त किए डॉक्टर यदि नौकरी छोड़ते हैं तो मनेंद्रगढ़ सीएचसी में महिला मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। यहां 10 साल तक एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ की पदस्थापना नहीं की गई थी। इसके लिए लोग 37 दिन अनशन पर बैठे थे, तब स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. मंजू एक्का की पदस्थापना की गई। 1 साल तक सेवाएं देने के बाद उनका तबादला हो गया। उनके बाद डॉ. विशाखा डे को मनेंद्रगढ़ में डीएमएफ मद से संविदा में पदस्थ किया है। ऐसे में यदि वे नौकरी छोड़ती हैं तो मनेंद्रगढ़ में एक बार फिर स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी हो जाएगी।

सीएमएचओ ने कहा - सेवा अवधि बढ़ेगी, लेकिन डॉक्टरों का वेतन घटेगा
सीएमएचओ कोरिया डॉ. रामेश्वर शर्मा इस विषय में कहना है कि डीएमएफ मद से नियुक्त किए गए विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सकों की सेवा अवधि बढ़ाई जाएगी, लेकिन शासन की नई गाइडलाइन के अनुसार इस मद से चिकित्सकों के वेतन में कमी आएगी। जब उनसे यह सवाल किया गया कि यदि कम वेतन में चिकित्सक नौकरी छोड़कर जाते हैं तब क्या विकल्प है, इस पर उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री की पहल पर खनिज न्यास वेतन वृद्धि पर विचार कर सकता है।

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