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माफिया राज:सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर की पहाड़ियों से रोज 50 ट्रॉली पत्थर की चोरी, ग्रामीण बोले- माफियाओं पर अफसर मेहरबान

अंबिकापुर13 दिन पहले
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  • एक-दो खदानों का लाइसेंस लेकर पूरी पहाड़ियों को खोद डाला, अफसरों की मिलीभगत होने का संदेह

अंबिकापुर से महज आठ किलोमीटर दूर भकुरा और केपी गांव स्थित सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर की पहाड़ियों में मशीन लगाकर पत्थरों का अवैध खनन किया जा रहा है। बेतरतीब माइनिंग के कारण पहाड़ी की सुंदरता खत्म होती जा रही है। खनिज विभाग ने यहां जिस स्थान पर माइनिंग की अनुमति दी है उसे छोड़कर दूसरे स्थानों में खुदाई की जा रही है। बता दें कि पत्थर निकालने के दौरान पिछले साल एक मजदूर की भी मौत हो गई थी। लेकिन खनिज माफिया के आगे पुलिस भी नतमस्तक रही और किसी के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई। दैनिक भास्कर ने सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर जाने वाली पहाड़ियों के बीच बने रोड के दोनों किनारे चल रहे अवैध पत्थर खदानों का जायजा लिया तो खुलासा हुआ कि यहां से पत्थर क्रेशर में भेजा जाता है जहां पत्थरों के बड़े बोल्डर से गिट्टी तैयार की जाती है। यहां एक ट्रैक्टर ट्राली पत्थर लोड करने पर लोगों को दो सौ रुपए दिए जाते हैं। वहीं ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पिछले सालों में कई बार की लेकिन अफसरों ने जांच तक नहीं की। ग्रामीणों ने बताया कि जांच के लिए अधिकारी पहुंचते हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती है। दैनिक भास्कर टीम ने पाया कि यहां की पहाड़ियों से हर रोज कम से कम 50 ट्रैक्टर ट्राली पत्थर निकाला जा रहा है।

पहाड़ी पर बनाया गया ट्रेनिंग सेंटर
केपी गांव में सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना के दौरान इस स्थल का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि पहाड़ी पर कैम्प के लिए उपयुक्त स्थल था, जहां पहाड़ी के टॉप पर ट्रेनिंग सेंटर को बनाया गया था। लेकिन अब ट्रेंनिग सेन्टर के नीचे उत्खनन से वहां की सुरक्षा और गोपनीयता पर भी असर पड़ सकता है, हालांकि अधिकारियों ने अपने कैम्प क्षेत्र में फेंसिंग कर रखा है। जबकि कैम्प से कुछ सौ मीटर दूरी में ही माइनिंग हो रही है।

दो खदानों के लिए ली गई है लीज
खनिज विभाग ने यहां पत्थर खदानों के लिए लीज दिया गया है लेकिन कई स्थानों से पत्थर निकाला जा रहा है। इसके लिए पहाड़ी में ही कच्ची सड़क बनाई गई है। जबकि माइनिंग एक्ट के तहत जिस प्लाट नम्बर पर खनन के लिए लाइसेंस दिया जाता है वहीं खनन किया जा सकता है। दूसरे स्थान पर खनन करने पर लाइसेंस निरस्त किया जाता है, लेकिन सालों से चल रहे बेतरतीब माइनिंग के बाद भी कार्रवाई नहीं किए जाने से खनिज विभाग के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठते हैं।

जवानाें ने मजदूरों को खदेड़ा था: पड़ताल में पता चला कि सीआरपीएफ जवानों ने अवैध व बेतरतीब खनन करने पर यहां से मजदूरों को खदेड़ा था उनके गेती और फावड़े जब्त किए थे, लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई नहीं की। इसके कारण सीआरपीएफ के जवान भी माफिया के खिलाफ कोई ठोस पहल नहीं कर सके।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
विरोध करूंगा तो लोग मेरे खिलाफ हो जाएंगे

"मैं नया सरपंच बना हूं, सालों से पत्थर निकाला जा रहा है। गांव वालों की रोजी रचल रही है, पत्थर निकालने के काम में मजदूरी करते हैं। पहाड़ी की हरियाली खत्म हो रही है, लेकिन क्या कर सकते हैं। विरोध करूंगा तो लोग मेरे खिलाफ हो जाएंगे।"
-मनोज कुमार सिंह पोया, सरपंच, परसा गांव

मुख्यमंत्री से करेंगे कार्रवाई की मांग
"अंबिकापुर शहर के आसपास जिले में पहाड़ियों में पत्थर निकालने अवैध खदानें चल रही हैं। इसमें लगे माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कलेक्टर और मुख्यमंत्री से की जाएगी। पहाड़ियों को काटा जा रहा है और अफसर खामोश हैं।"
-धीरेंद्र शर्मा, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता

नहीं होने दिया जाएगा अवैध खनन
"पत्थर और मुरम के अवैध खनन पर कार्यवाही के लिए माइनिंग के अधिकारियों की टीम गठित कर कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा।"
-संजीव कुमार झा, कलेक्टर, सरगुजा

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