80 फीसदी से अधिक स्कूलों की छत जर्जर:बच्चों को खतरा, दीवारों में दरार; पेड़ के नीचे या खुले में बच्चों को पढ़ाना मजबूरी

अंबिकापुर4 महीने पहलेलेखक: अंकित द्विवेदी
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पेड़ के नीचे लगी कक्षा। - Dainik Bhaskar
पेड़ के नीचे लगी कक्षा।
  • एक तरफ छत का प्लास्टर गिरने का डर तो दूसरी ओर पेड़ पर गाज से झुलसने की आशंका

लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद रहने के कारण जिले के अधिकांश स्कूल जर्जर हाे चुके हैं। करीब 80 प्रतिशत स्कूलों में तत्काल मरम्मत की जरूरत है। इनमें से 20 प्रतिशत स्कूल ऐसे भी हैं, जहां बैठाकर बच्चों को पढ़ाना खतरनाक साबित हाे सकता है। हाल ही में प्लास्टर गिरने से कई स्कूलों में घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिसमें एक बच्चा घायल भी हुआ है।

यह हाल तब है, जब सरकार की ओर से शाला अनुदान मद के तहत जिले के स्कूलों को हर साल करीब 5 करोड़ दिए जाते हैं। इसे मरम्मत के लिए भी खर्च करने की अनुमति होती है। अब हालत यह है कि कहीं पेड़ों के नीचे तो कहीं अन्य सरकारी भवनों में कक्षाएं लग रही हैं। जिले में 1329 प्राथमिक शाला और 564 माध्यमिक शालाएं हैं। लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद रहने के कारण अधिकांश स्कूलों की हालत जर्जर हो गई है। स्थिति यह है कि जिले के सभी स्कूलों को मरम्मत की जरूरत है। इसमें 80 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं, जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत महसूस हो रही है। वहीं 20 प्रतिशत स्कूलों में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना खतरनाक साबित हो सकता है। हाल ही में स्कूलों में हुए हादसे इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। इसके बाद भी अधिकारी अब तक अंजान बने हुए हैं।

स्कूल के भवनों में दरार
स्कूल के भवनों में दरार

हादसा होने के बाद शिक्षक करते हैं वैकल्पिक व्यवस्था

14 साल पहले बना स्कूल जर्जर
केस.1 लखनपुर ब्लाॅक अंतर्गत संकुल केंद्र गेतरा के प्राथमिक शाला गऊहानी पारा 14 साल पहले बना था। अब दीवारों में दरार आ गई हैं। अनहोनी के डर से शिक्षकों ने 1 हफ्ते से पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगानी शुरू की। गऊहानी पारा में 22 विद्यार्थी व 2 शिक्षक हैं। स्कूल के 4 कमरों में 2 से 4 फीट का छज्जा गिर गया। रविवार को हादसा होने से किसी को चोट नहीं आई।

प्लास्टर गिरने से छात्र हुआ घायल

केस2. विकासखंड उदयपुर अंतर्गत प्राथमिक शाला जजगा में स्कूल समय में ही छत के प्लास्टर का एक हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया। कक्षा में बैठे 5वीं के छात्र समीर के सिर पर छत का मलबा गिर गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे सीएचसी उदयपुर में इलाज के लिए भर्ती कराया है। छात्र के सिर पर तीन टांके लगाए गए हैं।

पंचायत भवन में कक्षाएं संचालित

केस.3 उदयपुर ब्लॉक के संकुल केंद्र लक्ष्मणगढ़ अंतर्गत मिडिल स्कूल में 27 छात्र और 4 शिक्षक हैं। यहां ग्रामीणों की सहमति से स्कूल खोला है, लेकिन स्कूल की जर्जर हालत को देख शिक्षकों व पालकों ने विभाग से मरम्मत कराने की अपील की। मरम्मत नहीं होने पर पंचायत से सहमति बनाकर पास की पंचायत भवन में कक्षाएं शुरू कराई हैं।

पेड़ के नीचे पढ़ाना हो सकता है खतरनाक, दुर्घटना की आशंका
बारिश के मौसम में पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगाना खतरनाक हो सकता है। जानकारों की मानें तो आकाशीय बिजली अक्सर पेड़ाें पर ही गिरती है। ऐसे में पेड़ों के नीचे पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी बारिश होने पर भीगने से बचने पेड़ों के नीचे ही खड़े हो जाएंगे। इससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

स्कूलों से मांगी है भवनों की स्थिति की रिपोर्ट: रविशंकर
सहायक परियोजना समन्वयक रविशंकर तिवारी ने बताया अधिकांश स्कूलों को मरम्मत की जरूरत है। प्रधान पाठकों काे शाला अनुदान मद से तात्कालिक मरम्मत कराने निर्देश दिए हैं। अधिक जर्जर भवन होने की स्थिति में शिक्षकों को निर्देशित किया है कि बच्चों को पास की पंचायत या अन्य सरकारी भवन में पढ़ाएं। पेड़ों के नीचे बच्चों को पढ़ाना गलत है। सभी स्कूलों से मरम्मत की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है, जिसे शासन के पास भेजकर फंड की मांग की जाएगी।

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