गम्हरिया और खरहरा सिंचाई योजना में गड़बड़ी:बिना काम ईई और वरिष्ठ लिपिक ने हड़पे 10 करोड़, 3 सदस्सीय टीम करेगी जांच

अंबिकापुर20 दिन पहले
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खरीदे गए पाइप को गम्हरिया के पास जंगल में रख दिया है, यहीं बनना था डैम। - Dainik Bhaskar
खरीदे गए पाइप को गम्हरिया के पास जंगल में रख दिया है, यहीं बनना था डैम।
  • मौके पर फावड़ा तक नहीं चला, पूरी राशि का भुगतान

बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर ब्लॉक में गम्हरिया जलाशय और खरहरा व्यपवर्तन योजना में निर्माण के नाम पर साइट पर एक फावड़ा तक नहीं चला और अफसरों ने 10 करोड़ रुपए हड़प गए। गड़बड़ी सामने आने के बाद जल संसाधन विभाग के सीई ने अधीक्षण अभियंता वीके खलखो के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल गठित की है।

मामले में जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 2 के ईई यूएस राम और वरिष्ठ लिपिक एसडी दुबे के खिलाफ बिना टेंडर के इन योजनाओं की राशि का अनियमित भुगतान कर गबन करने का उल्लेख है। दैनिक भास्कर ने सिंचाई योजनाओं में गड़बड़ी का मामला प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जांच शुरू हुई है। 8-10 साल पहले इन योजनाओं को मंजूरी मिली थी। अगर ये काम उसी समय हो गए रहते तो सैकड़ों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल जाता, लेकिन इतने वर्षों में काम भी शुरू नहीं हुआ। निर्माण के नाम पर साइट पर पाइप खरीदकर जंगल में रख दिया है।

जांच के लिए आदेश किया जारी: मुख्य अभियंता
मामले में मुख्य अभियंता एसके रवि ने बताया कि जांच के लिए आदेश जारी कर दिया है। तीन सदस्यीय टीम मामले की जांच के लिए नियुक्त कर दी गई है। जल्द ही मामले सच सामने आएगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी। टीम की रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।

दावे की खुली पोल: खरहरा से एक हजार हेक्टेयर में होनी थी सिंचाई
2012 में योजना की मंजूरी मिली थी। आसपास के गांवों में एक हजार हेक्टेयर रकबा सिंचित होना था। 6.28 करोड़ की मंजूरी थी। रजखेता गांव में खरहरा जलाशय के लिए काम होना था। ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे के दौरान बड़े-बड़े दावे किए गए थे, और कहा गया था कि खरीफ के अलावा रबी की खेती के लिए पानी मिलेगा, लेकिन अब तक काम ही शुरू नहीं हुअा। इस योजना को पूरा करने अफसरों ने कुल साढ़े 14 करोड़ मांगे हैं।

गबन पर पर्दा डालने एरिया बढ़ाकर 38 करोड़ मांगे, काम शुरू ही नहीं
यहां 2008 में गम्हरिया जलाशय के लिए मंजूरी मिली थी। 8 करोड़ रुपए इस योजना पर खर्च होने थे। डैम और नहर बनाकर खेतों तक पानी पहुंचाना था, लेकिन अबतक काम ही शुरू नहीं हुआ। साइट पर सिर्फ पाइप पड़े हुए हैं। गड़बड़ी सामने आने के बाद योजना को पूरा करने 38 करोड़ रुपए मांगे गए हैं, जिसमें एरिया बढ़ाने का जिक्र है, ताकि घोटाले पर सवाल न उठे।

अफसर ही उठाते हैं सवाल, रिवाइज इस्टीमेट की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए
योजनाओं में गड़बड़ी पर विभाग के ही अधिकारी सवाल उठाते हुए कहते हैं बिना काम कराए करोड़ों रुपए निकाल लिए और घोटाले को दबा सकें, इसलिए एरिया बढ़ना बताकर रिवाइज इस्टीमेट भेजा है, ताकि जो राशि निकाल लिए हैं, उसे अधिक राशि मिलने पर समायोजित किया जा सके। किसी योजना की स्वीकृति से पहले सर्वे होता है। ऐसे में रिवाइज इस्टीमेट की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

खुटपाली भी बदहाल करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं मिला पानी
12 साल में इस योजना पर 100 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए, लेकिन एक भी गांव को पानी नहीं मिला। नहर कहीं बह गई तो कहीं अधूरी पड़ी है। व्यपवर्तन में पानी ही नहीं रुकता। इससे 30 गांवों को पानी मिलना था। हद तो यह है कि इसे पूरा करने 70 करोड़ और मांगे गए हैं। इस योजना से 3052 हेक्टेयर में पानी मिलना था, जबकि फंड के लिए रिवाइज इस्टीमेट जो भेजा है, उसमें 43 सौ हेक्टेयर का जिक्र है। खुटपाली के लिए कन्हर नदी में व्यपर्वतन बनाकर पानी देना था। व्यपर्वतन से खेत तक 70 किलोमीटर नहर बननी थी।

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