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अनदेखी:40 साल बाद भी दो पंचायतों की रेलवे क्रासिंग को फाटक का इंतजार

बिश्रामपुरएक महीने पहले
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  • विश्रामपुर-भटगांव मुख्य मार्ग में बतरा गांव के समीप हैं 2 रेलवे क्रॉसिंग, हो रहे हादसे, विधायक बोले- कई बार बोला, सुनवाई नहीं

भास्कर न्यूज | बिश्रामपुर विश्रामपुर-भटगांव मुख्य मार्ग में बतरा गांव के समीप 2 मुख्य रेलवे क्रॉसिंग चंद्रमेढा व बतरा रेलवे क्रॉसिंग हैं। बच्चे हमेशा रेलवे ट्रैक के पास ही खेलते रहते हैं। इससे कभी भी अनहोनी हो सकती है। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की स्थापना बाद 41 वर्ष पूर्व क्षेत्र वासियों को रेलवे का सौगात मिला था पर आज चार दशक गुजरने के बाद भी इस पर पहल नहीं हुआ। इस रेलवे मार्ग पर रेलवे फाटक या आरयूबी न होने की वजह से अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। तो मवेशियों का मरना आम बात है। महज 100 मीटर दूरी पर स्थित शासकीय विद्यालय भी है। शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक सहित हायर सेकंडरी विद्यालय संचालित है। क्षेत्र के विधायक व संसदीय सचिव पारसनाथ रजवाड़े के गृह ग्राम बतरा से होते हुए रेल मार्ग गुजरते हैं। मुख्य स्टेशन प्रबंधक (करंजी) दीपक कुमार पॉल का कहना है कि अभी बताना मुश्किल है की कब तक फाटक का निर्माण होग़ा। रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के साकेत गुप्ता कह रहे हैं कि अब तक रेलवे द्वारा किसी भी प्रकार की कोई फाटक की स्वीकृति नहीं आई है।

2 बार मामला संज्ञान में लाया जा चुका: विधायक
क्षेत्रीय विधायक व संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े का कहना है कि एसईसीएल को कई बार संज्ञान में लाया जा चुका है। माइंस 1975 में स्थापित हुए, फिर 5 वर्ष बाद एसईसीएल को अपने निजी उपयोग के लिए रेलवे द्वारा रेल मार्ग की सौगात दी गई। तब से लेकर आज तक हमारे ग्राम के दो मुख्य रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक ना होना समझ से परे है।

सरपंच बोले - जीएम को कई बार बता चुके समस्या
बतरा सरपंच आनंद सिंह आर्मो का कहना है कि रेलवे मार्ग एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के लिए ही उपयोग किया जाता है। इसलिए हमने क्षेत्रीय विधायक से कई बार मौखिक चर्चा की है और विधायक एसईसीएल जीएम को कई बार बता चुके हैं। जिस पर एसईसीएल जीएम ने जल्द कार्य योजना बनाने की बात कही है। दोनों क्रॉसिंग में दर्जनों हादसे भी हो चुके हैं।

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