खेती में नुकसान / 5 हजार से 250 एकड़ में सिमटी आलू की खेती किसान बोले- महंगाई व कम उत्पादन से घाटा

Farmer said in 5 thousand to 250 acres of limited potato cultivation - losses due to inflation and low production
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Farmer said in 5 thousand to 250 acres of limited potato cultivation - losses due to inflation and low production

  • मैनपाट इलाके में एक दशक पहले 2 हजार किसान कर रहे थे आलू की खेती

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

अंबिकापुर. मैनपाट में एक दशक पहले 2000 किसान 5000 एकड़ में आलू की खेती करते थे। अब क्लाइमेंट बदला तो उत्पादन कम होने से किसानों को 100 करोड़ का घाटा हाेगा। तब एक एकड़ में जितना आलू का उत्पादन होता था। अब उसका आधा भी उत्पादन बमुश्किल हो रहा है। इस वजह से अब किसानों का मोह आलू की खेती से भंग हो गया है। किसान और आलू अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक इसकी वजह क्लाइमेट में बदलाव और खेतों की मिट्टी खराब होना बता रहे हैं।
यही वजह से साल दर साल आलू का रकबा कम होते जा रहा है। इस साल तो इन सबके बीच बाजार में आलू बीज का भाव दो गुना होने के कारण अधिकतर किसान खेती नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह से जहां पिछले साल 18 सौ एकड़ में खेती हुई थी। वहीं इस साल बड़े किसानों ने हाथ खड़े कर लिए हैं। इससे महज 100 एकड़ में ही खेती की संभावना है। एक दशक से आलू की खेती करने वाले तिब्बती किसान धुंधुप कहते हैं कि एक दौर था जब वे 10 एकड़ में आलू लगाते थे तो 800 क्विंटल से भी अधिक फसल होती थी, लेकिन अब तो महज 30 से 40 क्विंटल ही उत्पादन होता है। उन्होंने बताया कि इन दिनों आलू बीज 3 हजार रुपये प्रति क्विंटल है।  वहीं एक क्विंटल आलू को लगाने और उसके बाद उत्पादन लेने में दो हजार रुपए और लगते हैं।

फसल में 3 लाख का हुआ था नुकसान, इस बार नहीं करेंगे खेती
पिछले साल 400 क्विंटल आलू की खेती करने वाले रजनीश पांडे कहते हैं कि कम उत्पादन और सही रेट नहीं मिलने से उन्हें 3 लाख का नुकसान हुआ था। इस साल वे आलू की खेती नहीं कर रहे हैं। कहा कि जब वे आलू को बनारस सहित दूसरे राज्यों की मंडी में बेचने के लिए भेजते हैं तो वहां भी एजेंट लॉबिंग करते हैं।

अब यहां के किसानों के खेतों की मिट्‌टी की जांच कराई जाएगी
आलू अनुसंधान के केंद्र के वैज्ञानिक प्रताप सिंह का कहना है कि यहां की मिट्टी में लंबे समय से खाद डाली गयी है।  इसी के कारण आलू का उत्पादन कम हो रहा है। इसी के कारण जमीन की उर्वरा शक्ति पर असर पड़ा है। अब यहां के किसानों की खेतों की मिट्टी की जांच कराई जाएगी।
एक एकड़ में डेढ़ लाख का खर्च, बीज ही 60 हजार का 
मैनपाट में 5 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती बरसात के मौसम में होती थी। ऐसे में अगर एक हेक्टेयर में  बीस क्विंटल बीज लगाने पर 200 क्विंटल आलू का उत्पादन होता तो 20 रुपए किलो में 4 लाख का आलू होता और इस साल आलू बीज महंगा होने से डेढ़ लाख का खर्च आएगा। ऐसे में करीब ढाई लाख प्रति हेक्टेयर फायदा होता लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसकी वजह से दस साल पहले जिन खेतों में आलू पैदा होता था वे खाली पड़े हैं। इस खेती से जुड़े 2 हजार किसानों को करीब 100 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

खेत तैयार, पर बीज महंगा होने से नहीं कर रहे खेती
किसानों का कहना है कि इस साल आलू का बीज 30 रुपए है। कभी इतना महंगा नहीं था। इसके कारण खेती नहीं के बराबर कर रहे हैं। जबकि किसानों ने खेतों की तैयारी में गर्मी के दिनों में जमकर पैसा खर्च किया है। अब आलू की खेती वाली जमीन इस साल खाली रहेगी।

इस बार नहीं करेंगे खेती: इस तरह 5 हजार खर्च हो जाता है। वहीं आलू मात्र 5 क्विंटल से अधिक मिलने की उम्मीद नहीं है। 5 क्विंटल आलू भी तब 10 रुपए किलो के करीब बिकेगा। ऐसे में 5 हजार का ही होगा। इस साल कम रकबे में आलू की खेती करने की तैयारी में हैं, तो कई ने खेती भी करना छोड़ दिया है।

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