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भास्कर खुलासा:कोरोना से फर्स्ट व सेकंड ईयर की नहीं हुई परीक्षा, जिनकी हो रही उनका खर्च कम, फिर भी नहीं लौटा रहे बची फीस

अंबिकापुर2 महीने पहले
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  • 02 करोड़ परीक्षा फीस के रूप में सिर्फ फर्स्ट और सेकंड ईयर के छात्रों से मिला
  • 70000 नियमित व प्राइवेट विद्यार्थी इस साल यूनिवर्सिटी में हैं , 9 सौ व 11 सौ ली फीस
  • एसजीजीयू को परीक्षा फीस से मिले 11 करोड़ रुपए, बची फीस नहीं लौटाने केे मूड में प्रबंधन
  • 20415 विद्यार्थी फर्स्ट और सेकंड ईयर के हैं, जिनकी इस साल नहीं हो रही परीक्षा

राजेश सिंह | संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी को इस साल कई संकाय के नियमित और प्राइवेट छात्रों से परीक्षा शुल्क के रूप में 11 करोड़ राशि मिली है। कोरोना संक्रमण के कारण यूजी (स्नातक) के फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की परीक्षाएं भी नहीं हो रही हैं। फाइनल ईयर नियमित व प्राइवेट परीक्षार्थियों के सभी वर्ष के छात्रों की ऑनलाइन प्रश्न-पत्र भेजकर घर से ही परीक्षाएं कराई जा रही हैं।
देखा जाए तो फर्स्ट और सेकंड ईयर नियमित छात्रों की परीक्षा में कोई खर्च ही नहीं हो रहा है, जो परीक्षाएं हो रहीं, उनमें भी उत्तर पुस्तिका से लेकर अन्य खर्चों पर काफी बचत हो रही है, लेकिन यूनिवर्सिटी फिलहाल परीक्षार्थियों को ना तो फीस वापस करने के मूड में है और ना ही बची फीस को अगले साल की परीक्षा में समायोजित करने के तैयारी में है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यूनिवर्सिटी को परीक्षा शुल्क के रूप में ही इस साल करोड़ों रुपए बच जाएंगे। इस राशि का क्या उपयोग होगा, अभी फिलहाल पता नहीं है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि फीस वापसी का कोई प्रावधान नहीं है, क्योंकि परीक्षा की तैयारी में काफी राशि खर्च हो चुकी है और मूल्यांकन सहित अंकसूची और डिग्री पर व्यय होना है।

यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कहा- परीक्षा की तैयारी पर हो चुका ज्यादा खर्च, मार्कशीट व अन्य पर खर्च बाकी
इस तरह बच रही है परीक्षा शुल्क से राशि

यूजी फर्स्ट और सेकंड ईयर की परीक्षा नहीं हो रही हैं। इन पर सिर्फ अंकसूची व प्रमाण-पत्र पर खर्च होंगे। जिनकी परीक्षाएं हो रही हैं, उनको ऑनलाइन प्रश्न-पत्र भेजे जा रहे हैं। छात्र घर पर ही ए-फोर साइज पेपर पर उत्तर लिखेंगे। इसका खर्च वे खुद उठा रहे हैं। उत्तर पुस्तिका डाक से भेजेंगे। प्रश्न-पत्र व उत्तर पुस्तिका का खर्च बच रहा है। उड़नदस्ता टीम, परीक्षा में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों, ट्रांसपोर्ट आदि का खर्च नहीं हो रहा है।

22 से शुरू है ऑनलाइन पेपर से परीक्षा
यूजी फाइनल ईयर नियमित व प्राइवेट के सभी ईयर के छात्रों की परीक्षा 22 सितंबर से शुरू हो गई है। इसमें छात्रों को ऑनलाइन पेपर भेजे जा रहे है और वे घर से परीक्षा दे रहे हैं। पहले और दूसरे दिन यूजी के कई विषयों में 90 % छात्रों की उपस्थिति रही। यहां बता दें कि सिर्फ फर्स्ट और सेकंड ईयर में ही 20415 छात्र हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि यूनिवर्सिटी फीस की बची राशि का क्या करेगी?

फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर की घटाई फीस
संभाग के सबसे बड़े स्वशासी पीजी काॅलेज पीजी की परीक्षाएं खुद आयोजित करता है। प्रबंधन ने फाइनल ईयर को छोड़कर फर्स्ट, सेकंड सेमेस्टर वाले छात्रों की परीक्षा शुल्क कम कर दी है। प्रबंधन ने बताया कि फर्स्ट और अन्य सेमेस्टर के छात्रों से सिर्फ 500 रुपए ही परीक्षा शुल्क लिए जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें सिर्फ असाइनमेंट भेजना है, जबकि वार्षिक परीक्षा की फीस 1500 रुपए ली जाती है।

वार्षिक परीक्षा में इन कामों पर होता ज्यादा खर्च
1. प्रश्न-पत्र सेट करने और छपाई
2. उत्तरपुस्तिका की छपाई
3. पेपर व उत्तर पुस्तिकाओं का वितरण
4. परीक्षा में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों की फीस
5. हिंदुस्तान टीम का दौरा और उनकी फीस
6. उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन
7. अंकसूची व प्रमाण-पत्र की छपाई

नियमित व प्राइवेट छात्रों की अलग-अलग परीक्षा फीस
संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी अंतर्गत 84 कॉलेजों में नियमित और प्राइवेट छात्र के रूप में इस साल करीब 70000 विद्यार्थी हैं। यूजी के नियमित छात्रों से 900 से 1100 के बीच परीक्षा शुल्क लिया जाता है। प्राइवेट छात्रों की फीस 14 से 15 सौ के करीब है। इसी प्रकार पीजी की परीक्षा फीस 1400 से 1500 के आसपास है।

सीधी बात
विनोद कुमार एक्का, कुलसचिव, संत गहिरा गुरु यूनिवर्सिटी, अंबिकापुर

सवाल - कोरोना के कारण इस साल फर्स्ट और सेकंड ईयर की परीक्षा नहीं हो रही है, जिनकी हो रही है, उनमें भी उत्तर पुस्तिका आदि का खर्च नहीं हो रहा है, क्या बची फीस वापस होगी?
-परीक्षा फीस नीतिगत मामला है, परीक्षा की तैयारी पर काफी खर्च हो चुका है। फर्स्ट और सेकंड ईयर के कुछ पेपर हुए भी हैं। इसलिए पूरी फीस वापसी का सवाल ही नहीं है। इसके बाद भी शासन जो निर्णय लेगा उसका पालन होगा।
सवाल - परीक्षा शुल्क के रूप में कितनी राशि मिली होगी और कितनी खर्च हो चुकी होगी?
-करीब 11 करोड़ मिला होगा, खर्च कितना हुआ है, अभी बता पाना मुश्किल है, क्योंकि ऑनलाइन प्रश्न-पत्र, अंकसूची, डिग्री आदि पर खर्च होना है।
सवाल - ऑनलाइन से जो परीक्षा हो रही है, उसमें भी तो खर्च काफी काम हो रहा है। ट्रांसपोर्टिंग आदि का भी खर्च बच रहा है, इसे अगले साल की फीस में समायोजित कर सकते हैं?
-शासन जो भी निर्णय लेगा उसका पालन किया जाएगा।

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