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आय से अधिक 90 लाख की संपत्ति:जल संसाधन विभाग के ईई राम के खिलाफ अभियोजन के लिए सरकार ने दी मंजूरी

अंबिकापुर12 दिन पहले
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  • राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण व एंटी करप्शन ब्यूरो ने अभियाेजन के लिए मांगी थी मंजूरी, 2016 में ब्यूरो की टीम ने की थी कार्रवाई

आय से अधिक संपत्ति के मामले में राज्य सरकार के विधि और विधाई कार्य विभाग ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जल संसाधन संभाग क्रमांक 2 के कार्यपालन अभियंता उमाशंकर राम के खिलाफ अभियोजन के लिए मंजूरी दे दी है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण व एंटी करप्शन ब्यूरो ने 2016 में मामले में कार्रवाई करते हुए ईई के खिलाफ केस दर्ज किया था, लेकिन सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामले में चालान पेश नहीं हो रहा था। अब मंजूरी मिलने के बाद यह रास्ता साफ हो गया है।

मामले में जब ईई पर केस दर्ज हुआ था, तब 90 लाख रुपए से अधिक अनुपातहीन संपत्ति पाई गई थी। मामले में अभियोजन के लिए मंजूरी से संबंधित जो पत्र जारी हुआ है, उसमें बताया गया है कि ईई और उनके परिवार की कुल आय 3 करोड़ 78 लाख 80 हजार रुपए, जबकि कुल व्यय 4 करोड़ 69 लाख 13 हजार से अधिक था। इस तरह से आय की तुलना में व्यय को घटाने पर 90 लाख 33 हजार रुपए अनुपातहीन संपत्ति पाई गई थी। ब्यूरो ने मामले में 50 से अधिक लोगों को गवाह बनाए हैं।

रायपुर की टीम ने की थी कार्रवाई: ईई उमाशंकर राम के खिलाफ शिकायत पर ब्यूरो की टीम ने कार्रवाई की थी। मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण व एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर के निरीक्षक थाना प्रभारी केएस मिंज ने 22 अप्रैल 2016 को अपराध क्रमांक 36/2020 /धारा 13 (1)ई, 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। ईई उमाशंकर राम बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक के कमारी के रहने वाले हैं।

अनुपातहीन चल, अचल संपत्ति के आधार पर अभियोजन के लिए मंजूरी
ईई के खिलाफ अभियोजन के लिए विधि और विधाई कार्य विभाग के अतिरिक्त सचिव सुनील कुमार नंदे के हवाले से जारी पत्र में कहा है कि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण व एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा विवेचना के दौरान संकलित किए गए साक्ष्य व कागजात अनुसार आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में ईई द्वारा अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अत्याधिक असमानुपातिक चल-अचल संपत्ति अर्जित कर अपराध किया है।

इधर सिंचाई योजना में भ्रष्टाचार के मामले में भी दर्ज है 420 का केस
जल संसाधान विभाग के ईई उमाशंकर के खिलाफ कई सिंचाई योजनाओं में गड़बड़ी की जांच चल रही है। वाड्रफनगर व रामचंद्रपुर इलाके में मनरेगा के तहत सिंचाई योजना में गड़बड़ी के मामले मंे रामानुजगंज थाने में 420 का केस दर्ज है। मामले में चार और कर्मचारी हैं। जांच में दोनों योजनाओं में गड़बड़ी उजागर होने के बाद एफआईआर्र दर्ज हुई है। मामले में कार्रवाई नहीं हुई है। उमाशंकर राम लंबे समय से बलरामपुर जिले में पदस्थ हैं।

100 करोड़ की योजना में क्षतिग्रस्त हुई नहर, इसमें भी ठहराया जिम्मेदार
करोड़ों की खुंटपाली सिंचाई योजना की नहर क्षतिग्रस्त होने के लिए भी ईई उमाशंकर राम को जिम्मेदार ठहराया था। उमाशंकर कोरिया जिले में पदस्थ थे और यहां का भी उन्हें अतिरिक्त प्रभार दिया था। सौ करोड़ से अधिक इस योजना पर खर्च हो चुके हैं, लेकिन सिंचाई के लिए खेतों में पानी नहीं पहंुचा। नहर क्षतिग्रस्त होने के लिए जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख अभियंता ने उमाशंकर सहित 3 इंजीनियरों को जिम्मेदार ठहराया था।

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