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नए तरीके से दलाली:बॉर्डर पर सख्ती हुई तो किसानों से बिचौलिए 12 रुपए प्रति किलो में खरीद रहे धान, 15 में मिलर को बेच रहे

अंबिकापुर2 महीने पहले
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  • गिरदावरी रिपोर्ट में त्रुटि वाले किसानों से धान खरीदते हैं बिचौलिया, किसानों काे प्रति क्विंटल 13 सौ का घाटा

लव दुबे | पड़ोसी राज्य यूपी से छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में बिचौलियों द्वारा धान खपाने के खुलासे के बाद बाॅर्डर को अलर्ट कर दिया गया है। चौबीस घंटे बाॅर्डर कड़ी निगरानी में है। स्थिति यह है कि वन मार्गों को भी गड्‌ढे खुदवाकर बंद कर दिया गया है ताकि किसी हाल में इस रास्ते से धान पार न हो सके। इस बीच बिचौलियों ने गड़बड़ी का रास्ता बंद हुआ तो धान के लिए छत्तीसगढ़ के झारखंड और यूपी बाॅर्डर से लगे गांवों में बड़ा बाजार बना लिया। गिरदावरी रिपोर्ट जिन किसानों की सही तरीके से तैयार नहीं हुई या बैंक के कर्जदार हैं ऐसे किसान बिचौलियों से धान बेच रहे हैं। गांव में बिचाैलिए 10 से 12 रुपए किलो धान खरीद रहे कर राइस मिलों में 15 रुपए किलो बेच रहे हैं। केवल दो ब्लाॅकों वाड्रफनगर और रामचंद्रपुर ब्लाॅक से हर रोज दस लाख रुपए से अधिक की 40 ट्रक धान का बिचौलिए रोज कारोबार कर रहे हैं। इससे पहले 12 रुपए किलो में धान बिचौलिए पड़ोसी राज्य से खरीद कर यहां लाते थे और सरकारी लापरवाही के कारण अब उन्हें इसी रेट पर अब यहां धान मिल जा रहा है। धान लेकर राइस मिल जा रहे एक ट्रक चालक से हमने पूछा तो बताया कि जांच में पकड़े गए तो मंडी टैक्स पटा दिए नहीं तो मिलों में धान पहंुच जा रहा है। किसानों के लिए 10 से 12 रुपए किलो में धान बेचना मजबूरी है क्योंकि गिरदावरी में त्रुटि के कारण समितियों में उनका धान नहीं बिक पाएगा। सरकारी समितियों में धान बेचने पर किसानों को 25 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है और इस तरह से सीधे 13 रुपए प्रति क्विंटल किसानों का नुकसान हो रहा है। यह हाल पूरे जिले में है। अधिकारी कह रहे हैं कि वे कुछ इसमें नहीं कर सकते क्योंकि सरकार का यही नियम है। अधिकारी मानते हैं कि गिरदावरी में त्रुटि हुई है। अगर दो गांवों में किसानों की जमीन थी और पटवारी अलग-अलग थे तो एक ही गांव का पंजीयन हो पाया। ऐसे में किसान बिचौलियों को धान नहीं बेचे तो कहां जाएं। पटवारी खेतों में गिरदारी रिपोर्ट तैयार करने नहीं जाते हैं जिससे रिपोर्ट सही तैयार नहीं हो पाती।

एक लाख हेक्टेयर में खेती और आधे का ही पंजीयन
सरगुजा जिले में 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी, लेकिन बिक्री के लिए 53 हजार हेक्टेयर का ही पंजीयन हुआ है। 38 हजार किसानों का इस बार धान बेचने के लिए पंजीयन हुआ है। इसी तरह से बलरामपुर जिले में 44 हजार हेक्टेयर जबकि सूरजपुर जिले में 61 हजार हेक्टेयर का धान बिक्री के लिए पंजीयन हुआ है। सभी जिले में कुल खेती के रकबे का आधे एरिया का ही धान बिक्री के लिए पंजीयन हुआ है।

सरगुजा जिले में किसानों की संख्या बढ़ी, रकबा घटा
सरगुजा जिले में पिछले साल 33 हजार 352 किसानों का 53570 हेक्टेयर का पंजीयन हुआ था, जबकि इस बार 38023 किसानों का 53347 हेक्टेयर का ही पंजीयन हुआ है। बलरामपुर जिले में पिछले साल 28 हजार 369 किसानों का पंजीयन हुआ था जबकि इस बार 32483 किसानों का पंजीयन हुआ है। सूरजपुर में पिछले साल 35920 किसानों का पंजीयन हुआ था जबकि इस बार 42 हजार किसानों का पंजीयन हुआ है।

किसानों ने कहा- इस बार रकबा जीरो कर दिया
वाड्रफनगर निवासी अनिल कुशवाहा ने बताया कि एक हेक्टेयर में धान की खेती की थी। पिछले साल 75 क्विंटल धान बेचा था। इस बार बेचने के लिए पंजीयन हुआ उसमें रकबा जीरो कर दिया गया। सौ क्विंटल धान हुआ लेकिन समिति में बेच नहीं पा रहे हैं। कई बार समिति के चक्कर लगा चुके हैं। एसडीएम और तहसीलदार को भी आवेदन दिया। आश्वासन दिया था कि जांच कर संशोधन किया जाएगा लेकिन अभी तक नहीं हुआ।

180 क्विंटल धान की हुई है पैदावार पंजीयन 20 क्विंटल का: किसान
वाड्रफनगर निवासी किसान रघुनाथ ने बताया कि 180 क्विंटल धान हुआ है लेकिन मात्र 20 क्विंटल का ही पंजीयन हुआ है। गिरदावरी में त्रुटि के कारण रकबा कम हो गया। तहसील कार्यालय में आवेदन दिए हैं, लेकिन अभी तक संशोधन नहीं हुआ है। ऐसे सैकड़ों किसान हैं जो आवेदन देकर तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। किसान ऐसे में बिचौलियों से औने-पौने दाम पर धान बेच रहे हैं।

कलेक्टर बोले- जिन किसानों का धान नहीं बिक पा रहा है वे मुझे बताएं
बलरामपुर कलेक्टर श्याम धावड़े ने कहा कि जिन किसानों ने रकबा संशोधन के लिए आवेदन दिया है ऐसे किसानों का जांच कराकर रकबा संशोधन किया जा रहा है। कई ऐसे भी आवेदन आते हैं कि आवेदन धान की खेती करना बताया जाता है लेकिन जांच में पता चलता है कि दूसरे फसलों की खेती हुई है। कोई किसान बिचौलियों के झांसे में न आएं। अगर कोई किसान परेशान हैं तो सीधे मुझे बताएं।

सीएम के निर्देश भी बेअसर: सीएम के निर्देश के बाद गिरदावरी की त्रुटि में सुधार नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि समितियों में जाने पर अधिकारी उन्हें चोर की तरह व्यवहार करते हैं। पिछली बार धान खरीदी से पहले सख्ती बरती गई थी और बिचौलियों के धान जब्त कर लिया गया था लेकिन इस बार बाजार खुला हुआ है।

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