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गड़बड़ी:रामानुजगंज में 5 साल में 500 एकड़ जमीन माफियाओं ने 200 करोड़ में बेच दी, अब सरकारी बिल्डिंग बनाने नहीं मिल रही जगह

अंबिकापुरएक महीने पहले
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  • अधिकारियों की सांठगांठ से बेशकीमती जमीन पर किया कब्जा, पटवारी और अफसर बोले-राजनीतिक संरक्षण से ऐसा हुआ

छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित रामानुजगंज में पांच साल के भीतर करीब पांच सौ एकड़ से अधिक सरकारी जमीन पर कब्जा कर लोगों ने मकान बना लिए हैं। इस जमीन को लोगों ने माफियाओं से 45 हजार डिसमिल में खरीदा है। इस तरह 500 एकड़ जमीन को माफियाओं ने पांच सात साल में दो सौ करोड़ में बेच दिया। कब्जा करने वालों में नगर पंचायत के कर्मचारी भी शामिल हैं। वहीं कई जगहों पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर बेचा गया है। इसके लिए स्टांप पेपर में नोटरी भी कराया गया। हद तो यह है कि यहां पांच किलोमीटर लंबी जल संसाधन विभाग के नहर को पाटकर कब्जा कर मकानों का निर्माण कर लिया गया है। इतना ही नहीं वेटनरी अस्पताल परिसर में 10 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा हुआ तो यही हाल जिला जेल के पीछे करीब 24 एकड़ सरकारी जमीन थी जो अवैध प्लाटिंग का भेंट चढ़ गई। इसके बाद भी राजस्व और नगर पंचायत के अधिकारी राजनीतिक दबाव और जेब भरने के चक्कर में कार्यवाही नहीं कर सके। इसका खुलासा रामानुजगंज में 15 दिन पहले तक पटवारी रहे सिंह में दैनिक भास्कर से रिकॉर्डेड बातचीत में किया। दैनिक भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि रामानुजगंज में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं के दबाव में अधिकारी कर्मचारी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सके। अतिक्रमण के पीछे राजनीतिक संरक्षण की बात को राजस्व विभाग के कर्मी भी स्वीकार कर रहे हैं। यही वजह है कि जब वे दबाव में कार्यवाही नहीं कर पाते हैं तो कब्जा दिलाने के नाम पर उगाही शुरू कर देते हैं, साथ ही भूमाफिया कब्जा कर खरीदी बिक्री भी कराने लगे। हालात अब यह है कि रामानुजगंज में पांच साल में जहां पांच सौ एकड़ जमीन पर कब्जा हुआ वहीं इससे अधिक मकान बन गए।

सरकारी जमीन में कब्जा से शहर का विकास हुआ प्रभावित
1. रामानुजगंज में सही लोकेशन में सरकारी प्लाट नहीं मिलने से पालीटेक्निक काॅलेज का निर्माण नगर में नहीं हो सका। इसकी वजह से कालेज भवन को आरागाही गांव में बनाना पड़ा।
2. आईटीआई भवन का निर्माण शहर में होना था लेकिन सरकारी जमीन नहीं मिलने से आईटीआई भवन को चोरपहरी गांव में बनाना पड़ा। जबकि वह भी रामानुजगंज के नाम पर स्वीकृत हुआ था।
3. नगर पंचायत में इंडोर स्टेडियम का भवन प्रस्तावित है। इसके लिए भी जगह नहीं मिल सका है। इससे इसके स्वीकृत होने पर इसका निर्माण भी शहर में नहीं हो सकेगा और किसी गाँव में निर्माण होगा। 4. नगर में चाइल्ड पार्क का निर्माण प्रस्तावित किया गया है ताकि बच्चों का मनोरंजन हो सके लेकिन इसके लिए भी सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं दिख रहा। ऐसे में इसका निर्माण कहाँ होगा, अधिकारी जगह चयनित नहीं कर सके हैं।
5. स्लाटर हाउस और गोठान के लिए किसी तरह जगह तलाश कर निर्माण का प्लान तैयार किया गया लेकिन वहां भी कब्जा है। अब नगर पंचायत के अधिकारी कब्जा खाली कराने राजस्व विभाग के अफसरों से मांग कर रहे हैं।

जहां की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ

  • पशु चिकित्सालय परिसर में 12 एकड़ मिला था। अब यहां एक एकड़ के करीब को माफियाओं ने बचाया है। 11 एकड़ में कब्जा कर मकान बने हैं।
  • जिला जेल के पीछे 24 एकड़ सरकारी जमीन है। यहां पूरी तरह कब्जा हो गया। करीब 100 से अधिक मकान बने हुए हैं।
  • रिंग रोड में वार्ड एक से नदी तक तक 100 एकड़ से अधिक में कब्जा है। यहां रिंग रोड़ बनने के साथ ही कब्जा शुरू हुआ। दर्जनों मकान बने, कब्जा कर माफियाओं ने बेचे।
  • जल संसाधन विभाग के पांच किलोमीटर लंबे नहर को पाट दिया गया। यहां 200 एकड़ से अधिक जमीन थी। 2005 में यह नहर टूट गई, मरम्मत की जरूरत थी, जो नहीं हुआ। इसके बाद कब्जा हो गया। नहर से बोहला बांध का पानी कन्हर नदी में मिलता था।
  • पहाड़ी मंदिर के पास के पास करीब 20 एकड़ में कब्जा कर मकान बनाया गया है। कार्यवाही नहीं होने से कब्जे की जमीन की खरीद बिक्री चालू है।

हमारे कर्मचारियों की मिलीभगत मिली तो होगी कार्यवाही
"अतिक्रमण हटाया जा रहा है। अगर इसमें हमारे कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप है तो शिकायत पर जांच कराई जाएगी। कब्जा के कारण नगर पंचायत के गोठान का भी काम प्रभावित है। मैं जनवरी में ही यहां आया हूं तो ज्यादा नहीं बता सकता, यह जरूर है कि कब्जा हटाने की कार्यवाही जारी रहेगी, नगर पंचायत से हम राजस्व विभाग को पूरा सहयोग देंगे।"
-सुमित मेहता, सीएमओ, नगर पंचायत

कार्यवाही में देरी होने से माफिया हो रहे प्रोत्साहित
"रामानुजगंज में में डेढ़ साल रहा। वहां कब्जा हुआ है। लोग रातोरात मकान बना लेते हैं। 39 लोगों के कब्जे के बाद निर्माण पर कार्यवाही के लिए प्रतिवेदन बनाकर तहसील में दिया गया है। लेकिन तत्काल कार्यवाही नही होने से लोग कब्जे के लिए प्रोत्साहित होते हैं। पैसा और राजनैतिक दबाव के कारण ऐसी स्थिति है।"
-विमलेश सिंह, तत्कालीन पटवारी

पहले के अधिकारियों कर्मचारियों की लापरवाही से हो गए कब्जे
"रामानुजगंज में जहां जहां अवैध कब्जा कर मकान या दूसरा निर्माण हुआ है, उसे हटाया जाएगा। दो तीन बाद कार्यवाही की जाएगी। बेशकीमती जगहों पर लोगों ने कब्जा किया है। पहले ही ध्यान दिया गया होता तो आज ऐसी हालत नहीं होती।"
-विवेक चंद्रा, डिप्टी कलेक्टर

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