मौतों के बाद भी अंधविश्वास पर भरोसा:एक गांव में 6 लोग इलाज कराने के बजाय झाड़फूंक करा रहे

अंबिकापुर9 महीने पहले
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पंडो जनजाति की बीमार महिला। - Dainik Bhaskar
पंडो जनजाति की बीमार महिला।
  • पंडो जनजाति के मृत लोगों के परिजन तक मेडिकल काॅलेज से पहुंची डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम

बलरामपुर के रामचंद्रपुर ब्लाॅक के पलगी गांव में इलाज के अभाव में पंडो जनजाति के दो लोगों की मौत के बाद भी गांव में 6 लोग बीमार होकर अस्पताल जाने की बजाय झाड़फूंक करा रहे हैं। इससे उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। पंडो जनजाति के अध्यक्ष उदय पंडो ने बताया कि पलगी गांव में रामजग पण्डो पिता हरदेव पण्डो, सोहर पण्डो पिता रतु पण्डो 40 वर्ष, बसंती पण्डो पति सोहर पण्डो 38 वर्ष, सरिता पण्डो पिता सोहर पण्डो, सुनीता पण्डो पति विजय पण्डो 30 वर्ष व बसमतिया पण्डो पति रतु पण्डो 50 वर्ष काफी समझाइश के बाद अस्पताल जाने को तैयार हुए हैं।

इन्हें सर्दी-खांसी और बुखार है। इस गांव में बालदेव पण्डो पिता ठुरचु 50 वर्ष व रतु पण्डो पिता चैतु पण्डो 60 वर्ष की मौत हो चुकी है। इसी तरह ग्राम पंचायत ओरंगा में कमला पंडो 30 वर्ष गंभीर रूप से कुपोषित है। उसकी तबीयत काफी समय से खराब है। इसके शरीर में कमजोरी है और ठीक से चल भी नहीं पा रही है। उसने बताया कि शरीर व हाथ पैर में बहुत दर्द होता है और चक्कर आता है और लंबे समय से झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी से इलाज करा रहे हैं, क्योंकि अस्पताल जाने पैसा नहीं है। इनके दो 2 बेटे और 4 बेटियां हैं। वहीं फिलहाल उन्हें अस्पताल भर्ती कराया है।

गरीबी के कारण बंद की थी आठवीं के बाद से पढ़ाई
ओरंगा निवासी 14 वर्षीय अशोक पण्डो 8वीं पास हो गया है, लेकिन गरीबी के कारण आगे का पढ़ाई बंद कर दी है। अब घर चलाने बकरी चरा रहा है, तो वहीं उसकी बहन प्रमिला पण्डो कक्षा 5वीं पास कर बीमार मां कमला पंडो की देखरेख कर रही है। इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का भी लाभ नहीं मिल सका है और पीने के पानी की भी समस्या है। इसकी जानकारी उदय पंडो को मिली तो उन्होंने अफसरों से बात की और अशोक को सनावल छात्रावास में रहने व पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई। वहीं प्रमिला का गांव के स्कूल में कक्षा 6वीं में एडमिशन कराया है।

जानने की कोशिश... किस जड़ी-बूटी से इलाज कराते हैं
पंडो जनजाति के लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं की वजह से मौत की घटनाओं के बाद अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज से डाक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम दोलंगी व बरवाही व सिलाजू गांव में पंडो जनजाति के तीन मृतकों के परिजन के बीच पहुंच कर उनसे स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे मे पूछा। वहीं उन परिवारों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे पानी का भी सैंपल लिया है। यह भी जानने की कोशिश की गई कि वे किन जड़ी-बूटी का उपयोग करते हैं।

बच्चों की नहीं रुकेगी पढ़ाई, कराया एडमिशन
दोलंगी निवासी मृतक लखन पंडो के बेटे बीरेंद्र पंडो को बालक छात्रावास सनावल में रहकर वहां के मिडिल स्कूल में क्लास आठवीं की पढ़ाई करेगा। इसके अलावा जितेंद्र पण्डो दूसरा बेटा कामेश्वर नगर के सरकारी आश्रम में रहकर क्लास चौथी में पढ़ेगा। इन दोनों बच्चों के पिता व दो भाइयों की मौत 14 अगस्त से 17 अगस्त के बीच हुई थी। इसके बाद पंडो समाज के अध्यक्ष उदय पंडो ने सरकार से इन दोनों की पढ़ाई-लिखाई की सुविधा की मांग की थी।

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