जगन्नाथ बरसाएंगे कृपा...:मां लक्ष्मी व मां विमला मंदिर बिना पोड़ी जगन्नाथ मंदिर अधूरा, 30 लाख की जरूरत

बैकुंठपुर/चिरमिरी4 महीने पहले
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मंदिर में रंग-रोगन कराना जरूरी है, क्याेंकि मंदिर का रंग धूल-डस्ट से फींका पड़ गया है। - Dainik Bhaskar
मंदिर में रंग-रोगन कराना जरूरी है, क्याेंकि मंदिर का रंग धूल-डस्ट से फींका पड़ गया है।

चिरमिरी के पाेड़ी जगन्नाथ मंदिर में मां विमला और महालक्ष्मी मंदिर बनाने जगन्नाथ सेवा समिति काे अब 30 लाख की जरूरत है। इन मंदिरों का निर्माण पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर किया जा रहा है। मंदिर के लिए स्वेच्छा दान, गुप्त दान के साथ बड़े स्तर पर चंदा जमा करने की तैयारी है।

मंदिर में रंग-रोगन कराना जरूरी है, क्याेंकि मंदिर का रंग धूल-डस्ट से फींका पड़ गया है। वहीं सफेद गुंबद पर काले डस्ट की परत बैठ गई है। बजट की कमी से मंदिर समिति निर्णय नहीं ले पा रही है। महंत सत्यानंद पुरी महाराज ने बताया एक प्रसंग महाप्रसाद से जुड़ा हुआ है। जब जगत स्वामी के व्यवहार से क्रोधित होकर मां लक्ष्मी उनके लिए धाम का द्वार बंद कर देती हैं और प्रभु खुद भाई संग प्रसाद तैयार करने जुट जाते हैं।

लेकिन महालक्ष्मी की क्रोध से वह भोजन बनाने में सफल नहीं होती। तब वे मां विमला और महालक्ष्मी का ध्यान करते हैं। यही कारण है कि महाप्रसाद पहले इन दो मंदिरों में अर्पण करते हैं। इसलिए जगन्नाथ मंदिर इन दो माता के मंदिरों के बिना अधूरा है।

जल्द ही बैठक में रखेंगे प्रस्ताव
श्री जगन्नाथ सेवा संघ के अध्यक्ष अभिराम व पूर्व अध्यक्ष बाबूराम ने बताया महालक्ष्मी व मां विमला मंदिर बनाने 30 लाख की जरूरत है। समिति पदाधिकारी आगे की कार्ययोजना को पूरा करने जल्द बैठक कर धनराशि के लिए प्रस्ताव सदस्यों के समक्ष रखेंगे।

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