नाबालिग पंडो की जबरन शादी:कुपोषित नवजात की हुई मौत, अस्पताल में पता चला 4 ग्राम ही था नाबालिग मां के शरीर में ​​​​​​​हिमोग्लोबिन

अंबिकापुर9 दिन पहले
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इलाज के दाैरान उसके बच्चे की जान चली गई। - Dainik Bhaskar
इलाज के दाैरान उसके बच्चे की जान चली गई।

बलरामपुर जिले में एक साल पहले पंडो जनजाति के किशोरी की शादी हुई थी। इस बीच वह गर्भवती हो गई और घर में उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन इसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों की हालत गंभीर देख उसे अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के दाैरान उसके बच्चे की जान चली गई।

वह बेहद कुपोषित था और जब नाबालिग मां का स्वास्थ्य जांच की गई तो पता चला कि उसके शरीर में सिर्फ 4 ग्राम हिमोग्लोबिन है। इसके बाद उसे तीन यूनिट हिमोग्लोबिन दिया गया, लेकिन एनएनसीयू में रखकर इलाज किए जा रहे नवजात को नहीं बचाया जा सका। बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर ब्लाॅक के ग्राम महादेवपुर निवासी रामसेवक पंडो 18 वर्ष का विवाह पिछले साल बबीता पंडो 16 के साथ हुआ था। बबीता के आधार कार्ड में उसका जन्मतिथि वर्ष 2005 है। बबीता पंडो ने बताया कि वह शादी नहीं करना चाहती थी, क्योंकि उसकी उम्र सिर्फ 16 साल थी, लेकिन उसकी मां और पिता ने जबरदस्ती शादी करवा दी। इसके बाद वह गर्भवती हुई तो उसे दो बार स्वास्थ्य जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था।

बच्चे को पहले दी जड़ी-बूटी फिर ले गए अस्पताल
15 दिन पहले ही प्रसव हुआ और उसने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ती गई। उसे जड़ी-बूटी दी गई, फिर भी स्वास्थ्य नहीं सुधरा और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका हिमाेग्लोबिन कम होने का पता चला तो उसे तीन यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। इससे उसकी हालत सुधरी और उसे अब अस्पताल से घर भेज दिया। वहीं कुपोषण से जूझ रहे उसके नवजात की अस्पताल के एनएनसीयू में मौत हो गई। उसे 29 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया था।

एक माह में दंपती की मौत
बलरामपुर के ही रामचंद्रपुर ब्लाॅक के बाहरचुरा पंचायत निवासी चरकी पंडो 70 वर्ष की मौत घर पर ही हो गई। इससे पहले एक माह पहले 6 सितंबर को उसके पति नान्हू पंडो की जान चली गई थी। मौत के पीछे की वजह बुखार और चेहरे में सूजन था। बता दें कि बलरामपुर जिला में पंडो जनजाति के लोगों की लगातार मौतों के बाद सरकार ने कलेक्टर तक को बदल दिया। इसके बाद नव पदस्थ कलेक्टर कुंदन कुमार पंडो व पहाड़ी कोरवा बस्तियों में घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में लगे हैं।

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