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हैवी ब्लास्टिंग से अनहोनी का डर:माइनिंग एक्सपर्ट बोले- कम ड्रिल में अधिक विस्फोटक से ब्लास्टिंग इसीलिए तेज कंपन से शुगर मिल पर खतरा

अंबिकापुरएक महीने पहले
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  • प्रतापपुर क्षेत्र के केरता में महान 3 कोयला खदान में ब्लास्टिंग से शुगर मिल पर खतरा

प्रतापपुर इलाके के केरता स्थित महान 3 कोयला खदान में ब्लास्टिंग से खदान से लगी शुगर मिल में दारारें आने लगी हैं। शुगर मिल के सामने कोयला खदान है। ब्लास्टिंग से होने वाले तेज कंपन का असर आसपास के घरों और सरकारी भवनों पर भी दिखने लगा है। हालत ऐसे हो गए हैं कि खदान से लगे 6 गांवों में लगे बोर धंस जा रहे हैं। ग्रामीण इसके खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। शुगर मिल प्रबंधन ने तो एसईसीएल पर हैवी ब्लास्टिंग का आरोप लगाते हुए सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग की है। इधर जब-जब आरोप लगते हैं एसीईसीएल के अधिकारी यह कहकर अपने बचाव में लग जाते हैं कि हैवी नहीं कंट्रोल ब्लास्टिंग करा रहे हैं। भास्कर ने माइनिंग के एक्सपर्ट से जाना कि आखिर कंट्रोल ब्लास्टिंग हो रही है तो इस तरह की समस्या क्यों आ रही हैं। एक्सपर्ट के अनुसार एक होल में विस्फोटक की मात्रा काफी ज्यादा होने पर कंपन तेज होता है।

अधिक उत्पादन के दबाव में मनमानी ब्लास्टिंग
पाॅलीटेक्निक कॉलेज के माइनिंग विभाग के एचओडी राजेंद्र तिवारी के अनुसार खदानों में ब्लास्टिंग से कई प्रकार की तरंगे उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों के कारण ग्राउंड वाइब्रेशन (जमीन का कंपन) होता है, जिससे आसपास की बिल्डिंग में दरारें आ जाती हैं। इसे रोकने डीजीएमएस डायरेक्टर जनरल ऑफ माइन सैफ्टी द्वारा समय-समय पर सर्कुलर निकाला जाता है और डीजीएमएस द्वारा ही खदान में ब्लास्टिंग की अनुमति दी जाती है। वर्तमान में अधिक उत्पादन के दबाव और लापरवाही के चलते इसका पालन नहीं होता। महान कोल माइंस के आसपास शुगर मिल और आवासीय परिसर में इसी कारण से दरारें आ रही हैं। इसका मुख्य कारण ब्लास्ट वाइब्रेशन निर्धारित मापदंड से अधिक होना है। वहीं अधिक वाइब्रेशन के पीछे ब्लास्ट होल की पंक्तियों के बीच विस्फोट में पर्याप्त डिले (समयावधि) का ना होना। ड्रिलिंग पैटर्न में गड़बड़ी होना, विस्फोटक के चार्जिंग में लापरवाही, निर्धारित मात्रा से अधिक विस्फोटक का उपयोग होना है।

ब्लास्ट वाइब्रेशन ज्यादा होने से पानी की समस्या होगी
ब्लास्ट वाइब्रेशन ज्यादा होने से वहां के भू-जल स्त्रोत के जलभृत में दरारें उत्पन्न होंगी, जिससे भू-जल नदी या नाले में मिलकर बह जाएगा और भविष्य में पानी की समस्या उत्पन्न होगी। वहीं इसके कारण बिल्डिंग के गिरने का खतरा हमेशा बना रहेगा।

कंट्रोल ब्लास्टिंग टेक्निक के उपयोग से नहीं होगी दिक्कत
एचओडी तिवारी ने बताया तकनीकी कारण होने की अवस्था में इस तरह की समस्या के समाधान के लिए ब्लास्टिंग पैटर्न में बदलाव हो। इसके लिए कंट्रोल ब्लास्टिंग टेक्निक का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें एक ब्लास्ट में विस्फोटक की मात्रा कम करने जैसे प्रयोग करने चाहिए।

ड्रिल होल की लाइन में टाइम मेंटेन होना चाहिए
2 या अधिक ड्रिल होल की लाइन के बीच की ब्लास्टिंग में कुछ मिले सेकंड का टाइम इंटरवल होना चाहिए, जैसे 25 मिली सेकंड या ज्यादा। ऐसा नहीं होने या इसमें गड़बड़ी होने से एक समय में अधिक एक्सप्लोसिव ब्लास्ट होता है, जिसके कारण ब्लास्ट वाइब्रेशन बढ़ता है।

कम ड्रिल में ज्यादा विस्फोट से तेज कंपन
कम ड्रिल होल में ज्यादा एक्सप्लोसिव जैसे ब्लास्ट डिजाइन, 8 मीटर गहराई और 32 मिलीमीटर डाइमेटर के 25-25 ड्रिल होल के 3 पैरलर कनेक्शन की लाइन है। काम में लापरवाही के चलते यदि 10 मीटर गहराई और 48 मिलीमीटर डाइमेटर के 30-30 होल के 2 पैरलर लाइन बना देने और एक होल में एक्सप्लोसिव की मात्रा काफी ज्यादा होने पर ब्लास्ट वाइब्रेशन उत्पन्न होगा।

110 करोड़ से शुगर मिल स्थापित, बाद में खुली खदान
केरता शुगर मिल एक दशक पहले शुरू हुई थी। तब इस पर 100 करोड़ खर्च हुए थे। प्रदेश में शक्कर उत्पादन के मामले में यह दूसरी बड़ी मिल है। करीब साल भर पहले यहां खदान शुरू हो गई। शुगर मिल के अधिकारियों का कहना है कि सबको पता है कि खदान के सामने मिल है और ब्लास्टिंग से दिक्कत होगी। कई बार इसकी शिकायत की गई है।

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