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टेंडर का पचड़ा:2 साल में नहीं लगी एमआरआई मशीन

अंबिकापुर11 दिन पहले
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  • मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में रोजाना जांच कराने 10 से अधिक मरीज आ रहे

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में एमआरआई मशीन लगाने का काम टेंडर के पचड़े में उलझकर रह गया है। इसके लिए पूरी राशि प्रशासन के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध करा रही है, लेकिन शासन द्वारा काम की माॅनिटरिंग की जिम्मेदारी सीजीएमएससी को दे दी गई।

कमेटी द्वारा मशीन की गुणवत्ता के मापदंड निर्धारित करने के बाद अब तक टेंडर का काम पूरा नहीं हो पाया है। मशीन के इस्टाॅलेशन पर करीब 7 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। टेंडर की प्रक्रिया में लगभग दो साल गुजर गए हैं। अब तो कालेज प्रबंधन अपने यहां पीजी में पढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए एनएमसी को आवेदन किया जाएगा। पीजी कोर्स में एमआरआई जैसी सुविधा कॉलेज में होनी जरूरी है। इन सबके अलावा अस्पताल में अभी हर रोज औसत 10 मरीज आ रहे हैं, जिनकी बीमारी की स्थिति का पता लगाने एमआरआई जांच की जरूरत पड़ रही है।

सिविल वर्क के साथ मशीन का इंस्टालेशन करेगी एजेंसी
एमआरआई मशीन के लिए ग्लोबल टेंडर होना है। इसमें जिस फर्म को ठेका मिलेगा, उसे मशीन के लिए भवन, बिजली का काम करना है। इसके बाद फर्म द्वारा मशीन का इंस्टाॅलेशन किया जाएगा। मशीन की गुणवत्ता व कई तरह की सुविधाओं के लिए कमेटी पर पूरी गाइड लाइन भी निर्धारित कर दी है, लेकिन टेंडर का काम अब तक नहीं हो पाया है। इससे मशीन नहीं लग पा रही है।

सीजीएमएससी करेगी काम
अस्पताल में एमआरआई मशीन की अब काफी जरूरत है। मशीन के लिए दो साल से पहल कर रहे हैं, लेकिन शासन ने सीजीएमएससी को काम की जिम्मेदारी दी है। मशीन के लिए डीएमई स्तर पर बनाई गई कमेटी ने स्पेशसिफिकेशन भी कर दिया है। अब टेंडर में क्यों देरी हो रही है यह मुझे पता नहीं है।
-डाॅ. लखन सिंह, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, मेडिकल काॅलेज अस्पताल, अंबिकापुर

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