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अफसरों की मनमानी:नहर बनाने मिली राशि में से डेढ़ करोड़ मुआवजा बांट दिया, काम अधूरा पड़ा, क्षेत्र में सूखे जैसे हालात

बैकुंठपुर/चिरमिरी(कोरिया)2 महीने पहले
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  • परियोजना पूरी होने पर 400 हेक्टेयर में किसान ले सकेंगे दोहरी फसल, एक हजार किसानों को मिलेगा लाभ

ब्लॉक खड़गवां के भुकभुकी में तीन गांव के एक हजार किसानों को सिंचाई का लाभ देने के लिए तैयार किये गए साजाखाण्ड जलाशय परियोजना में नहर लाइनिंग का काम तीन साल से ठप है। लघु सिंचाई परियोजना में 8 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है। लेकिन यहां बांध से नहर निर्माण का काम पूरा नहीं हो पाया है। विभागीय अफसरों ने अब नहर के लिए 16 करोड़ का डीपीआर भेजकर राज्य सरकार से राशि मांगी है। जल संसाधन विभाग की माने तो सिंचाई के लिए नहर निर्माण के लिए 8 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई थी, लेकिन इसमें नहर के मुआवजे में किसानों को करीब डेढ़ करोड़ रुपए बांट दिये गए है। अब रेट बढ़ने के कारण नहर का काम वापस शुरू कराने के लिए 16 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसमें कुछ बचे हुए किसानों की जमीन का मुआवजा भी दिया जाना है। तीन साल से नहर निर्माण अधूरा होने के कारण ग्रामीणों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने निर्माण समयावधि व सर्वे में नहरों के लिए ली जाने वाली जमीन का मुआवजा आंकलन किये बगैर ही शासन से इस परियोजना की स्वीकृति करा ली। जिस कारण अब किसान मुआवजा समेत अपने जमीन पर खेती करने के लिए तरस रहे हैं।

तीन गांवों के किसानों को मिलना है सिंचाई का लाभ
बता दें कि गोदरीपारा पहाड़ की तराई में बनने वाले इस परियोजना के पूर्ण होने से करीब 400 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई 5 किमी के परीधि में की जा सकती है। बांध से खासतौर पर भुकभुकी, भंडारदेई समेत आसपास के हजार किसानों को लाभ मिलेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शासन से राशि मंजूरी मिलते ही काम शुरू करेंगे।

रेट बढ़ना और मुआवजा बना परेशानी : एसडीओ
जल संसाधन एसडीओ अगस्तिन टोप्पो ने बताया कि बचे हुए कामों के लिए 16 करोड़ का डीपीआर राज्य सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू होगा। रेट बढ़ने के कारण व मुआवजा वितरण में राशि खत्म हो जाने से काम बंद है।

जलाशय के ये काम अब तक पड़े हैं अधूरेे
विभाग ने जलाशय के भारी क्षेत्र को बांधने, नहर बेस पाइप व किसानों को मुआवजा आदि में 8 करोड़ खर्च किए गए हैं। अब 16 करोड़ से यहां अन्य बचे कार्यों को पूरा किया जाना है। परियोजना में शुटफॉल का काम अधूरा है। वहीं नहर निर्माण का कार्य केवल भुकभुकी में शुरू हो सका है। नहर लाइनिंग का काम पूरा करने के साथ कुछ किसानों में मुआवजा राशि का वितरण किया जाना है।

नहर नहीं बनी, इसलिए गेट खोलकर पानी बर्बाद कर रहे
8 करोड़ खर्च करने के बाद जल संसाधन विभाग ने राज्य सरकार से दोबारा डीपीआर तैयार कर नहर निर्माण के लिए अतिरिक्त 16 करोड़ राशि की मांग की है। सरकार से राशि मंजूर मिलने के बाद ही अब नहर लाइनिंग का कार्य आगे शुरू हो सकेगा। नहर निर्माण नहीं होने से बांध में स्टोर पानी को व्यर्थ ही गेट से बहाया जा रहा है।

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