मेडिकल कॉलेज की जांच रिपोर्ट:पंडो जनजाति को नहीं मिलता पौष्टिक आहार और न साफ पानी, मरीजों की दिख रहीं पसलियां

अंबिकापुर4 महीने पहले
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सुंदरपुर का रमेश पंडो, अंबिकापुर में भर्ती। - Dainik Bhaskar
सुंदरपुर का रमेश पंडो, अंबिकापुर में भर्ती।
  • पंडो समेत अन्य जनजाति के लोगों के इलाज के लिए संभाग भर में जागरूकता व स्वास्थ्य कैंप लगाने की मांग

बलरामपुर जिले मे पंडो जनजाति के लोगों की मौतों का सिलसिला शुरू होने के बाद अफसरों की नींद खुलने लगी है। जिला अस्पताल में 24 पंडो जनजाति के लोगों को भर्ती किया गया। वहीं अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में 6 लोगों को भर्ती कराया गया है। इन मरीजों की पसलियां कुपोषण के कारण अलग से दिख रही है, जो सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत जागरूकता के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए की हकीकत बयां कर रही है।

दूसरी तरफ बलरामपुर सीएमएचओ ने मेडिकल काॅलेज से डाक्टरों की टीम बुलाकर गांव में कुपोषण की वजह की जांच कराई गई। जांच में साफ हुआ कि पंडो जनजाति के लोगों को पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा, और न ही साफ पानी। जागरूकता का भी अभाव है। यह बात जांच रिपोर्ट को देखने के बाद अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज के डीन डॉ. आर मूर्ति ने बताई। दूसरी तरफ सर्व विशेष पिछड़ी जनजाति समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष उदय पंडो ने संयुक्त संचालक से मांग की है कि शिविर लगाकर सभी पिछड़ी जनजातियों के लोगों का इलाज किया जाए, ताकि लोगों की मौत अब और न हो।

मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में भर्ती मरीज

  • सुंदरपुर निवासी 25 वर्षीय रमेश पण्डो पिता रूद्रलाल पण्डो का दोनों पैर जल गया था।
  • कुर्लाडीह निवासी 50 वर्षीय दुलारो पति रामदेव पंडो के पेट में सूजन है। जड़ी-बूटी से इलाज करा रही थी।
  • बिमलापुर की 50 वर्षीय मानकुंवर पति फजिहत पंडो को एक सप्ताह से बुखार था। वे झाड़-फूंक करा रही थीं।
  • पचावल निवासी 40 वर्षीय इंद्रमनिया पण्डो पति अयोध्या पण्डो काे बुखार और सिर में दर्द की शिकायत है। इनका भी झाड़-फूंक से इलाज कराया जा रहा था।
  • 30 वर्षीय हिरमनिया पण्डो पति महेंद्र पण्डो 5 माह से बीमार है, फिर भी इलाज नहीं करा रहे थे।

घटना के बाद हरकत में आता है विभाग
समाज के अध्यक्ष उदय पंडो ने बताया कि सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर जशपुर में पंडो, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार निवासरत हैं। पंडो विशेष पिछड़ी जनजाति के कई लोगों की मौत हुई है। ऐसे में जन-जागरूकता शिविर आयोजित कर पंडो जनजाति को जागरूकतापूर्ण सरकारी अस्पतालों में समय से इलाज कराने के लिए प्रयास किए जाएं। विशेष पिछड़ी जनजातियों की मौत को लेकर चिंतित हूं, क्योंकि जब अप्रिय घटना होती है, तब विभाग हरकत में आता है।

कर्मचारियों का न हो तबादला
बलरामपुर में सभी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को यथावत रखने की मांग लोगों ने की है। कहा गया है कि अधिकारियों- कर्मचारियों को बदलते हैं, तो समस्या बढ़ेगी, क्योंकि नए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी-अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति से अनभिज्ञ होंगे, जिससे पीड़ित पंडो परिवार को त्वरित चिकित्सा का लाभ नहीं मिल सकेगा।

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