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निरस्त होंगे पट्‌टे:महामाया पहाड़ पर लोगों ने पट्‌टे में मिली जमीन बेची

अंबिकापुर24 दिन पहले
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  • मामले का खुलासा होने के बाद 5 अधिकारियों की टीम ने शुरू की जांच

शहर की धरोहर महामाया पहाड़ पर अतिक्रमण करने के मामले में नया खेल सामने आया है। यहां पर वन अधिकार पट्टा पाने वाले लाभार्थियों ने स्टांप के माध्यम से अपनी पट्‌टे की जमीनों को किसी और के नाम कर दिया, जबकि वन अधिकार पट्‌टे के तहत मिली जमीन को किसी के नाम हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।

जमीन खरीदने वालों ने यहां पक्के मकान भी बना लिए हैं। इसके अलावा मामले में 4 साल पहले भी 737 लोगों को नगर निगम, राजस्व व वन विभाग ने बेदखली का नोटिस भेजा था। मुख्यमंत्री के आदेश पर एक बार फिर से शुरू हुई जांच के बाद कब्जेधारियों में हड़कंप मचा है। अंबिकापुर शहर के अंतिम छोर पर स्थित मां महामाया मंदिर के ऊपर वन संरक्षित क्षेत्र है, जो रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन है और इसी पहाड़ से लगी राजस्व की जमीन भी है। इस रिजर्व फॉरेस्ट और राजस्व भूमि पर करीब 15 सौ लोगों ने अतिक्रमण किया है।

2017 में तत्कालीन प्रभारी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के निर्देश पर तत्कालीन जिला प्रशासन ने 1 महीने में संबंधित विभागों राजस्व, नगर निगम व वन को निर्देशित करते हुए बेदखल करने के आदेश दिए थे। न्यायालय की शरण में जाने के बाद भी अतिक्रमणकारियों को राहत नहीं मिली। इसके बाद राजस्व विभाग से तहसीलदार के माध्यम से 143 लोगों, नगर निगम आयुक्त ने नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर मकान बनाने वाले 534 लोगों और वन मंडल अधिकारी ने रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर कब्जा कर रह रहे 60 लोगों को बेदखली का अंतिम नोटिस जारी किया था।

इसके बाद से राजनैतिक संरक्षण में यह प्रक्रिया ठप हो गई। हाल ही में पार्षद आलोक दुबे की शिकायत पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक बार फिर से जांच शुरू की गई है। इसमें कलेक्टर के आदेश पर 6 अधिकारियों की टीम जांच कर रही है।

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