हाल ए विकास:800 लोगों का सवाल- टैक्स दे रहे फिर ढोढ़ी का पानी क्यों पीना पड़ रहा, विकास के नाम पर 30 करोड़ से अधिक खर्च

अंबिकापुर2 महीने पहले
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नगर पंचायत प्रेमनगर में पंडो जनजाति के लोग रहते हैं लेकिन पानी के साथ सड़क, बिजली की सुविधा अब तक नहीं है। - Dainik Bhaskar
नगर पंचायत प्रेमनगर में पंडो जनजाति के लोग रहते हैं लेकिन पानी के साथ सड़क, बिजली की सुविधा अब तक नहीं है।

प्रेमनगर को नगर पंचायत बने दस साल से ऊपर होने को हैं, लेकिन अभी भी कई वार्डों में सड़क, बिजली व पानी की समस्या है। बस्ती से मुख्य मार्ग तक सड़क नहीं बनी है। इससे बारिश में लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। वार्ड क्रमांक 15 के लोग ढोंढी का पानी पीते हैं।

लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत से नगर पंचायत में शामिल करने के बाद टैक्स तो लाद दिया, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। चुनाव प्रचार में आ रहे नेताओं से लोग यही सवाल कर रहे हैं। नगर पंचायत चुनाव में यह बड़ा मुद्दा है। पिछले सालों में यहां डेवलपमेंट के लिए यहां 30 करोड़ खर्च हुए, लेकिन कई वार्डों में अब भी बदतर स्थिति है।

यहां सुविधाओं का अभाव
नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक एक, बारह, तेरह और पंद्रह में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है। नगर पंचायत बनने के बाद से यहां के लोग आवाज उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव आता है, नेता आश्वासन देते हैं, लेकिन फिर कोई झांकने नहीं आता है। समस्या लेकर जाते हैं तो कहते हैं फंड नहीं है, स्वीकृति का इंतजार है।

पंडो जनजाति की बस्तियों में समस्याओं का अंबार
नगर पंचायत प्रेमनगर के वार्ड क्रमांक के खैरडडिया में 30 वर्षों से पंडो जनजाति के लोग रह रहे हैं, लेकिन पानी के साथ सड़क, बिजली की सुविधा नहीं है। नगर पंचायत से यह इलाका चार किमी दूर जंगल में बसा हुआ है। यहां डेढ़ सौ लोग रहते हैं। इनमें सौ पंडो जनजाति के लोग हैं। यहां के लोगों को अब तक पगड़ंडी रास्ता ही मिला।

घाट कटिंग के लिए मिले बीस लाख रुपए
वार्ड की खैरडडिया बस्ती तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। घाट होने के कारण सड़क नहीं बन पा रही है। हाल ही में तीन करोड़ के विकास कार्यों के लिए मंजूरी मिली है, जिसमें बीस लाख रुपए घाट कटिंग के भी शामिल हैं।

हैंडपंप मंजूर हुआ तो दूसरी जगह लगा दिए
पिछले साल पंडो बस्ती के लिए एक हैंडपंप मंजूर हुआ, लेकिन वह भी नहीं लगा। कुछ लेागों ने दबाव बनाकर हैंडपंप दूसरी जगह लगा दिया। इसी तरह बिजली की समस्या बनी हुई है। सोलर पैनल के लिए सर्वे हुआ, लेकिन अब तक बिजली नहीं पहुंची। रात में घने जंगल होने के कारण जानवरों का डर रहता है। अंधेरे के कारण बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।

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