शिक्षा मंत्री प्रेमसाय के इलाके का हाल:​​​​​​​ सावित्रीपुर में चार साल से बरगद के पेड़ के नीचे लग रहा स्कूल, कोई सुनने वाला नहीं

अंबिकापुर2 महीने पहले
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बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते छात्र-छात्राएं। - Dainik Bhaskar
बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते छात्र-छात्राएं।
  • मंत्री से बोलीं छात्राएं- स्कूल में बैठने न कमरा न डेस्क, गिर रहा प्लास्टर, पेड़ के नीचे पढ़ रहे
  • कहा- सर, हमारे स्कूल में बैठने कमरे नहीं हैं, डेस्क-बैंच कम, एक बैंच पर 5-5 लोग बैठते हैं, बहुत दिक्कत हो रही

सर, हमारे स्कूल में बैठने के लिए कमरे नहीं हैं, डेस्क-बैंच नहीं होने से एक बैंच पर 5-5 लोग बैठते हैं। बहुत दिक्कत है सर, क्लास रूम का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। ऐसे में बरामदे में क्लास लगती है, कुछ कीजिए मंत्री जी। यह दर्द सूरजपुर जिले के प्रतापपुर इलाके के उच्चतर माध्यमिक स्कूल सिलौटा के छात्रों का है। शिक्षा मंत्री डाॅ. प्रेम साय से मुलाकात कर छात्र-छात्राओं ने उन्हें बताया कि उनके बैठने के लिए स्कूल में कमरा नहीं हैं। उन्हें बरामदे में बैठना पड़ रहा है, जगह के अभाव में एक डेस्क-बैंच में 4 से 5 छात्रों को बैठना पड़ रहा है। छत का प्लास्टर भी टूटकर गिर रहा है। कुछ माह पहले तो क्लास के अंदर पंखा टूटकर गिर गया था, लेकिन इस दौरान क्लास में कोई नहीं था, इसलिए बड़ा हादसा टल गया।

बच्चे स्कूल के प्रिंसिपल से आवेदन बनवाकर शिक्षा मंत्री के पास पहुंचे। इस पर मंत्री ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनके लिए डेस्क-बैंच और अलग से अतिरिक्त कमरा बनवाया जाएगा। शिक्षा मंत्री से मिलने वालों में सुमन गुप्ता, सुमन आयाम, प्रीति सांडिल्य, शांति, सुषमा, सुशीला, विश्वनाथ, राजेंद्र, कैलाश, इन्द्रप्रसाद सहित दूसरे छात्र भी मौजूद रहे।

बरतीखुर्द में 4 साल से पेड़ के नीचे लग रहा स्कूल

बलरामपुर जिले के विकासखंड वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत बरती खुर्द के आश्रित ग्राम सावित्रीपुर में 4 साल से बच्चे पुराने पीपल पेड़ के नीचे बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। जिस पेड़ के नीचे बच्चे पढ़ रहे हैं, वह पीपल का पेड़ लगभग 50 साल पुराना है। कभी भी उसकी टहनिया टूटकर नीचे गिरने का खतरा रहता है। इस पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी ललित पटेल का कहना है कि पिछले साल स्कूल भवन की मरम्मत कराई थी, लेकिन बेहतर तरीके से उच्च स्तर पर कार्य नहीं हो सका। बरसात का मौसम खत्म होने के बाद अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कराया जाएगा। वहीं फिलहाल पीपल पेड़ के नीचे चल रही कक्षाओं के लिए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी।

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