बढ़ाया हौसला:सीनियर डाॅक्टरों ने कोरोना मरीज के इलाज में रेमडेसिविर की अनिवार्यता नकारी, बताया- इसके बिना 8000 लोग ठीक हुए

अंबिकापुर6 महीने पहले
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  • चिकित्सकों ने कोविड के मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ती मांग को अनुचित बताया

अंबिकापुर के वरिष्ठ व आइएमए के सदस्य चिकित्सकों ने कोविड संक्रमण से प्रभावित मरीजों में रेमडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ती मांग को अनुचित बताते हुए कोरोना के इलाज के लिए अति आवश्यक होने के दावे को नकारा है। कोविड संक्रमण के प्रभावी रोकथाम के लिए दवाइयों के प्रति शारीरिक प्रतिक्रिया, फेफड़े में संक्रमण से हुई क्षति की मात्रा व शरीर के अंगों की क्रियाशीलता पर निर्भर करती है। रेमडेसिविर केवल वायरस के संक्रमण को कम कर सकता है।

संक्रमण के बाद हुई क्षति को दूर करने में इसका कोई योगदान नहीं होता। बिना रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग के पूरे सरगुजा में 8000 से अधिक मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। सीनियर डॉ. अमित असाटी ने बताया कि उनके संस्थान में लगभग 230 कोविड मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर गंभीर लक्षण वाले थे। इनमें से 200 से ज्यादा मरीज ऐसे हैं, जिनमें रेमडेसिविर इंजेक्शन का प्रयोग नहीं किया गया। यह कहना बिल्कुल गलत है कि रेमडेसिविर से कोविड मरीज की जान बच सकती है।

चिकित्सक डॉ. जेके सिंह ने बताया कि उनके अस्पताल में 500 से अधिक गंभीर प्रकृति के कोविड मरीजों का इलाज किया गया। इनमें लगभग 5 से 7 मरीजों की मौत हुई। इनमें रेमडेसिविर के प्रयोग के बावजूद भी मरीज को बचाया नही जा सका।

रेमडेसिविर शुरू के 7 दिन के अंदर लगना उचित

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के छाती आैर श्वसन तंत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रोशन लाल वर्मा व कोविड हॉस्पिटल के मुख्य प्रभारी अधिकारी ने बताया कि रेमडेसिविर का इंजेक्शन प्रारम्भ के 7 दिन के अंदर लगना उचित रहता है। यह ऐसे मरीज में लाभदायक होता है जिनका ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 से कम होता है। हम लोगों ने सफलतापूर्वक बहुत से गम्भीर लक्षण वाले कोविड मरीजों को बचाया है, जिनको रेमडेसिविर का इंजेक्शन नहीं लगा है।

जानिए क्या कहते हैं मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य गुप्ता

इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के सदस्य डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने रेमडेसिविर की अति आवश्यकता का खंडन किया। बताया आईसीएमआर, डब्लूएचओ आदि में से किसी ने भी रेमडेसिविर को कोविड के लिए एकमात्र दवाई नहीं बताया। रेमडेसिविर का उपयोग कोविड से संक्रमित के उपचार में किया जाता है। लेकिन यह कहना गलत है कि रेमडेसिविर से जान बचाई जा सकती है।

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