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कागजों पर करोड़ों खर्च:राष्ट्रपति के दत्तक पुत्राें को पानी तक नसीब नहीं पहाड़ चढ़कर 100 फीट खाई में ढोंढ़ी से रोज ढो रहे

अंबिकापुरएक महीने पहले
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नाराज ग्रामीण 6 महीने पहले बस्ती को नपं से ग्राम पंचायत में शामिल करने दे चुके धरना। - Dainik Bhaskar
नाराज ग्रामीण 6 महीने पहले बस्ती को नपं से ग्राम पंचायत में शामिल करने दे चुके धरना।
  • 10 साल पहले बनी नपं प्रेमनगर की पंडो जनजाति बस्ती खैरडड़ियां में सड़क, पानी और बिजली नहीं

ये तस्वीर किसी गांव की नहीं, बल्कि सूरजपुर जिले की नगर पंचायत प्रेमनगर की राष्ट्रपति के गोद पुत्र संरक्षित पंडो जनजाति के खैरडड़िया बस्ती की है। 10 साल पहले इस ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाया गया था, लेकिन पंडो जनजाति के लोगों को अब तक पीने के लिए साफ पानी नहीं मिला है।

पानी की समस्या का आलम यह है कि महिलाएं रोज पैदल पहाड़ चढ़कर करीब 100 फीट खाई में उतरती हैं, तब उन्हें ढोंढ़ी का पानी मिलता है। पहाड़ के नीचे ग्रामीणों ने गड्ढा खोद रखा है, जिसमें रिसकर पानी जमा होता है। महिलाएं जंगल और पहाड़ के कठिन रास्ते से सिर पर डेकची में पानी भरकर घर लाती हैं। उनकी बस्ती में पानी की सुविधा नहीं है। बारिश शुरू होते ही पानी दूषित हो जाता है, जो मजबूरी में लोगों को पीना पड़ रहा है, जिससे अभी से लोग बीमार होने लगे हैं। पिछले नपं चुनाव से पहले लोगों ने इस समस्या को लेकर 6 महीने इसलिए धरना दिया था कि उन्हें फिर से ग्राम पंचायत में शामिल किया जाए। छत्तीसगढ़ में किसी नगर पंचायत में ऐसा पहली बार देखने को मिला, जब लोग शहर में नहीं, शहर से ग्राम पंचायत में शामिल करने के लिए छह महीने तक धरने पर बैठे थे। इस दौरान घर-घर पानी देने का आश्वासन मिला था, जो अब तक अधूरा है।

  • 10 साल पहले ग्राम पंचायत को नपं बनाया गया था
  • 100 फीट खाई में उतरते हैं तब पानी मिलता है
  • 150 पंडों व गोंड जनजाति के लोग बस्ती में रहते हैं

प्रेमनगर नगर पंचायत से चार किमी दूर है खैरडड़िया बस्ती
नगर पंचायत प्रेमनगर के वार्ड 15 खैरडड़िया में 30 वर्षों पण्डो जनजाति के लोग रह रहे हैं, लेकिन पानी के साथ सड़क, बिजली की सुविधा नहीं है। नगर पंचायत से यह इलाका 4 किमी दूर जंगल में बसा है। यहां 150 लोग निवास करते हैं। इसमें 100 पंडो जनजाति के जबकि 50 गोंड जाति के लोग हैं। यहां विकास के लिए करोड़ों रुपए खर्च हो गए, लेकिन पंडो जनजातियों को पगडंडी रास्ता ही मिला।

सालों बाद एक हैंडपंप मंजूर भी हुआ, लेकिन दूसरी जगह लगा
सहतराम पंडो ने बताया की पिछले साल उनकी बस्ती के लिए एक हैंडपंप मंजूर हुआ था, लेकिन वह भी नहीं लगा। कुछ लोगों ने दबाव बनाकर हैंडपंप को पोया डुग्गू प्राइमरी स्कूल में लगवा दिया। इससे यहां की समस्या जा की तस है। यही स्थिति बिजली की है। पिछले चुनाव में सोलर पैनल लगाने सर्वे हुआ था, लेकिन बिजली नहीं पहंुची। रात में घने जंगल होने के कारण जंगली जानवरों से डर रहता है।

चुनाव के समय किए बड़े-बड़े वादे जीतने के बाद काेई नहीं पहुंचा
समस्या पूछने पर बचन सिंह कहते हैं कि क्या-क्या बताएं? वे हमसे ही सवाल करने लगे कि आप ही बताइये यहां क्या सुविधा दिखाई दे रही है। पानी लेकर आ रही महिलाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि देखिए किस तरह हम लोगों को पानी मिलता है। 10 साल में पानी के लिए आश्वासन ही मिलता रहा है। चुनाव के दौरान नेता वादे करते हैं, लेकिन फिर सांसद, विधायक, नपं अध्यक्ष हों या फिर पार्षद कोई सुनने वाला नहीं है।

पहंुचविहीन है बस्ती, 50 मीटर तक सड़क नहीं
50 मीटर सड़क बन जाए तो बस्ती तक गाड़ियां पहुंचने लगेंगी, लेकिन 10 साल में यहां की सड़क नहीं बनी। बड़े लोगों के घरों के आसपास सड़क बन रही है, लेकिन यहां किसी का ध्यान नहीं है। वहीं पीएम आवास योजना से मकान नहीं मिलने से भी लोग खासा नाराज हैं। बताया कि बड़े- बड़े लोगों को योजना में मकान मंजूर हुए, लेकिन एक भी गरीब परिवार को मकान नहीं मिला।

पंडो जनजाति को देश के पहले राष्ट्रपति ने लिया था गोद
देश के पहले राष्ट्रपति अविभाजित सरगुजा दौरे पर आए थे। तब उन्होंने विलुप्त होती विशेष संरक्षित जनजाति पंडो व पहाड़ी कोरवाओं को गोद लिया था। इनके विकास के लिए पहाड़ी कोरवा और पंडो विकास प्राधिकरण बना है, जिसके माध्यम से करोड़ों खर्च हो रहे हैं लेकिन यहां की पंडो जनजातियों का विकास नहीं हुआ।

मनमानी कर रहे सीएमओ इसीलिए नहीं हो रहा काम
नगर पंचायत उपाध्यक्ष आलोक साहू ने बताया की 5 साल से परिषद की हर बैठक में खैरडड़िया, ओडारबहरा, बोइरडांड बरइडांड बस्तियों में विकास के लिए यहां की समस्या को कार्ययोजना में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सीएमओ की मनमानी के कारण सड़क, पानी, बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने कभी नहीं बताई समस्या: सीएमओ
मामले में सीएमओ मोहर लाल गहरवरिया बताया की यहां की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कभी नहीं कहा है। पानी, बिजली, सड़क की वहां परेशानी है। इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।

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