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जमाखोरी:जमाखोरों ने 30 रुपए किलो में 1.20 लाख क्विंटल महुआ खरीदकर किया जाम, 58 रुपए में बेच रहे

अंबिकापुरएक महीने पहले
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  • सरगुजा के कोल्ड स्टोर में तीनों जिलों का महुआ छह माह तक रखकर कमाते हैं मुनाफा

सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में छह कोल्ड स्टोरेज में करीब 1.20 लाख क्विंटल महुआ मार्च से मई के बीच में स्टोरेज किया गया है। तब आदिवासियों से महुआ 30-32 रुपए किलो में खरीदा गया था और इसी साल सरकार ने भी महुआ का मूल्य तीस रुपए घोषित किया। इसके बाद भी आदिवासियों ने ग्रामीण इलाकों के साप्ताहिक बाजारों के माध्यम से अपनी जरूरतों के लिए महुआ जमाखोरों के पास ही बेच दिया। अब जब गांवों में महुआ नहीं है तो कोल्ड स्टोर्स से उसी महुआ को निकालकर थोक में 58 सौ रुपए क्विंटल तो फुटकर में 65 सौ रुपए क्विंटल में उन्हीं आदिवासियों को बेचा जा रहा है। दैनिक भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि सरगुजा में कोल्ड स्टोर्स महुआ की जमाखोरी से मिलने वाले फायदे की वजह से ही चल रहे हैं। कोल्ड में महुआ रखने पर प्रति क्विंटल तीन सौ रुपए तक चार्ज किया जाता है। इस साल जुलाई में महुआ 50 रुपए और अब 58 सौ रुपए क्विंटल तक हुआ है। इसके भाव को नियंत्रित नहीं किया तो दिसंबर तक 65 रुपए तक जा सकता है।

देते हैं टैक्स, लेकिन जमाखोरी की छूट नहीं
मंडी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि महुआ को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड में जमा किया जाता है। व्यापारी मंडी टैक्स जमा करते हैं लेकिन उन्हें जमाखोरी कर डेढ़ और दोगुने भाव में बेचने की छूट नहीं है। एक अधिकारी ने खुलासा किया कि व्यापारी जितने का टैक्स देते हैं उससे अधिक महुआ कोल्ड में जमा कर रखते हैं लेकिन राजनीतिक कारणों से कार्रवाही नहीं होती है।

मुनाफाखोरी का कुचक्र: आदिवासी 30 में बेचकर खुद खरीद रहे 65 में
बता दें कि सरगुजा के आदिवासी महुआ बेचकर अब तक जितना कमा नहीं सके हैं उससे कई गुना जमाखोरों ने कमाया है। जबकि सरकार चाहती तो महुआ का व्यवस्थित खरीदी करती तो महुआ से आदिवासियों की आय काे दोगुना किया जा सकता है। इसके लिए महुआ प्रसंस्करण केंद्र खुलवाया जा सकता है। सूरजपुर जिला के तात्कालिक कलेक्टर ने इसके लिए वन विभाग के माध्यम से पहल की लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ है।

गड़बड़ी:36 लाख का महुआ में मिलता टैक्स, लेकिन इसका आधा भी जमा नहीं
अधिकारियों की माने तो मंडी टैक्स एक प्रतिशत लिया जाता है। अगर एक क्विंटल महुआ है और उसका बिल 30 रुपए किलो के हिसाब से है तो एक क्विंटल का टैक्स 30 रुपए होता है। इस तरह अंबिकापुर के छह कोल्ड स्टोरेज में जमा 1.20 लाख क्विंटल महुआ का बिल 30 रुपए किलो के हिसाब से भी व्यापारी दिखाते हैं तो 36 लाख रुपए होता है लेकिन बताया जा रहा है कि इसका आधा महुआ बिना टैक्स के रखा गया है जिससे सरकार को भी टैक्स में लाखों के नुकसान की आशंका है।

कोल्ड स्टोर का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है
"कोल्ड स्टोर्स का भौतिक सत्यापन तो कोरोना संक्रमण के कारण नहीं हो सका है। व्यापारी जो कोल्ड में महुआ रखते हैं, हमारे पास आकर टैक्स जमा करते हैं अब ज्यादा माल रखकर कम का टैक्स जमा करते हैं तो वह जांच में ही पता चलेगा। आप अधिकारियों से बात कर लीजिए।"
-शिव नारायण सिंह, उप निरीक्षक, मंडी बोर्ड, अंबिकापुर

जमाखोरी की शिकायत नहीं मिली, कार्रवाई होगी
"कोल्ड स्टोर में महुआ की जमाखोरी हो रही है तो उस पर शिकायत मिलने पर कार्यवाही होगी। बोर्ड में कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया हूं, मंडी बोर्ड के प्रावधान के मुताबिक जांच कराई जाएगी और कोल्ड स्टोरेज में भौतिक सत्यापन भी होगा। शिकायत भिजवाएं।"
-हिमशिखर गुप्ता, प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड

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