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वेदर अपडेट:संभाग में अच्छी बारिश और उपज की मन्नत मांगकर तिब्बतियों ने खेत में बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक की पूजा-अर्चना की, सभी कैंप में मनाया उत्सव

अंबिकापुर14 दिन पहले
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  • छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोगों का बसेरा
  • मंत्र लिखे झंडों और वाद्य यंत्रों से भगवान की आराधना किए बौद्ध मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की

छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में तिब्बती समुदाय के लोगों ने गौतम बुद्ध के उपदेशों को यादकर उनसे देश में शांति और सभी के बेहतर स्वास्थ्य के साथ मुख्य रुप से अच्छी बारिश व खेती के लिए प्रार्थना की। इसके लिए वह पहले खेतों में गए और वहां मंत्रोच्चार कर दुआएं मांगी। उन्होंने सरगुजा संभाग में मानसून ब्रेक की बन रही स्थिति को दूर करने भगवान बुद्ध से प्रार्थना की।

बता दें कि मैनपाट में तिब्बत समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर खेती करते हैं और कई युवा आधुनिक खेती से स्थानीय लोगों को जोड़ने में लगे हैं। गौतम बुद्ध ने 14 जुलाई को ही अपना पहला उपदेश दिया था। इसी अवसर पर तिब्बती समुदाय के महिला और पुरुष इस दिन समूह बनाकर खेतों में जाते हैं और बुद्ध के उपदेशों का प्रचार करते हुए खेतों में मंत्रोच्चार करते हैं।

यहां वे बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक की पूजा भी किए और मंत्र लिखे झंडों और वाद्य यंत्रों से परम्परा अनुसार भगवान की आराधना किए। बुधवार को इस अवसर पर यहां बौद्ध मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। आज के दिन ही बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के 49 दिन बाद पांच शिष्यों के साथ साझा किया था।

इसी दिन बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के 49 दिन बाद पांच शिष्यों के साथ साझा किया था उपदेश

पानी खेलकर बुलाते हैं बारिश

समुदाय के लोग इस दिन को त्यौहार के रुप में मनाते हैं। वे ग्रन्थ को लेकर खेत व खलिहान में भी जाते हैं जहां पूजा करते हैं, ताकि हरियाली बरकरार रहे। वहीं खेत में जाकर एक दूसरे के ऊपर पानी का छिड़काव करते हैं।

इस दौरान शंख और घंटी से नाद किया जाता है। ड्रम बजाया जाता है। इसके बाद उत्साह के साथ समुदाय के लोग ग्रुप में डांस करते हैं। बता दें कि बुद्ध के उपदेश से भरे ग्रन्थ को तिब्बती परिवार हर साल अपने घर में पढ़ते हैं या लामा से पढ़वाते हैं।

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