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  • The Villagers Were Doing Jobs In Other States, Corona Returned Home, The Naxalites Included Them By Giving 10,000 Salary And Family Security.

भास्कर खास:नक्सली न बनना पड़े इसलिए ग्रामीण दूसरे राज्यों में कर रहे थे नौकरी, कोरोना ने घर लौटाया, नक्सलियों ने इन्हें 10 हजार वेतन व परिवार की सुरक्षा देकर शामिल किया

कुसमी/अंबिकापुर5 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • नक्सली संगठन कैडर बढ़ाने अपना रहे यह रणनीति, ग्रामीणों को परिवार की सुरक्षा का भी दे रहे प्रलोभन, नहीं मानने पर धमकी

कुंदन गुप्ता | छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी इलाके के नक्सल प्रभावित गांवों के युवा गांव छोड़कर शहरों में नौकरी और मजदूरी इसलिए करते हैं, ताकि नक्सली उन्हें अपने गिरोह में शामिल न कर सकें, लेकिन कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन के बाद जब शहरों से काम छोड़कर युवा मजदूर गांव लौटे हैं तो अब नक्सली उन्हें परिवार की सुरक्षा और महीने में 10 हजार वेतन देने का लालच देकर जबर्दस्ती अपने गिरोह में शामिल कर रहे हैं।
11 से अधिक युवक-युवती अब तक शामिल भी हो चुके हैं। खुफिया एजेंसियों ने इसकी जानकारी पुलिस विभाग के अफसरों को देकर अलर्ट किया है। नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले बूढ़ापहाड़ इलाके में सक्रिय माओवादी 2 दर्जन से अधिक युवाओं के संपर्क में हैं। माओवादी सरहदी सीमा और झारखंड इलाके के गांवों के लोगों को दस्ते में शामिल होने के लिए लगातार प्रलोभन दे रहे हैं। माओवादी अपने सुरक्षित मांद बूढ़ापहाड़ के इलाके में अपने कैडर को बढ़ा रहे हैं। वे अपने पुराने कैडरों और भरोसेमंद लोगों के साथ चुनचुना-पुंदाग, पीपरढाबा व चरहू सरहदी इलाके के ग्रामीणों से भी संपर्क में हैं। नक्सलियों की बढ़ती सक्रियता काे देखते हुए युवा गांव छाेड़ अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे हैं या पलायन कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान नक्सली कमजोर हुए हैं। इसके चलते कई नक्सली मुठभेड़ में मारे गए तो कई सरेंडर कर चुके हैं। ऐसे में नक्सली संगठन कैडर बढ़ाने के लिए ऐसी रणनीति अपना रहे हैं।

पीपरढाबा के 5 युवा और पुंदाग निवासी 1 युवती दस्ते में शामिल
खुफिया सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर कहा है कि बेरोजगार युवाओं को काम नहीं दिलाया तो इनमें से कई नक्सलियों के जाल में फंस भी सकते हैं। बेरोजगारों को 8 से 10 हजार मासिक वेतन और परिवार की सुरक्षा की गारंटी और जीवन स्तर में सुधारने का भरोसा दे रहे हैं। माओवादी दस्ता के पुराने कैडर मुन्ना उर्फ गहदुम और जितेन्दर सरहदी इलाके के ग्रामीणों से लगातार संपर्क में हैं। जानकारी के अनुसार पीपरढाबा के 5 युवा व पुंदाग निवासी 1 युवती दस्ते में शामिल हुई है।

भिखारी के पास है बूढ़ापहाड़ और कोयल शंख जोन की कमान
मिथिलेश मेहता उर्फ भिखारी बलरामपुर के सरहदी इलाके का पुराना नाम है। इसे गिरफ्तार कर अंबिकापुर जेल में रखा था, फिर गढ़वा, पलामू व औरंगाबाद जेल में रहा। फरवरी में जेल से छूटने के बाद इसे फिलहाल अरविंद की जगह पर क्षेत्र की कमान सौंपी है। 2018 में 1 करोड़ के इनामी माओवादी देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद की मौत के बाद सुधाकरण को बूढ़ापहाड़ की कमान सौंपी थी। सुधाकरण के आत्मसमर्पण के बाद भिखारी को कोयल शंख जोन और बूढ़ापहाड़ की कमान सौंपी है।

दिवंगत माओवादी अरविंद का करीबी रहा है रोहित उर्फ भिखारी
रोहित उर्फ अभिषेक उर्फ मिथलेश उर्फ भिखारी माओवादी अरविंद का करीबी और मेडिकल इंचार्ज रहा है। रोहित बिहार के जहानाबाद का रहने वाला है। 2015-16 में वह झारखंड में गिरफ्तार हुआ था। कुछ महीना पहले जेल से बाहर निकलने के बाद वह फिर से माओवादी दस्ते में सक्रिय हो गया। रोहित पर गिरफ्तारी से पहले 25 लाख का इनाम था। रोहित पर छत्तीसगढ़-झारखंड में कई बड़े नक्सल हमले करने का भी आरोपी है।

दस्ते में शामिल होने की ऐसी जानकारी नहीं आई है: एसपी
बलरामपुर एसपी रामकृष्ण साहू ने कहा कि पुलिस सरहदी इलाकों पर पूरी गतिविधि पर निगाह रखे हुए हैं, जिससे प्रवासी मजदूरों को नक्सली बहला-फुसला नहीं सकें। झारखंड में ऐसी स्थिति हो सकती है, यहां ऐसी जानकारी नहीं आई है। लाॅकडाउन में ऐसी स्थिति यहां नहीं है। मजदूर और ग्रामीण गलत राह में नहीं भटकें, इसके लिए लगातार उन्हें जरूरत के अनुसार रोजगार दिलाने के प्रयास हो रहे हैं।

नाबालिगों को भी गिरोह में शामिल करने की साजिश: इलाके में सक्रिय नक्सली उन परिवारों को धमका रहे हैं, जिनमें युवा सदस्य हैं। गांवों में परिवारों से युवाओं को दस्ते में भेजने के लिए कहा जा रहा है, ऐसा न करने पर अंजाम भुगतने की धमकी मिल रही है। नक्सली नाबालिगों को भी संगठन में भेजने की मांग कर रहे हैं।

इन ग्राम पंचायत के युवक-युवतियां दस्ते में शामिल: ग्राम पंचायत चुनाचुना के चरहू, महुआटोली, पचफेडी, पीपरदाबा व पुंदाग के भुताही, कोटवारी, चुनचुना के युवक शामिल हुए हैं। सभी का नाम दैनिक भास्कर के पास है, जिसमें युवतियां भी हैं। पचफेढ़ी बस्ती की कई नाबालिग लड़कियां भी हैं। सभी कोरवा जनजाति से हैं।

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